पारिवारिक जीवन के मूल्य को फिर से खोजें, पोप फ्राँसिस

पोप ने शुक्रवार को परमधर्मपीठीय सामाजिक विज्ञान अकाडमी की आम सभा के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने वाले परिवर्तनों और लंबे संकटों के बावजूद, इसके मूल्य और सुंदरता को फिर से खोजना महत्वपूर्ण है।
वाटिकन में पिछले तीन दिनों से, "संबंधपरक भलाई के रूप में परिवार: प्रेम की चुनौती" विषय पर परमधर्मपीठीय सामाजिक विज्ञान अकादमी की आम सभा हो रही है। शुक्रवार को प्रतिभागियों का अभिवादन करते हुए, पोप फ्राँसिस ने इस विषय पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए विवाह और आज परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया।
पोप ने कहा कि "सामाजिक परिवर्तन पूरी दुनिया में विवाह और परिवारिक जीवन की स्थितियों को बदल रहे हैं" और "लंबे समय तक और कई संकट" पारिवारिक जीवन पर दबाव डाल रहे हैं।
पोप ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए "सामाजिक व्यवस्था के स्रोत और मूल के रूप में परिवार के मूल्य को फिर से खोजना है। एक भाईचारे का समाज जो आम घर की देखभाल करने में सक्षम हो।"
पोप फ्राँसिस ने गौर किया कि सदियों से विवाह और परिवार में कई बदलावों के बावजूद, "सामान्य और स्थायी लक्षण" हैं जो दोनों की महानता और मूल्य को प्रकट करते हैं। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी, "यदि इस मूल्य को एक व्यक्तिवादी और निजी तरीके से जीया जाता है, जैसा कि आंशिक रूप से पश्चिम में होता है, तो परिवार समाज के संदर्भ में अलग-थलग और खंडित हो सकता है।"
पोप ने आगे कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि "परिवार समाज के लिए अच्छा है, न कि केवल व्यक्तियों का एक समूह है, बल्कि जहाँ तक यह एक 'पारस्परिक पूर्णता के बंधन' में स्थापित संबंध है।"
पोप फ्राँसिस ने कहा, "परिवार की भलाई में विश्वास, प्रेम, सहयोग, पारस्परिकता के संबंधों को साझा करना शामिल है," जो परिवार में खुशी लाता है। "परिवार 'हम' के रिश्ते के माध्यम से लोगों का मानवीकरण करता है और साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के वैध मतभेदों को बढ़ावा देता है।"
पोप ने इस बात पर प्रकाश डाला कि "कलीसिया की सामाजिक सोच परिवार के लिए उपयुक्त इस संबंधपरक प्रेम को समझने में मदद करती है, जैसा कि इस महान परंपरा के मद्देनजर प्रेरितिक उद्बोधन ‘अमोरिस लेतिसिया’ करने की कोशिश की है और उस परंपरा के साथ, एक कदम आगे बढ़ने का प्रयास है।"
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि परिवार "स्वागत का स्थान है," इसके गुण विशेष रूप से उन परिवारों में स्पष्ट हैं जहां कमजोर या विकलांग सदस्य रहते हैं। उन्होंने कहा, "इन परिवारों में, विशेष गुण विकसित होते हैं, जो जीवन की कठिनाइयों का सामना करने और धैर्यपूर्वक धीरज रखने की क्षमता को बढ़ाते हैं।"
उन्होंने उन परिवारों की ओर भी इशारा किया "जो दत्तक और पालक परिवारों सहित समग्र रूप से समाज के लिए लाभकारी होते हैं। संत पापा ने कहा, "परिवार गरीबी का मुख्य मारक है।”
अपने संबोधन में, संत पापा फ्राँसिस ने जोर देकर कहा कि सभी देशों में परिवार के अनुकूल सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक नीतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जो पारिवारिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करना संभव बनाते हैं।
पारिवारिक जीवन की सुंदरता को फिर से तलाशने के विषय पर ध्यान आकर्षित कराते हुए पोप ने कहा कि इसकी कुछ शर्तें हैं।
पहली शर्त है, "मन की आंखों से उन विचारधाराओं के "मोतियाबिंद" को हटाना है जो हमें वास्तविकता को देखने से रोकती हैं।
दूसरी शर्त है, "प्राकृतिक विवाह और धार्मिक विवाह के बीच सामंजस्य की पुनः खोज।"
अंत में, तीसरी शर्त की व्याख्या करते हुए, उन्होंने अपने प्रेरितिक उद्बोधन ‘अमोरिस लेतिसिया की ओर ध्यान आकर्षित कराया, जो इस जागरूकता को इंगित करता है कि विवाह संस्कार की कृपा - जो 'सामाजिक' संस्कार की उत्कृष्टता है - पूरे मानव समाज को चंगा करती और श्रेष्ठ बनाती है और यह भाईचारे की खमीर है।”

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