इटली के किशोरों से मिलेंगे पोप फ्राँसिस

पास्का सोमवार को इटली के हजारों युवा अपने धर्माध्यक्षों और शिक्षकों के साथ रोम की तीर्थयात्रा पर पहुंचे। महामारी की शुरुआत के बाद से वाटिकन में यह पहला बड़ा राष्ट्रीय आयोजन है। आज शाम की जागरण प्रार्थना में संत योहन के सुसमाचार पर किशोरों की कहानियों को सुनना और संत पापा के संदेश को सुनना तीर्थयात्रा का आकर्षण क्षण होगा।
इटली के विभिन्न धर्मप्रांतों से संघों, आंदोलनों और समुदायों के 12 से 17 वर्ष की आयु के पचास हजार से अधिक बच्चे और किशोर, 60  धर्माध्यक्षों के नेतृत्व में और दर्जनों पुरोहितों, धर्मबहनों , शिक्षकों और नेताओं के साथ रोम पहुँचे हैं। यहां इतालवी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा आयोजित किशोरों के लिए रोम की तीर्थयात्रा #’मेरा अनुसरण करो’ का कार्यक्रम चल रहा है और शाम को संत पापा फ्राँसिस के साथ बैठक सबसे महत्वपूर्ण क्षण होगा।
कार्यक्रम के अनुसार, युवा संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में पोप के साथ रेजिना चेली का पाठ करने के बाद फिर से शाम 4 बजे वीडियो, गीतों और साक्ष्यों के साथ पोप का स्वागत करने के लिए संत पेत्रुस महागिरजाघर प्रांगण में लौटेंगे। शाम 5.30 बजे, पोप फ्राँसिस पापामोबाइल में प्रांगण में प्रवेश करेंगे। प्रांगण में युवा अपने जीवन अनुभव आधार पर संत जोहन के सुसमाचार के अध्याय 21, 1-19 पर टिप्पणी करेंगे। इसके बाद पोप फ्राँसिस युवाओं को संदेश देंगे।
तीर्थयात्रा आयोजक कहते हैं कि इस आयोजन का लक्ष्य, "भ्रातृत्व और विश्वास के अनुभव को जीना है। महामारी के कारण लंबे विराम के बाद वाटिकन में इतालवी बच्चों के साथ पोप की यह पहली मुलाकात है और यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह पास्का महोत्सव के एक दिन बाद हो रहा है, एक उत्सव जो विश्वास और आशा को जन्म देता है, तथा यह पुनर्जन्म का प्रतीक है।"
त्रिवेनेटो के युवा कार्यालय के प्रभारी फादर डेविड ब्रुसाडिन बताते हैं, "यह किशोरों को समर्पित पहली राष्ट्रीय तीर्थयात्रा है। हमारे युवाओं ने खुद को दो बैठकों के साथ तैयार किया, जिसके दौरान वे समझ पायेंगे कि प्रभु का अनुसरण करने का क्या अर्थ है और एक साथ चलने का सही सार क्या है।"
मोल्फेटा धर्मप्रांत की शिक्षिका अलेसेंद्रा कैटलानो कहती हैं कि पास्का के आनंद और विश्वास को साझा करना और इसमें बढ़ना, यह तीर्थयात्रा का ठोस फल होगा। "मुझे यकीन है कि बच्चे इस तीर्थयात्रा द्वारा गहराई से बदले हुए वापस लौटेंगे। अपने दिलों में वे उस खुशी का स्वागत करेंगे जिसे निश्चित रूप से उन्होंने कभी अनुभव नहीं किया है। वे अपने घरों और समुदायों में उस खुशी को बाटेंगे, जो उन्हें यहाँ मिला मिलेगा।

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