परिवारों की विश्व बैठक: सभी छोटी चीजों में ईश्वर को खोजें

परिवारों की विश्व बैठक के दौरान मुख्य भाषणों की शुरुआत करते हुए, ग्रेगोरी और लीसा पॉपक ने एक रूपरेखा पर चर्चा की, जो परिवारों को अपने सभी कार्यों में ईश्वर को खोजने में मदद करती है, इस प्रकार दैनिक पारिवारिक जीवन में आनंद लाती है।
परिवारों की विश्व बैठक वाटिकन में चल रही है। बुधवार की शाम, 5 दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत पोप फ्राँसिस की उपस्थिति में परिवार के महोत्सव के साथ की गई। फिर, गुरुवार को, घरेलू कलीसियाई जीवन के लिए पेटन संस्थान से ग्रेगोरी और लिसा पॉपक ने भाषण और पैनल चर्चा शुरू हुई। उन्होंने "घरेलू कलीसिया और धर्मसभा : घरेलू कलीसियाई जीवन की पूजन धर्म विधि के माध्यम से एक नई कलीसियाईशास्त्र की ओर" पर बातें की।
दंपति ने घरेलू कलीसियाई जीवन के पूजनविधि के बारे में भाषण दिया और इसे पारिवारिक आध्यात्मिकता का एक मॉडल बताया। ग्रेगोरी पॉपक ने समझाया, "अक्सर परिवारों को लगता है कि उन्हें ईश्वर को खोजने के लिए घर छोड़ना पड़ता है या वे व्यस्त पारिवारिक जीवन को देखते हुए काथलिक आध्यात्मिकता को घर पर लागू करने में सक्षम होने के लिए संघर्ष करते हैं। इसके बजाय, उन्होंने कहा, "इस मॉडल का लक्ष्य है कि दैनिक जीवन की बातचीत के दौरान ईश्वर को लाना।"
उनकी पत्नी लिसा ने आगे बताया कि वे जो कुछ भी करते हैं उसमें थोड़ा सा ईश्वर के प्यार को लाते हैं।
"यह पारिवारिक समय निर्धारित करने के बारे में है, यहां तक ​​कि थोड़ा सा समय भी, ताकि हम एक साथ चलना, बात करना, खेलना और प्रार्थना करना जैसी चीजें कर सकें।"
"लेकिन यह सुनिश्चित करना है कि हम जो कुछ भी करते हैं उसमें हम ईश्वर को अपने बीच लाते हैं। बहुधा हम पारिवारिक प्रार्थना में ईश्वर के साथ अपना समय बिताने के लिए एक निश्चित समय का निर्णय करते हैं परंतु उसी में ढिलाई देखी जाती है।  
ग्रेगोरी ने आगे कहा कि बच्चों के पास एक जबरदस्त आध्यात्मिक जीवन है क्योंकि उनके पास एक अद्भुत कल्पना है और वास्तव में देख सकते हैं कि ईश्वर हमारे घरों में कैसे जीवित हैं। हम ऐसा उन तरीकों से भी कर सकते हैं जिनमें हम एक-दूसरे के लिए और बाकी दुनिया के लिए आशीर्वाद के रूप में देखते हैं, खुद से पूछते हैं कि एक-दूसरे की मदद करने और एक-दूसरे के दिनों को बेहतर बनाने के छोटे-छोटे तरीके क्या हैं।
दंपति के तीन बच्चे हैं, सबसे बड़ा 29 वर्ष का और सबसे छोटा 16 वर्ष का। लिसा बताती हैं कि "एक बार जब आप रूपरेखा को जान लेते हैं तो यह इतना चुनौतीपूर्ण नहीं होता है। लोगों को यह एहसास नहीं होता है कि जो चीजें हम पूरे दिन करते हैं उन्हें या तो कड़ी मेहनत के रूप में देखा जा सकता है या एक दूसरे के लिए हमारे प्यार और हमारे लिए ईश्वर के प्यार को प्रभावी ढंग से संवाद करने के तरीके के रूप में देखा जा सकता है। वास्तव में, इस दंपति के मॉडल की रूपरेखा हर संस्कृति के हर परिवार द्वारा और हर सामाजिक-आर्थिक स्थिति में लागू करने के लिए डिज़ाइन की गई है .. "चाहे उनका परिवार कैसा भी हो।"
"ईश्वर को हर दिन हमारे करीब लाने में केवल थोड़े से ध्यान की जरुरत है।"
ग्रेगोरी और लिसा पॉपक के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती है, तो वह है जानबूझकर करना। ग्रेगोरी बताते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि "हमारे पास यह सोचने की प्रवृत्ति है कि चीजें तब होंगी जब बाकी सब कुछ हो जाएगा"। "लेकिन काम कभी पूरा नहीं होता!".. और इसलिए सवाल विभाजित करने और खतम करने के बजाय, हम कामों को कैसे विभाजित कर सकते हैं ताकि उन्हें एक साथ किया जा सके। ग्रेगोरी ने एक उदाहरण दिया, वे "रात के खाने में बातचीत शुरू करते हैं उसे बर्तन धोते समय और कपड़े धोते समय एक दूसरे पर जुर्राब गेंद फेंकने हुए जारी रखते हैं। हम जो कुछ भी करते हैं उसमें आनंद और खुशी को एकीकृत करने में सक्षम होते हैं।"

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