आप 'महान चैंपियन' फादर मत्तेओ रिच्ची से प्रेरित हों, पोप 

पोप फ्राँसिस ने मार्चेराता विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रोफेसरों को मार्चेराता में जन्मे जेसुइट मिशनरी फादर मत्तेओ रिच्ची पर चिंतन के लिए आमंत्रित किया जिन्होंने चीन में मिशन, संवाद और शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। संत पापा ने संत जॉन हेनरी न्यूमैन के ज्ञान को भी याद किया और सुझाव दिया कि शिक्षा में निवेश करना देश के भविष्य में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका है।
पोप फ्राँसिस ने सोमवार को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन शालागार में मार्चेराता विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और विद्यार्थियों से मुलाकात की। संत पापा ने परिचय भाषण के लिए विश्वविद्यालय के रेक्टर को धन्यवाद दिया।
पोप ने कहा कि विश्वविद्यालय वह स्थान है जहाँ विद्यार्थी अपने मन को ज्ञान के क्षितिज, जीवन के क्षितिज, दुनिया के इतिहास के लिए खुला रखते हैं। बेशक एक अनुशासनात्मक क्षेत्र के गहन और व्यवस्थित अध्ययन से, लेकिन हमेशा खुलेपन में दुनिया और मानव जाति के अभिन्न ज्ञान को हासिल की जाती है। यह क्षितिज और विस्तृत हो जाता है जब प्रत्येक छात्र जो विश्वविद्यालय की दहलीज पर कदम रखता है और कुछ वर्षों के लिए यहाँ शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेता है, उनमें से प्रत्येक अपने आप में एक ब्रह्मांड है। इसलिए, विश्वविद्यालय में दो ब्रह्मांड मिलते हैं: संसार और मनुष्य का ज्ञान।  अपने इतिहास, व्यक्तित्व, अपने सपनों और बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक गुणों के साथ ... हर एक व्यक्ति एक ब्रह्मांड है, जिसे केवल ईश्वर ही पूरी तरह से, बेजोड़ सम्मान के साथ जानता है।
आगे पोप ने कहा कि इन दो क्षितिजों दुनिया और विद्यार्थी को एक साथ लाना, यह विश्वविद्यालय की चुनौती है, ताकि वे संवाद कर सकें। इस संवाद से मानवता में वृद्धि होती है। सबसे पहले स्वयं छात्र का विकास विकास होता है, वह ज्ञान और स्वतंत्रता में परिपक्व होता है, सोचने और कार्य करने की क्षमता में, सामाजिक और नागरिक जीवन में आलोचनात्मक और रचनात्मक रूप से भाग लेने के साथ-साथ, अपनी सांस्कृतिक और व्यावसायिक क्षमता को विकसित करता है। संत पापा ने संत जॉन हेनरी न्यूमैन को याद किया, उन्होंने विश्वविद्यालय पर लिखा था कि विश्वविद्यालय के माहौल में युवक "एक मानसिक आदत बनाता है जिसके गुण स्वतंत्रता, निष्पक्षता, शांत, संयम और ज्ञान हैं जो जीवन भर रहता है।" और संत पापा इसे विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा के विशिष्ट फल के रूप में संदर्भित करते हैं।
पोप ने कहा कि मानवीय विकास का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, प्रशिक्षण, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में निवेश करना देश के भविष्य के लिए सबसे अच्छा निवेश है। हम यह जानते हैं, हम इसे बार-बार सुनते हैं, लेकिन इसपर हमेशा निर्णय नहीं लिये जाते हैं।
पोप ने एक और पहलू विभिन्न संस्कृतियों के बीच मुलाकात पर विचार करते हुए कहा, “हम अच्छी तरह जानते हैं कि यह स्वचालित नहीं है। विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रोफेसरों और छात्रों को एक साथ लाना पर्याप्त नहीं है। हमें मुलाकात की संस्कृति विकसित करने की जरूरत है। और निश्चित रूप से ऐसा करने के लिए विश्वविद्यालय एक विशेषाधिकार प्राप्त स्थान है।” मार्चेराता इस संस्कृति के एक महान "चैंपियन" फादर मात्तेओ रिच्ची का जन्मस्थान है। संत पापा ने उन्हें उनकी स्मृति की रक्षा करने और उन पर अध्ययन को बढ़ावा देने हेतु उन्हें बधाई दी। वे अंतर-सांस्कृतिक संवाद के उनके उदाहरण को अद्यतन करने का प्रयास करते हैं। संत पापा ने कहा कि हर स्तर पर संकल्प के साथ, संवाद के मार्ग पर ले जाना बहुत आवश्यकता है!
चीन में काथलिक धर्म को लाने वाले महान जेसुइट मिशनरी, फादर मत्तेओ रिच्ची  का जन्म 1552 में मार्चेराता में हुआ था और 1610 में पेकिंग में मृत्यु हो गई थी। संत फ्रांसिस जेवियर, एस.जे. के प्रारंभिक प्रयासों के तीस साल बाद, फादर रिच्ची और अन्य चीन में जेसुइट मिशन को आगे बढ़ाने में सफल रहे।
अंत में पोप ने उन्हें आने के लिए पुनः धन्यवाद देते हुए पूरे विश्वविद्यालय समुदाय को शुभकामनाएं दी।

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