स्वर्ग की रानी प्रार्थना के दौरान संत जॉन 23वें की याद

स्वर्गीय रानी प्रार्थना के पूर्व बुल्गेरियावासियों का अभिवादन करते हुए संत पापा स्वर्गीय रानी प्रार्थना के पूर्व बुल्गेरियावासियों का अभिवादन करते हुए संत पापा

संत पापा ने येसु के पुनरूत्थान की खुशी का इजहार करते हुए कहा, “ख्रीस्त जी उठे हैं। वे सचमुच जी उठे हैं”। इन शब्दों के साथ संत पापा ने ऑथोडक्स और काथलिक ख्रीस्तियों का अभिवादन किया। ये वाक्य येसु ख्रीस्त की मृत्यु और बुराई पर अद्वितीय विजय की खुशी को घोषित करते हैं। ये हमारे हृदय में विश्वास और साक्ष्य को बयां करते हैं कि येसु जीवित है। वे हमारी आशा हैं और वे आश्चर्यजनक रुप से युवाओं को विश्वास में लाते हैं। उनके द्वारा दी जाने वाली शिक्षा हमें जवान और नवीन बनाती तथा हमें पूर्ण जीवन प्रदान करती है। आप सबों के लिए मेरा पहला वाक्य यह है कि येसु ख्रीस्त जीवित हैं और वे चाहते हैं कि आप जीवित हों। वे आप में हैं, आप के साथ रहते और आप को कभी नहीं छोड़ते हैं। आप उनसे कितनी भी दूर चले जाएँ लेकिन पुनर्जीवित प्रभु आप के साथ रहते हैं। वे आप को बुलाते हैं, आप के वापस लौट आने प्रतीक्षा करते जिससे आप पुनः नहीं शुरूआत कर सकें। जब आप को लगता है कि आप अपने जीवन के दुःखों के कारण बुढ़े हो जा रहें हैं, भय या क्रोध, संदेश या असफलता से ग्रसित है तो वे सदा आप के साथ रहते औऱ अपनी शक्ति और आशा से आप को भर देते हैं। (क्रिस्तुस भीभीत 1-2)  

संत पापा ने कहा कि येसु ख्रीस्त पर हमारा विश्वास जो मृतको में से जी उठे हैं, इस संदेश को दो हजार सालों से विश्व में प्रसारित किया जा रहा है। हम उन उदार प्रेरितिक कार्यों में संलग्न विश्वासियों के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव अर्पित करते हैं जिन्होंने सुसमाचार प्रचार हेतु अपने को निःस्वार्थ भावना से अर्पित कर दिया है। कलीसिया के इतिहास और यहाँ बुल्गारिया में हम कितने ही महान प्रेरितों को देखते हैं जिन्होंने अपने जीवन को पवित्रता में व्यतीत किया है। मैं “बुल्गारिया के संत” मेरे पूर्वाधिकारी संत पापा योहन 23वें की याद करता हूँ जिन्हें इस धरती पर विशेष याद करते हुए सम्मान दिया जाता है जिनका जीवन काल सन् 1925 से 1934 तक रहा। यहाँ उन्होंने पूर्वी कलीसिया का सम्मान करते हुए अन्य दूसरे धार्मिक विश्वासियों के संग एक मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित किया। उनका राजनायिक और प्रेरितिक अनुभव ने बुल्गारिया को गहरे रुप में प्रभावित किया जिसके फलस्वरुप उन्होंने कलीसिया में ख्रीस्तीय एकतावद्धर्क कलीसिया वार्ता को प्रोत्साहित किया जिसे द्वितीय वाटिकन महासभा में महत्वपूर्ण स्वीकृति मिली, जिसका आयोजन वे स्वयं करना चाहते थे। हम इस धरती के प्रति शुक्रगुजार जिन्होंने हमें एक बुद्धिमान और अंतःप्रज्ञा प्रेरित “भले संत पापा योहन 23वें” को प्रदान किया।

इस अंतर-कलीसियाई एकतावर्धक वार्ता का अनुसरण करते हुए मैं कुछ ही समय बाद बुल्गेरिया के विभिन्न अंतरधार्मिक विश्वासियों के प्रतिनिधियों से भेंट करूंगा। बुल्गारिया एक अर्थोडोक्स देश होने के नाते कई धर्मों के मिलन और वार्ता का एक स्थल बनता है। विभिन्न अंतरकलीसियाई प्रतिनिधियों का इस मिलन में शामिल होना हमारे लिए इस बात की निशानी है कि हम अपने में “वार्ता की संस्कृति को एक राह, आपसी सहयोग को आचार संहिता और आपसी समझदारी को एक विधि और मानक के रूप में लेने की चाह रखते हैं।

हम अपने को संत सोफिया की प्रचीनतम और आचार्य संत अलेक्सांद्रे नेवेस्की की कलीसिया के निकट पाते हैं जहाँ अभी-अभी मैंने संत सिरिल और संत मेथोडेयुस, स्लोभिक लोगों के बीच सुसमाचार प्रचरकों की यादगारी में प्रार्थना की। संत पापा फ्रांसिस ने बुल्गारिया अर्थोडोक्स कलीसिया के प्रति अपने सम्मान और प्रेम को अभिव्यक्त करते हुए प्रधिधर्माध्यक्ष नेओफिट और धर्मसभा के मेट्रोपोलिटनों को अपना अभिवादन प्रकट किया।  

अंत में संत पापा ने धन्य कुंवारी मरियम, स्वर्ग और पृथ्वी की रानी की मध्यस्थता में पुनर्जीवित येसु से प्रार्थना की जिससे बुल्गारिया सदैव एक मिलन की प्यारी धरती बनी रही। एक धरातल जहां धार्मिक, सांस्कृतिक और जातीय विभिन्नताओं से परे सभी एक-दूसरे को एक स्वर्गीय पिता की संतान के रुप में देखते और सम्मान में स्वीकार करते हैं। हम स्वर्गीय रानी प्राचीन प्रार्थना को सोफिया की कुंवारी मरियम की प्रतिमा नेस्सेबार, जिसका अर्थ स्वर्ग का द्वार है की याद करते हैं, जो बुल्गारिया में मेरे पूर्वाधिकारी संत पापा योहन 23वें को अति प्रिय थी जिसे उसने अपनी मृत्यु तक अपने हृदय के करीब धारण किया।

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