पोप ˸ यूक्रेन में युद्ध प्रेम के समाज की आवश्यकता का स्मरण दिलाता है

पोप फ्राँसिस ने फियात संघ के तत्वधान में आयोजित संगोष्ठी के 120 प्रतिभागियों से शनिवार को वाटिकन में मुलाकात की। उन्होंने उनसे कहा कि हमारी दुनिया को झकझोरने वाले विभिन्न संकटों से उबरने हेतु मानवता से देखभाल और प्यार करनेवाले एक समाज का निर्माण करने की आवश्यकता है।
पोप ने कार्डिनल लियो जोसेफ सुनेन्स पर एक सम्मेलन में भाग लेनेवालों ने शनिवार को वाटिकन में मुलाकात की।
फियात एक ऐसा संघ है जो काथलिक कलीसिया में करिश्माई नवीनीकरण से विकसित हुआ है। फियात विश्वासियों को नवीन सुसमाचार प्रचार में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना चाहता है। इस बात पर ध्यान देते हुए कि ख्रीस्तीयों को एक समुदाय के रूप में एक-दूसरे का समर्थन करने की आवश्यकता है।
पोप ने वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि जब दुनिया धर्म से दूर होती जा रही है, हमें ऐसे शिष्यों की जरूरत है जो अपने विश्वास की अभिव्यक्ति में पक्के हों तथा इस समय के पुरुषों और महिलाओं के लिए आशा की लौ प्रज्वलित करने में सक्षम हों।  
कार्डिनल सुनेन्स और वेरोनिका ओब्रिएन के कार्यों की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उनके कार्य संघ के द्वारा आज भी जारी है। वे सभी लोगों के बीच सुसमाचार के प्रचार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पोप ने कहा, "आज सुसमाचार प्रचार का सवाल कलीसिया के मिशन के केंद्र में है। हम पवित्र आत्मा के संचालन में पहले से कहीं अधिक आज बाहर जानेवाली कलीसिया का आदर्श प्रस्तुत करने के लिए बुलाये गये हैं।"
उन्होंने कहा, "एक ऐसी दुनिया में जो धर्म से दूर होती जा रही है, हमें ऐसे शिष्यों की आवश्यकता है जो अपने विश्वास की अभिव्यक्ति में पक्के हों तथा इस समय के लोगों में आशा की लौ जलाने में सक्षम हों।"
पोप ने आधुनिक चुनौतियों को सामने रखते हुए कहा कि हम इस समय जिस त्रासदी का अनुभव कर रहे हैं, खासकर, यूक्रेन में युद्ध, हमें प्रेम की सभ्यता की अनिवार्यता की याद दिलाता है। हमारे भाई-बहनों के लिए जो युद्ध की भयावहता के शिकार हैं, एक ऐसे जीवन की नितांत आवश्यकता है जिसमें सम्मान, शांति और प्रेम हो।  
पोप ने कहा, "माता मरियम के समान हमें लगातार मिशनरी भाव बनाये रखना है ताकि हम पीड़ित लोगों के निकट रह सकें और उनके लिए अपना हृदय खोल सकें। हमें उनके साथ चलना है, मानव प्रतिष्ठा के लिए उनके साथ संघर्ष करना है और सभी ओर ईश्वर के प्रेम की खुशबू फैलाना है। पवित्र आत्मा के साथ माता मरियम हमेशा लोगों के बीच रहती हैं। वे शिष्यों को उनका आह्वान करने के लिए एकत्रित करती हैं।" (प्रे.च. 1:14) और इस तरह उन्होंने पेंतेकोस्त के दिन मिशनरी कार्य की शुरूआत को संभव बनाया। वे सुसमचार प्रचार करनेवाली कलीसिया की माता हैं तथा उनके बिना हम नवीन सुसमाचार प्रचार की भावना को पूरी तरह नहीं समझ सकते।
पोप ने पृथ्वी के संकट की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि हमारा आमघर कई संकटों से हिल गया है। अतः हमें एक ऐसी मानवता, एक ऐसे समाज का निर्माण करने की आवश्यकता है जिसमें भाईचारा एवं संबंध हों। वास्तव में कार्य की शुरूआत एकता से होती है जो दूसरों की ओर झुका होता तथा उन्हें शारीरिक एवं नैतिक दृष्टिकोण से परे महत्वपूर्ण, योग्य, सराहनीय और सुन्दर मानता है। दूसरों के प्रति प्रेम हमें उनके जीवन के लिए उत्तम की खोज करने हेतु प्रेरित करता है। केवल इस तरह का संबंध स्थापित कर हम सामाजिक मित्रता बनाये रख सकते हैं जो किसी का बहिष्कार नहीं करता एवं सबके लिए खुला होता है।  
पोप ने संगोष्ठी के प्रतिभागियों को निमंत्रण दिया कि वे ईश्वर की करुणा, दयालुता एवं अच्छाई के साक्षी बनें।
उन्होंने कहा, "कलीसिया आप पर विश्वास करती है। मैं आप से अपील करता हूँ कि अपने वचनों, कार्यों एवं साक्ष्यों से मानवता के गरीब हमारे विश्व को दृढ़ संदेश दें।" संत पापा ने उन्हें अपने मिशन के लिए प्रार्थना तथा पुनर्जीवित प्रभु से शक्ति प्राप्त करने की सलाह दी।

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