शुरूआती दिनों में छोटी-छोटी बीमारियां और उनका प्रबंधन

Pregnant Woman

गर्भावस्था के दौरान, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन और प्रोलैक्टिन सहित हार्मोनों में तेजी से बढ़ोतरी होती है | ये बच्चे के विकास के लिए गर्भाशय के वातावरण में उचित बदलाव कर देते हैं | और साथ ही साथ इनसे माँ को परेशानी भी हो सकती है | इन में से अधिकांश बदलाव सामान्य होते हैं |

गर्भावस्था के समय होने वाली अधिकतर छोटी-छोटी बीमारियाँ प्रसव के बाद सहज रूप से ठीक हो जाती हैं | इसलिए आपको बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नही है |

गर्भावस्था के शुरूआती समय के दौरान जड़ी-बूटियों और दवाओं के सेवन से बचना चाहिए, क्योकि ये गर्भानात्मक से भ्रूण के शरीर में प्रवेश क्र सकती हैं | कुछ दवाएं भ्रूण पर विषाक्त अथवा टैराटोजैनिक प्रभाव डालती हैं | कोई भी दवा लेने से पहले, हमेशा डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए |

मिचली आना और सुबह के समय अस्वस्थ महसूस करना

गर्भावस्था के शुरूआती हफ्तों में मिचली आना बहुत ही आम बात है | अपनी आहार सम्बन्धी आदतों का तालमेल बिठाकर इस परेशानी को कम कर सकती हैं |

गर्भावस्था से जुड़ी कुछ जटिलताओं और चिकित्सीय अवस्थाओं, जैसे गर्भ में एक से अधिक भ्रूण पलना, मोलर गर्भाधारण और थाइरोटाक्सिकासिस की वजह से तेज उलटी लग सकती है |

तेज उलटी लगने से शरीर में पानी की कमी आ सकती है और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ सकता है |

यदि आपको निम्नलिखित रोग-लक्षण दिखाई दे, तो फ़ौरन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें :
- 24 घंटे तक कोई भोजन न खाना |
- वजन में कमी आना |​
- गाढ़ा पेशाब आना अथवा 8 घंटे तक पेशाब न आना |​
- बहुत अधिक तकलीफ होना, कमजोरी आना, चक्कर आना, भ्रम होना अथवा दौरे पड़ना |​
- पेट में तेज दर्द होना, बुखार चढ़ना, उलटी आना |

सुझाव : यदि संभव हो तो कुछ सूखे भोजन खाने की कोशिश करे, जैसे ब्रेड, बिस्कुट, कम चिकनाई वाले भोजन, कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन (जैसे – चावल, नूडल, मसले हुए आलू) औए कुछ खट्टे पेय पदार्थ पीने की कोशिश करे (जैसे – नींबू पानी, आलूबुखारे का रस) | ज्यादा तले अथवा चिकनाई वाले भोजन, लहसुन और अन्य मसाले खाने से बचे और कफाटी पीने से बचे |

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