आइए, हम अपनी निगाहें येसु पर टिकाए रखें, पोप 

काथलिक पंचांग के तीसरे सामान्य रविवार को कलीसिया ईश वचन रविवार मनाती है। इस दिन संत पेत्रुस महागिजाघर में पवित्र मिस्सा के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आये पांच पुरुषों और तीन महिला प्रचारकों को सम्मानित करते हुए नया प्रेरितिक कार्य सौंपा।
"सब कुछ उस शब्द से शुरू हुआ जिसे ईश्वर ने हमसे कहा था," इसलिए "आइए हम अपनी निगाहें येसु पर टिकाए रखें... और उसके वचन को अपनाएं।" पोप फ्राँसिस ने ईश वचन रविवार के मिस्सा समारोह के दौरान अपने प्रवचन में कहा।
पोप ने अपने प्रवचन में पाठ के दो पहलुओं पर प्रकाश डाला: ईश वचन ईश्वर को प्रकट करता है और उसका वचन हमें मनुष्य की ओर ले जाता है। पोप ने कहा, "सुसमाचार में येसु ने प्रकट किया कि वे गरीबों और उत्पीड़ितों को मुक्त करने के लिए आये हैं," यह दर्शाता है कि ईश्वर मानवता के प्रति उदासीन या उनसे दूर नहीं हैं, बल्कि मनुष्य के करीब हैं और उनकी देखभाल करना चाहते हैं। वे अपने वचन के माध्यम से ऐसा करते हैं। संत पापा ने कहा, "वे आपके डर रुपी राख के बीच आशा को फिर से जगाते हैं, आपको अपने दुखों की भूलभुलैया में खुशी को फिर से खोजने में मदद करते हैं, एकांत की भावनाओं को आशा से भरते हैं।"
पोप फ्राँसिस ने कहा, "ईश्वर का वचन विश्वास को पोषित और नवीनीकृत करता है: आइए, हम इसे अपनी प्रार्थना और अपने आध्यात्मिक जीवन के केंद्र में रखें!"
पोप ने कहा कि ईश्वर की प्रकाशना हमें मानव जाति की ओर ले जाती है। जब हम ईश्वर को खोजते हैं, तो हम पूजा-अर्चना के बाहरी आडम्बरों और धार्मिकता में खुद को बंद करने के प्रलोभन से बाहर निकलते हैं। परमेश्वर का वचन हमें मुक्तिदायी प्रेम की शक्ति के साथ खुद से बाहर आने और अपने भाइयों और बहनों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।
विशेष रूप से, येसु ने नाजरेत के सभागृह में प्रचार करते हुए कहा कि उन्हें गरीबों को मुक्त करने के लिए भेजा गया है। पोप ने कहा, "इस तरह, वे हमें ईश्वर को सबसे अधिक प्रसन्न करने वाली आराधना दिखाते हैं: हमारे पड़ोसी की देखभाल करना।"
पोप फ्राँसिस ने कलीसिया में कठोरता के प्रलोभन की निंदा की, जिसे उन्होंने "विकृत" और एक "मूर्ति" के रूप में वर्णित किया, एक प्रकार का आधुनिक "श्रद्धांजलिवाद" जो हमें नहीं बदलता। ईश्वर का वचन, हमें बदल देता है, यह हमें चुनौती देता है, ताकि हम इस दुनिया के कष्टों और गरीबों के प्रति उदासीन न रहें। यह "हमें ईश्वर की उपासना के साथ पुरुषों एवं महिलाओं की देखभाल को मिलाने का आग्रह करता है।"
उन्होंने एक तरह की "दिव्य आध्यात्मिकता" के खिलाफ भी बात की, जैसा कि कलीसिया आज एक और प्रलोभन का सामना कर रही है - एक तरह का "प्रज्ञानवाद" जो ईश्वर के उन वचनों का प्रस्ताव करता है जो वास्तविकता से बाहर है। संत पापा ने कहा कि ईश्वर का वचन ख्रीस्तियों के रोजमर्रा की जिंदगी में, ठोस परिस्थितियों में देहधारण करता है, ताकि ख्रीस्तीय अब उदासीन न रहें, लेकिन अपने भाइयों और बहनों तक अपनी रचनात्मक पहुंच बनायें।
पोप फ्राँसिस ने जोर देकर कहा, "वचन आज देह धारण करना चाहता है।" पोप ने मिस्सा के दौरान सम्मानित किये जाने वाले प्रचारकों के नये प्रेरितिक कार्यों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा, "उन्हें येसु के सुसमाचार की सेवा करने, वचन घोषणा करने के महत्वपूर्ण कार्य हेतु बुलाया गया है, ताकि प्रभु की सांत्वना, आनंद और उनकी मुक्ति सभी तक पहुंच सके।"
उन्होंने कहा कि यह मिशन सभी ख्रीस्तियों का भी है, "दुनिया में ईश वचन का नबी एवं विश्वसनीय दूत बनना।" उन्होंने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे "पवित्र शास्त्र के प्रति जुनून को बढ़ायें।" पोप ने उन्हें "ईश वचन को कलीसिया के जीवन और प्रेरितिक गतिविधि के केंद्र में रखने, ईश वचन को पढ़ने, चिंतन करने और दैनिक जीवन में इसका अभ्यास करने हेतु" प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, " इस तरह, हम किसी भी तरह की कठोरता, धर्म की कठोरता से मुक्त हो जाएंगे, आध्यात्मिकता के भ्रम से मुक्त हो जाएंगे जो हमें हमारे भाइयों और बहनों की परवाह किए बिना 'कमरे में' छोड़ देता है।" इसलिए,  "आइए, हम ईश्वर के वचन को सुनें, प्रार्थना करें। आइए, हम ईश्वर के वचन को व्यवहार में लाएं।"

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