ईश्वर के आशीर्वाद को फलने-फूलने से कोई नहीं रोक सकता! पोप 

रूथ के ग्रंथ से प्रेरणा लेते हुए पोप फ्राँसिस ने वृद्धावस्था के अर्थ और मूल्य पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि युवाओं और बुजुर्गों के बीच आपसी संबेंधों के माध्यम ईश्वर का आशीर्वाद परिवार और समाज में बनी रहती है।
पोप फ्राँसिस ने संत पेत्रुस प्रांगण में बुधवारीय आम दर्शन समारोह के दौरान अपनी धर्मशिक्षा में ईश्वर के वचन के आलोक में वृद्धावस्था के अर्थ और मूल्य पर विचार किया। उन्होंने युवा लोग अपने दादा-दादी और अपने बड़ों से बात करने तथा बुजुर्गों से भी युवा लोगों से बात करने अपने जीवन का अनुभव साझा करने के लिए कहा। इसी के मद्देनजर पोप ने ट्वीट बुजुर्गों और युवा लोगों के बीच आपसी संबंध को मजबूत करने और ईश्वर की आशीष को प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया।

ट्वीट संदेश : “यदि युवा लोग कृतज्ञता के साथ जो कुछ भी पाया है,उसके प्रति खुद को खुला रखते हैं और यदि बुजुर्ग अपने भविष्य को फिर से शुरू करने की पहल करते हैं, तो लोगों के बीच ईश्वर के आशीर्वाद को फलने-फूलने से कोई नहीं रोक सकता!”

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