कार्डिनल टोमको की प्रेमपूर्ण सेवा याद की गई

कार्डिनल जोवन्नी बतिस्ता रे ने लोकधर्मी के सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठ के भूतपूर्व अध्यक्ष कार्डिनल जोसेफ टोमको की अन्त्येष्टि का ख्रीस्तीयाग अर्पित करते हुए कलीसिया और पोप की सेवा हेतु उनकी याद की।
पोप फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर स्थित संत पेत्रुस सिंहासन की बलिवेदी पर अर्पित किये गये दिवंगत कार्डिनल जोजेफ टोमको की अनत्येष्टि यूखारिस्तीय बलिदान में भाग लिया। उन्होंने मिस्सा बलिदान के उपरांत स्लोवाकिया के कार्डिनल की प्रशस्ति और विदाई की धर्मविधि पूरी की।
कार्डिनल जोजेफ टोमको का देहांत 08 अगस्त को रोम के उनके निवास में 98 वर्ष की आयु में हुई। वे लोकधर्मियों के बीच सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठ के सेवानिवृत अध्यक्ष थे जिन्हें पोप जोन पौल द्वितीय ने सन् 1985 में कार्डिनलमंडल में शामिल किया था।
कार्डिनल रे ने यूखरीस्तीय बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर की सेवा हेतु चुने गये कार्डिनल टोमको ने अपने भाई-बहनों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करते हुए रोमन कुरिया को अपनी लम्बी सेवा दी।
उन्होंने कहा कि उनकी सेवा में हम न्यायपूर्ण बृहद संतुलन को पाते हैं जिसमें शांति, अच्छी समझ, मिलनसारिता और उनके कई एक गुणों का समावेश पाते, जो हमेशा “सेवा के भाव” से प्रेरित थे।
कम्युनिस्ट सरकार के विरोध के कारण स्वदेश स्लोवाकिया महाधर्मप्रांत कोसिचे लौटने में असमर्थ, टॉमको का पुरोहित अभिषेक सन् 1949 में रोम में हुआ और वे सन् 1962 वाटिकन परमधर्मपीठ कार्यालय में अपनी सेवा देने हेतु नियुक्त किये गये।
रोमन कुरिया के लिए उनकी सेवा 1974 में धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सचिव स्वरूप जारी रहा, और सन् 1979 में पोप जोन पौल द्वितीय ने उन्हें धर्माध्यक्षों की धर्मसभा का महासचिव नियुक्त किया गया, जहां वे सार्वभौमिक कलीसिया की कार्यप्रणाली और उसकी समझ में पुख्ता हुए। सन् 1985 में उन्हें सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और इसके तुरंत बाद उन्हें शीघ्र कार्डिनल मंडली में शामिल किया गया।
कार्डिनल रे ने अपने प्रवचन में कार्डिनल टोमको की जीवनगाथा का जिक्र करते हुए प्रेरिताई कार्य और प्रेरितिक उत्साह पर प्रकाश डाला।
उनका उत्तरदायित्व कई नए धर्मप्रांतों, नए गिरजाघरों, शिक्षण केंद्रों, सामाजिक केंद्रों का निर्माण करने के अलावे कई देशों में परमधर्मपीठीय प्रेरितिक सम्मेलन के सहयोग के प्रेरिताई कार्यों को बढ़ावा देने हेतु पहल करना था। अपने उत्तरदायित्व के निर्वाहन में उन्होंने “हमेशा मसीह को अपने केंद्र में रखते हुए लोकधर्मियों, उनकी संस्कृतियों, उनकी परंपराओं को बढ़ावा देकर सार्वभौमिकता की भावना का सम्मान किया”।
उनकी सेवा की विरासत और दूसरों के लिए प्यार, कार्डिनल रे ने कहा, हमारे लिए सदा एक आदर्श रहेगा। “हमारी सांसारिक यात्रा को निष्ठा में जीना और कलीसिया तथा हमारे भाइयों और बहनों की सेवा में कभीअसफल नहीं होने की एक गवाही कार्डिनल टॉमको ने हमारे लिए  छोड़ रखी है।”

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