कोर्नेलिया दी लांज सिंड्रोम से पीड़ित लोगों के प्रति पोप का सामीप्य

पोप फ्रांसिस ने शनिवार 14 मई को कोर्नेलिया दी लांज सिन्ड्रोम के स्वयंसेवकों के संघ के सदस्यों से मुलाकात की। पोप ने इस विकार से पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपना सामीप्य व्यक्त किया एवं स्वंयसेवकों को उनकी मदद के लिए प्रोत्साहन दिया।
कोर्नेलिया दी लांज सिन्ड्रोम एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जो 10,000 से 30,000 नवजात बच्चों में से एक को प्रभावित करता है। इस विकार के कारण विकास की गति धीमी होना, बौद्धिक अक्षमता और ऊपरी शरीर में हड्डी की असामान्यताएँ आदि समस्याएँ होती हैं। जो इससे प्रभावित लोगों और उनके परिवारों दोनों के लिए परेशानी और बड़ी कठिनाई का कारण बनता है।
पोप ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा, "मैं आपके संघ के स्वयंसेवकों के प्रति अपनी सराहना व्यक्त करता हूँ जो हमारे सबसे कमजोर भाइयों एवं बहनों की चिंता करते और उनलोगों का समर्थन करते हैं जो उनकी देखभाल करते हैं। एकजुटता की संस्कृति एक भ्रातृपूर्ण समाज के निर्माण में भागीदारी को स्पष्ट रूप से व्यक्त करती है, जिसके केंद्र में मानव व्यक्ति है।"
पोप ने इटली के भिंचेंसो प्लासिदा का विशेष रूप से अभिवादन किया, जो करीब 700 किलोमीटर की दौड़ लगाकर संत पापा से मिलने पहुँचे।  
भिंचेंसो प्लासिदा ने अपनी यात्रा वेनिस शहर के भिगोनोवो से शुरू किया ताकि सिन्ड्रोम के प्रति जागरूकता बढ़ाया जा सके, जिससे उनकी बेटी भलेनटीना प्रभावित हैं। वे ऐसे लोगों की मदद करनेवाले संघ के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं जो उनकी मदद करते।
पोप ने कहा कि स्वयंसेवक का ईश्वर के प्रेम एवं पड़ोसी के प्रेम को प्रकट करना सुसमाचार में येसु के निमंत्रण का ख्रीस्तीय प्रत्युत्तर है। पोप ने उन्हें अच्छाई एवं कोमलता का साक्ष्य देने का प्रोत्साहन दिया।
"ईश्वर का प्रेम हमें महसूस कराता है कि दूसरे हमारे भाई और बहन हैं जिसका स्वागत किया जाना है। यही कारण है कि आप स्वयंसेवक अपनी देखभाल के कार्यों को सम्पन्न करते हैं, आप, अधिक मानवीय और ख्रीस्तीय चेहरा प्रस्तुत कर हमारे समाज को अपना योगदान देते हैं।"  
पोप ने कोर्नेलिया दी लांज संघ के स्वयंसेवकों को प्रोत्साहन दिया कि वे दृढ़ता एवं एकता की भावना के साथ दूसरों की सेवा करें। "आप अच्छाई एवं कोमलता के साक्षी बनें।"

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