पोप ˸ बाल श्रम से बच्चों की रक्षा हेतु गरीबी का सामना करें

पोप फ्राँसिस ने दक्षिण अफ्रीका में हो रहे बाल श्रम उन्मूलन पर 5वें सम्मेलन को संबोधित किया और रेखांकित किया कि बच्चों का वर्तमान और भविष्य सुनिश्चित करना पूरे मानव परिवार का वर्तमान और भविष्य सुनिश्चित करना है।
बाल श्रम उन्मूलन पर 5वां वैश्विक सम्मेलन 15 से 20 मई तक दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हो रहा है।
इस अवसर के लिए, पोप फ्राँसिस ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक श्री गाइ राइडर को संबोधित एक पत्र में प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देते एवं प्रार्थना करते हुए एक संदेश भेजा है।
छह दिवसीय आयोजन का उद्देश्य बाल श्रम के बारे में जागरूकता बढ़ाना और ऐसे समय में इसके उन्मूलन की दिशा में प्रयासों में तेजी लाना है, जब संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 160 मिलियन बच्चों - दुनिया भर में, दस में से लगभग एक को काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
पोप फ्राँसिस ने गौर किया है कि समाज में बाल श्रम उन्मूलन में काफी विकास होने के बावजूद, वैश्विक स्वास्थ्य संकट एवं विश्व के विभिन्न हिस्सों में गरीबी बढ़ जाने के कारण यह त्रासदी बदतर हो गयी है, जहाँ वयस्कों एवं किशोरों के लिए उचित काम का अवसर नहीं है, प्रवास और मानवीय आपात स्थिति लाखों लड़कियों और लड़कों को आर्थिक और सांस्कृतिक दरिद्रता के जीवन के लिए मजबूर कर दिया है।"
पोप ने खेद प्रकट करते हुए लिखा, "कई छोटे हाथ हल चलाने में व्यस्त हैं, खदानों में काम कर रहे हैं, पानी भरने के लिए लम्बी दूरी तय करते हैं और ऐसे कामों में लगे हैं जो उन्हें स्कूल जाने से रोक रहा है। बाल वेश्यावृत्ति के शिकार,"लाखों बच्चों को उनकी जवानी की खुशी और उनकी ईश्वर प्रदत्त गरिमा को लूट लिया गया है।"
बच्चों को श्रम शोषण के लिए उजागर करनेवाले मुख्य कारक के रूप में गरीबी की ओर इशारा करते हुए, पोप फ्राँसिस ने प्रतिभागियों को "वैश्विक गरीबी के संरचनात्मक कारणों और मानव परिवार के सदस्यों के बीच मौजूद निंदनीय असमानता" पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन से सामाजिक नेताओं और संबंधित निकायों - राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों की ओर से जागरूकता बढ़ेगी - "बच्चों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के उचित और प्रभावी तरीके खोजने की दिशा में, विशेष रूप से प्रोत्साहन के माध्यम से" सामाजिक सुरक्षा प्रणाली और सभी की ओर से शिक्षा तक पहुंच हेतु काम करने का प्रोत्साहन दिया।”
पोप ने बाल श्रम पर कलीसिया की विशेष चिंता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलीसिया की समाजिक शिक्षा, बच्चों के वर्तमान एवं भविष्य सुनिश्चित करने पर जोर देती है, जो समस्त परिवार का वर्तमान एवं भविष्य सुनिश्चित करता है।  
उन्होंने कहा, वास्तव में,  "जिस तरह से हम बच्चों से सम्पर्क करते हैं, जिस हद तक हम उनकी सहज मानवीय गरिमा और मौलिक अधिकारों का सम्मान करते हैं, यह व्यक्त करता है कि हम किस तरह के वयस्क हैं और बनना चाहते हैं, और हम किस तरह का समाज बनाना चाहते हैं।"
इसके बाद उन्होंने यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने के लिए परमधर्मपीठ की प्रतिबद्धता को दोहराया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय बाल श्रम शोषण का दृढ़ता से, संयुक्त रूप से और निर्णायक रूप से मुकाबला करने के अपने प्रयासों में दृढ़ है, "ताकि बच्चे जीवन के इस चरण की सुंदरता का आनंद ले सकें, साथ ही साथ, सुनहरे भविष्य के सपने देख सकें।"
अंत में, पोप फ्राँसिस ने सम्मेलन के आयोजकों और प्रवर्तकों को धन्यवाद दिया और प्रार्थना की कि उनका विचार-विमर्श "पूरी दुनिया में बच्चों के लिए स्थायी विकास और समृद्ध भविष्य की प्रतिज्ञा" हो।

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