ईश्वरीय दया हमें दूसरों की पीड़ा को महसूस कराती है, पोप 

दिव्य करुणा रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर बेसिलिका में पोप फ्राँसिस ने पवित्र मिस्सा के दौरान अपने प्रवचन को पुनरुत्थान के बाद प्रभु येसु मसीह द्वारा अपने चेलों को दर्शन देना और उनके बीच हुई वार्तालाप पर केंद्रित किया। येसु ने अपने शिष्यों को अभिवादन कर कहा "तुम्हें शांति मिले!"
वाटिकन के पास सासिया के होली स्पिरिट गिरजाघर में पिछले दो वर्षों से पवित्र मिस्सा मनाए जाने के बाद, महामारी के प्रकोप के बाद पहली बार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में दिव्य करुणा रविवार का मिस्सा समारोह मनाया गया।
नवीन सुसमाचार प्रचार को बढ़ावा देने के लिए बने परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष रिनो फिसिकेला ने पवित्र मिस्सा समारोह की अध्यक्षता की, जिसमें पोप फ्राँसिस ने भाग लिया और प्रवचन दिया।
पोप ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि येसु ने अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान के बाद शिष्यों को तीन बार कहा, "तुम्हें शांति मिले" ।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की दया के ये शब्द ख्रीस्तियों को "खुशी देते हैं, फिर क्षमा करते हैं, और अंत में हर कठिनाई में आराम देते हैं।"
पोप ने कहा कि पहली बार येसु ने पास्का की शाम (योहन 20,19 ) को शिष्यों से कहा, "तुम्हें शांति मिले" और शिष्य खुशी से भर गए। येसु की मृत्यु के तीन दिन बाद जब वे दुख और डर में डूबे हुए थे, शिष्य अपने गुरु को त्यागने के बाद "असफलता की भावना से बोझिल" हो गए थे और यहां तक कि उनके दुखद समय में शिष्य ने उसे इनकार भी कर दिया था।
इस स्थिति में, येसु का चेहरा देखकर उन्हें शर्म आनी चाहिए थी। फिर भी, येसु द्वारा किये गये शांति अभिवादन ने उनका ध्यान " येशु की ओर" खींच लिया।
"मसीह ने उनके कामों के लिए उनकी निन्दा नहीं की, बल्कि उन्हें अपनी कृपा दिखाई और यह उन्हें पुनर्जीवित करता है, उनके दिलों को उस शांति से भर देता है जिसे उन्होंने खो दिया था और वे नए व्यक्ति बन जाते हैं, वे क्षमा पाने के अयोग्य होते हुए भी पूरी तरह से शुद्ध किये जाते हैं।"
पोप ने कहा, येसु द्वारा लाया गया आनंद हमारी अपनी असफलताओं को दूर करता है और हमें ईश्वर की दया और क्षमा किए जाने के आनंद को गले लगाने में मदद करता है। येसु द्वार प्रदान किया गया “आनन्द” हमें बिना अपमानित किए ऊपर उठाता है।
पोप फ्राँसिस ने कहा कि दूसरी बार येसु ने अपने शिष्यों से कहा, "तुम्हें शांति मिले, जैसा पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं तुम्हें भेजता हूं।"
पोप ने कहा कि ईश्वर की क्षमा प्राप्त करने के बाद, शिष्यों को "मेल-मिलाप के प्रचारक" बन जाते हैं ताकि "उस दया का प्रचार किया जा सके जिसे उन्होंने स्वयं प्राप्त की है। आज और हर दिन, गिरजाघरों की पापस्वीकार पीठिका में उपस्थित पापमोचक पुरोहितों द्वारा पापस्वीकार संस्कार ग्रहण करने वाला ख्रीस्तीय ईश्वरीय दया का अनुभव कर सके।  पापमोचक पुरोहित खुद को किसी शक्ति के धारक के रूप में नहीं बल्कि दया के एक माध्यम के रूप में देखे, क्योंकि उसने खुद ईश्वर की क्षमा का अनुभव किया है और उसी क्षमा को वह दूसरों को देता है।
पोप ने कहा कि येसु ने पूरी कलीसिया को एक "समुदाय बना दिया है जो दया का प्रचार करती है। उन्होंने कलीसिया को सभी मानवता के लिए मेल-मिलाप का एक संकेत और साधन बना दिया। हम में से प्रत्येक को जीवन की हर स्थिति में अपने आस-पास के लोगों के लिए ईश्वर की दया का प्रचार करना चाहिए।
अंतिम बार जब येसु ने अपने चेलों को अपना शांतिपूर्ण अभिवादन किया तब थोमस भी चेलों के साथ था जिसने येसु के पुनरुत्थान के प्रति अविश्वास व्यक्त किया था। उसे डांटने के बजाय, येसु थोमस की सहायता करते हैं और उसे अपनी उंगली अपने बगल में घाव पर रखने की अनुमति देते हैं।
पोप ने कहा कि येसु थोमस के साथ कठोरता के साथ व्यवहार नहीं करते और बाकी प्रेरित भी इस दयालुता से गहराई से प्रभावित होते हैं। थोमस अविश्वासी से विश्वासी बन जाता है और सबसे सरल और बेहतरीन तरीके से अपने विश्वास को प्रकट करता है: 'मेरे प्रभु और मेरे ईश्वर!'
पोप फ्राँसिस ने कहा कि प्रत्येक विश्वासी की कहानी थोमस की तरह हो सकती है। येसु हमारे पास भी "अपने करुणामय हृदय के करीब औने और उनके असीम प्रेम का अनुभव करने की कृपा प्रदान करते हैं। हमें हमारी मुश्किल घड़ी में आराम प्रदान करते हैं।
पोप ने कहा, जब हम ईश्वर की दया का अनुभव करते हैं तो यह अनुभव हमें अपने भाइयों और बहनों के घावों को देखने में मदद करता है। उन्होंने कहा, "हम सोचते हैं कि हम असहनीय दर्द और पीड़ा का अनुभव कर रहे हैं और हमें अचानक पता चलता है कि हमारे आस-पास के अन्य लोग चुपचाप और भी बदतर चीजों को सहन कर रहे हैं। यदि हम अपने पड़ोसी के घावों की परवाह करते हैं और उन पर दया का मरहम लगाते हैं, तो हम अपने भीतर पुनर्जन्म को एक ऐसी आशा पाते हैं जो हमें हमारी थकान में आराम देती है।" 

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