युवा दिवस पर पोप ने कहा- 'उठो, अपने जीवन से येसु की गवाही दो'

पोप फ्राँसिस ने 2021 धर्मप्रांतीय विश्व युवा दिवस के लिए अपना संदेश जारी किया और युवा ख्रीस्तियों से संत पौलुस के नक्शेकदम पर साहसपूर्वक येसु मसीह की गवाही देने का आह्वान किया। दुनिया भर के धर्मप्रांतों में 36वां विश्व युवा दिवस 21 नवंबर 2021 को मनाया जाएगा। पुर्तगाल में लिस्बन की कलीसिया विश्व युवा दिवस 2023  की तैयारी कर रही है।
पोप फ्राँसिस ने धर्मप्रांतीय विश्व युवा दिवस 2021 के लिए अपना संदेश सोमवार को इस विषय के तहत जारी किया: “उठो। जो कुछ तू ने देखा है उसका मैं तुझे साक्षी नियुक्त करता हूँ।" (प्रेरितचरित 26:16)।
अपने संदेश में, पोप फ्राँसिस ने दुनिया में युवाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की ओर इशारा किया, विशेष रूप से जब उन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण भारी असफलताओं और कठिनाइयों का सामना किया है। संत पापा ने कहा कि कई युवा लोगों ने पारिवारिक समस्याओं, बेरोजगारी, अवसाद, अकेलेपन और व्यसनी व्यवहार में वृद्धि का अनुभव किया। लेकिन महामारी के अनुभव ने युवा लोगों के गुणों को भी प्रकट किया है, जिसमें हमारी "एकजुटता के लिए झुकाव" भी शामिल है।
उन्होंने कहा, "जब भी कोई युवा गिरता है, तो एक मायने में सारी मानवता गिर जाती है।" "फिर भी यह भी सच है कि जब एक युवा उठता है तो ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया भी उठती है।" इसे ध्यान में रखते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं से "उठने" और अपने जुनून और उत्साह के साथ दुनिया को फिर से नए सिरे से शुरू करने में मदद करने का आग्रह किया।
पोप फ्राँसिस ने तब उस मार्ग पर विस्तार से प्रतिबिंबित किया जिसमें से विषय लिया गया है (प्रेरितचरित 26:16), जिसमें संत पौलुस अपने मनपरिवर्तन की कहानी बताते हैं जब वे राजा अग्रिप्पा के सामने परीक्षण के लिए खड़े थे।
पोप फ्राँसिस ने कहा कि जब जवान पौलुस ख्रीस्तियों को सताने में व्यस्त था तभी एक तेज रोशनी ने उसे अपने घोड़े से नींचे फेंक दिया और उसने येसु की आवाज सुनी। येसु ने पौलुस को (साऊल) नाम लेकर बुलाया, यह दिखाते हुए कि वे उसे व्यक्तिगत रूप से जानते थे।
पोप फ्राँसिस ने कहा, "मसीह के साथ अनाम मुलाकात नहीं, केवल एक व्यक्तिगत मुलाकात ही जीवन को बदल देती है ... यह अनुग्रह, बिना शर्त प्यार, वह प्रकाश है जिसने साऊल के जीवन को मौलिक रूप से बदल दिया।"
पोप फ्राँसिस ने कहा कि संत पौलस येसु को उत्तर देते हुए पूछते हैं, "प्रभु, आप कौन हैं?" पोप फ्राँसिस ने कहा कि एक प्रश्न हम सभी को जल्द या बाद में पूछना होगा, कि प्रार्थना क्या है: एक व्यक्तिगत संवाद और येसु मसीह के साथ संबंध।
पोप फ्राँसिस ने उल्लेख किया कि येसु यह कहकर जवाब देते हैं कि वे "येसु हैं, जिन्हें वह सता रहे हैं।" पौलुस का मानना ​​था कि वह केवल ख्रीस्तियों को सता रहा था। इसके बजाय, येसु उसे एहसास कराते हैं कि वह और कलीसिया एक ही शरीर हैं।
पोप फ्राँसिस ने कहा, "यदि कोई कलीसिया को नहीं जानता है तो वह येसु को नहीं जान सकता।" “येसु को उसके समुदाय के भाइयों और बहनों के अलावा कोई नहीं जान सकता। जब तक हम विश्वास के कलीसियाई आयाम का अनुभव नहीं करते, तब तक हम स्वयं को पूर्ण ख्रीस्तीय नहीं कह सकते।"
पोप फ्राँसिस ने कहा कि साऊल का चुनाव करके येसु दिखाते हैं कि कोई भी ईश्वर की दृष्टि में खोया नहीं है और यह कि प्रत्येक व्यक्ति यदि वा इसा मानता है - अपने हृदय में ईश्वर के प्रेम की आग को जलते हुए महसूस करता है। येसु के साथ मुलाकात ने पौलुस को जमीन पर लेटा दिया और अस्थायी रूप से अंधा कर दिया, क्योंकि प्रभु ने उसके तरीकों की त्रुटियों को प्रकट किया और उसे उसे दीन बना दिया।
पोप फ्राँसिस ने कहा कि साऊल ने तब अपना नाम बदलकर पौलुस कर लिया, जिसका अर्थ है "छोटा", जो उस गहरे हृदय परिवर्तन का संकेत था।
पोप फ्राँसिस ने यह भी नोट किया कि कितने युवा सोशल मीडिया पर इतना समय व्यतीत करते हैं, वे स्वयं की एक ऐसी छवि को चित्रित करने की कोशिश करते हैं जो वास्तविकता के अनुरूप नहीं है।
“दोपहर का सूरज- मसीह, हमें प्रबुद्ध करने और हमारी प्रामाणिकता को बहाल करने के लिए आते है, हमें हमारे सभी मुखौटों से मुक्त करते हैं। वे हमें साफ-साफ दिखाते है कि हम कौन हैं, और इसी हाल में हमसे प्यार करते हैं।”
प्रभु के साथ अपनी मुलाकात के बाद, पौसुस को दमिश्क ले जाया गया, जहां वह प्रार्थना और मौन में समय व्यतीत किया, येसु के साथ अपने नए रिश्ते को गहरा किया।
पोप फ्राँसिस ने युवा काथलिकों से पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करने का आग्रह किया, क्योंकि उन्होंने अपने युवा जोश और शक्ति को "पृथ्वी के छोर तक सुसमाचार के दूत" के रूप में जुनून में बदल दिया। जब प्रभु ने उस पर भरोसा किया तो पौलुस को "अन्यजातियों के प्रेरित" के रूप में जाना जाने लगा।
"ईश्वर सबसे बुरे सताने वाले को एक महान गवाह में बदल सकते हैं।"
पोप फ्राँसिस ने तब युवाओं से "उठने" और अपने टूटे हुए दिलों को ठीक करने के लिए येसु और उनकी शक्ति की गवाही देने के उनके मिशन को स्वीकार करने का आह्वान किया
पोप फ्राँसिस ने कहा, "प्रभु, कलीसिया और संत पापा आप पर भरोसा करते हैं और आपको उन सभी अन्य युवाओं के सामने गवाही देने के लिए नियुक्त करते हैं जिनसे आप आज के 'दमिश्क के रास्ते' पर मिलेंगे।"
पोप फ्राँसिस ने कई प्रोत्साहनों के साथ अपने संदेश का समापन किया, जिसे युवा काथलिक अपने दिल में ले सकते हैं क्योंकि वे धर्मप्रांतीय विश्व युवा दिवस 2021 की तैयारी कर रहे हैं।
- उठो! निराश या अपने आप में उलझे न रहो: एक मिशन तुम्हारा इंतजार कर रहा है! तुम भी गवाही दे सकते हो कि येसु ने तुमहारे जीवन में क्या करना शुरू किया है। येसु के नाम में, मैं तुमसे पूछता हूँ।
- उठो! गवाही दो कि तुम भी अंधे थे और प्रकाश का सामना किया। तुमने भी अपने आप में, दूसरों में और कलीसिया की एकता में ईश्वर की अच्छाई और सुंदरता को देखा है, जहां सभी अकेलेपन को दूर किया जाता है।
- उठो! प्यार और सम्मान की गवाही दो कि यह मानवीय रिश्तों में, हमारे परिवारों के जीवन में, माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद में, युवा और बुजुर्गों के बीच पैदा करना संभव है।
- उठो! सामाजिक न्याय, सच्चाई और अखंडता, मानवाधिकारों को कायम रखो। उत्पीड़ित, गरीब और कमजोर लोगों, जिनकी समाज में कोई आवाज नहीं है, अप्रवासियों की रक्षा करो।
- उठो! चीजों को देखने के नए तरीके की गवाही दो जो तुम्हारे आश्चर्य भरी आँखों से सृष्टि को देखने में सक्षम बनाता है, जो पृथ्वी को हमारे सामान्य घर के रूप में देखता है और तुम्हें एक अभिन्न पारिस्थितिकी को बढ़ावा देने का साहस देता है।
- उठो! गवाही दों कि असफलता के जीवन को फिर से बनाया जा सकता है, कि आध्यात्मिक रूप से मृत व्यक्ति नए सिरे से जी सकता है, कि जो बंधन में हैं वे एक बार फिर मुक्त हो सकते हैं, कि दुःख से अभिभूत हृदय आशा को फिर से खोज सकते हैं।
- उठो! खुशी से गवाही दो कि मसीह जीवित है! अपने युवा दोस्तों के बीच, स्कूल में और विश्वविद्यालय में, काम पर, डिजिटल दुनिया में, हर जगह उनके प्रेम और मुक्ति के संदेश को फैलाओ।

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