अभी भी बहुत से लोग गुलामी में फंसे हुए हैं, पोप 

पोप फ्राँसिस अंतर्राष्ट्रीय त्रित्वमय एकजुटता सम्मेलन में प्रतिभागियों से मुलाकात की। पोप ने उनके करिश्मे की वास्तविकता की ओर इंगित किया जो गुलामी, उत्पीड़न, बहिष्कार और उत्पीड़न के पीड़ितों के साथ धार्मिक उत्पीड़न और एकजुटता के खिलाफ कार्रवाई को बढ़ावा देता है।
पोप फ्राँसिस वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में "अंतर्राष्ट्रीय त्रित्वमय एकजुटता" सम्मेलन में प्रतिभागियों का स्वागत किया। पोप ने कहा, "दुर्भाग्य से आपका करिश्मा प्रमुख वास्तविकता का है! और "ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे समय में भी, जो दासता को समाप्त करने का दावा करता है, वास्तव में, बहुत सारे पुरुष और महिलाएं हैं, यहां तक कि बच्चे भी अमानवीय परिस्थितियों में रहते और गुलाम बनाये जा रहे हैं।"
पोप ने कहा कि उनका धर्मसमाज उन लोगों के प्रति प्रतिबद्ध है, जो अपने ख्रीस्तीय धर्म के कारण गुलामी, उत्पीड़न, बहिष्कार या उत्पीड़न का सामना करते हैं। पोप फ्राँसिस ने उपस्थित सदस्यों को उनके काम के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, “करिश्मा धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सैद्धांतिक तरीके से नहीं करता है, बल्कि उन लोगों की देखभाल करके करता है जिन्हें उनके विश्वास के कारण सताया और कैद किया जाता है और साथ ही, अध्ययन के लिए जगह बनाता है जैसा कि अंजेलिकुम विश्वविद्यालय में धार्मिक स्वतंत्रता पर उनके द्वारा चलाए गए अध्ययनों के एक पाठ्यक्रम से देखा गया है।
पोप ने धर्मसंघ के संस्थापक, संत जॉन दी मथा की गवाही को याद किया, जो "ईसाई और मुस्लिम दोनों दासों की मुक्ति के लिए अपना जीवन देने हेतु मसीह द्वारा बुलाये गये थे।" वे इसे अकेले, व्यक्तिगत रूप से नहीं करना चाहते थे, लेकिन इस उद्देश्य के लिए एक नये धर्मसंघ की स्थापना की।
उन्होंने इस बात पर विचार किया कि कैसे, कई उदाहरणों और परिस्थितियों में, धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया जाता है और रौंदा जाता है, कभी-कभी खुले तौर पर और कभी-कभी दूसरों की दृष्टि से छिपाया जाता है। एक बार, मानवता को अच्छे और बुरे में विभाजित करने की आदत थी: "यह देश अच्छा है ... लेकिन यह बम बनाता है!... "नहीं, यह अच्छा है"... "और यह बुरा है ..."।
उन्होंने आगे कहा, "आज, दुष्टता सभी देशों में व्याप्त है और अच्छाई और बुराई है: "दुष्टता, आज, हर जगह, सभी राज्यों में है। शायद वेटिकन में भी!” लेकिन आप, अपनी विशिष्टता खोए बिना, करिश्मा को" कम किए बिना" आगे बढ़ने और कलीसिया के सेवा में अपने को प्रतिबद्ध करें।
अंत में पोप ने कहा कि माता मरियम और संस्थापक संत जॉन दी माथा धर्मसमाज के करिश्मे के तहत कलीसिया की सेवा में मदद करे। पोप ने अपने लिए भी प्रार्थना की मांग करते हुए उनहें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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