शिशु सुरक्षा दिवस

"अपने बच्चे की रक्षा करने वाली माँ से बड़ा कोई योद्धा नहीं है।" (एन.के. जेमिसिन)

आज की हमारे देश की सबसे बड़ी समस्याओं में शिशु सुरक्षा भी अहम् मुद्दा है। क्योंकि विभिन्न देशों की तुलना में हमारे देश की हालत शिशु सुरक्षा के मामले में बहुत खराब है। 
प्रतिवर्ष 07 नवंबर को शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य शिशुओं की सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाना और शिशुओं की उचित देखभाल करके उनके जीवन की रक्षा करना है। हमें यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि उचित सुरक्षा और उचित देखभाल की कमी के कारण नवजात शिशुओं को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

विश्व में नवजात शिशुओं की उचित सुरक्षा ना हो पाने के कारण बहुत सारे बच्चे मौत की गोद में समा जाते है। हमारे देश में नवजात शिशु की मौत की दर हर देश से अधिक है। देश में स्वास्थ्य सम्बन्धी चीज़ों की कमी के कारण यह समस्या और बढ़ जाती है। 

सरकारों ने इस समस्या से निपटने के लिए बहुत सी योजनायें लागू की है मगर बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तथा जागरूकता की कमी के कारण शिशुओं की मृत्यु दर में कोई कमी नहीं आई है। उचित पोषण के भाव में कई बच्चे दम तोड़ देते है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण एवं समय पर एम्बुलेन्स ना मिलने के कारण बच्चे बीच रास्ते में जिंदगी की जंग हार जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की कमी एवं प्रशिक्षित दाइयों की कमी के कारण भी विभिन्न प्रकार की समस्याओं का जन्म होता है।

शिशु सुरक्षा यह केवल सरकार की नहीं वरन हम सभी की जिम्मेदारी है। हम सभी को एकजुट होकर इसके लिए आगे आना होगा तब जाकर हम अपने देश के शिशुओं की सुरक्षा के मामले में अन्य देशों की तुलना में ऊपरी पायदान पर आएंगे। हमें ना केवल शिशुओं की सुरक्षा बल्कि माताओं की सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाने पड़ेंगे क्योंकि यदि माता सुरक्षित होगी तो बच्चे भी सुरक्षित होंगे और उनकी सुरक्षा की सम्भावना में वृद्धि होगी। 
 

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