आशियाना

प्रतिकात्मक  तस्वीर
प्रतिकात्मक तस्वीर

"आशियाना" चार अक्षरों का यह शब्द, अपने में पूरी दुनिया को समेटे हुए है। सड़क पर नजर आते लाचार मज़दूर उनकी आंखों में सिर्फ एक यही ख्वाब नजर आता है कि किसी तरह आए अपने आशियाने तक पहुंच जाए। सीने में दर्द का दरिया समेटे मीलों की यात्रा पैदल ही नाप रहे है। ख्वाब सिर्फ इतना ही है कि अगर मरना ही है तो अपने आशियाने में ही मरेंगे, अपनो के बीच। सड़कों पर जो ये खेल चल रहा है वह सिर्फ उस आशियाने के लिए ही तो है।
शाम होते ही पक्षी भी अपने अपने घोंसले को लौट आते है। हम तो फिर भी इंसान है। आखिर हम अपने आशियाने को कैसे भूल सकते है। चाहे वह छोटा हो या बड़ा, कच्चा हो या पक्का आखिरकार जैसा भी क्यों ना हो आखिर है तो वह हमारा आशियाना ही। इसको छोड़कर हम कहाँ जा सकते है। यही तो हमारा आधार है और हमारी पहचान। अगर आशियाने की चाह ना होती तो सैंकड़ो लोग सड़क पर यूं ना मरते।
एक बात विचार करने वाली है कि जिस आशियाने में इतने दिनों से हम बैठकर परेशान हो रहे है या यूं कहें कि हम जिस घर से बाहर निकलने की ताक में लगे हुए है। उसी घरों में पहुंचने के लिए लाखों लोग अपनी जान हथेली पर रखकर पैदल यात्रा कर रहे है।अगर आज हमारे पास खाने को रोटी और रहने के लिए सर पर छत है तो हम सौभाग्यशाली है। चूंकि इस वक्त लाखों करोड़ों लोगों के पास इस वक्त खाने को रोटी एवं सर पर छत नही है। और अगर हमारे पास इस वक्त यह सबकुछ है तो हमें इसका सम्मान करना चाहिए।
रोटी, कपड़ा और मकान ये मनुष्य की आधारभूत ज़रूरते है। कोरोना संकट में सबसे पहले मानवीय जीवन पर अपना प्रभाव डाला है। जिसके कारण मनुष्य कई चीज़ों से वंचित हो गया है। घर से दूर रहकर काम करने वाले मजदूर के पास ना तो खाने को रोटी ही बची है और ना ही सर पर छत। कोरोना संकट से बड़ा संकट इस समय हमारे सामने उभरकर आ रहा है वह है इन मज़दूरों का संकट है जो अपने घर पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर सैंकड़ो मीलों की यात्रा पैदल कर रहे है। और जिनमे से सैंकड़ों मज़दूर घर पहुंचने से पहले ही रास्ते मे अपना दम तोड़ चुके है।
बात सिर्फ इतनी सी है कि घर चाहे कैसा भी क्यों ना हो। उसके मायने कभी कम नही होते। क्योंकि मैंने देखा है कि ना सिर्फ प्रवासी गरीब मजदूर को, बल्कि उन लोगों को भी जिनके शहरों में बड़े बड़े मकान है। वह लोग भी इस कोरोना संकट में अपने उस आशियाने का रुख कर चुके है जिसे छोड़कर वे उड़ चुके थे। आज जब पता चला कि ज़िन्दगी की कीमत पैसों से ज्यादा है तब वे वापस लौट आये। कोरोना संकट के समय में हमें संक्रमण से बचने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है वह आशियाना ही है। जहाँ रहकर हम वायरस को फैलने से रोक सकते हैं।

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