यूदस के विश्वासघात का संकेत

सन्त योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार
13:16-20

मैं तुम से यह कहता हूँ - सेवक अपने स्वामी से बड़ा नहीं होता और न भेजा हुआ उस से, जिसने उसे भेजा। यदि तुम ये बातें समझकर उनके अनुसार आचरण करोगे, तो धन्य होंगे। मैं तुम सबों के विषय में यह नहीं कह रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि मैंने किन-किन लोगों को चुना है; परन्तु यह इसलिये हुआ कि धर्मग्रंथ का यह कथन पूरा हो जाये: जो मेरी रोटी खाता है, उसने मुझे लंगी मारी हैं। अब मैं तुम्हें पहले ही यह बताता हूँ जिससे ऐसा हो जाने पर तुम विश्वास करो कि मैं वही हूँ। मैं तुम से यह कहता हूँ- जो मेरे भेजे हुये का स्वागत करता है, वह मेरा स्वागत करता है और जो मेरा स्वागत करता है, वह उसका स्वागत करता है जिसने मुझे भेजा।

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