योहन बपतिस्ता की हत्या

सन्त मत्ती के अनुसार सुसमाचार
14: 1-12

 

उस समय राजा हेरोद ने ईसा की चर्चा सुनी।

और अपने दरबारियों से कहा, "यह योहन बपतिस्ता है। वह जी उठा है, इसलिए वह महान् चमत्कार दिखा रहा है।"

हेरोद ने अपने भाई फि़लिप की पत्नी हेरोदियस के कारण योहन को गिरफ़्तार किया और बाँध कर बंदीगृह में डाल दिया था;

क्योंकि योहन ने उस से कहा था, "उसे रखना आपके लिए उचित नहीं है"।

हेरोद योहन को मार डालना चाहता था; किन्तु वह जनता से डरता था, जो योहन को नबी मानती थी।

हेरोद के जन्मदिवस के अवसर पर हेरोदियस की बेटी ने अतिथियों के सामने नृत्य किया और हेरोद को मुग्ध कर दिया।

इसलिए उसने शपथ खा कर वचन दिया कि वह जो भी माँगेगी, उसे दे देगा।

उसकी माँ ने उसे पहले से सिखा दिया था। इसलिए वह बोली, "मुझे इसी समय थाली में योहन बपतिस्ता का सिर दीजिए"।

हेरोद को धक्का लगा, परन्तु अपनी शपथ और अतिथियों के कारण उसने आदेश दिया कि उसे सिर दे दिया जाये।

और प्यादों को भेज कर उसने बंदीगृह में योहन का सिर कटवा दिया।

उसका सिर थाली में लाया गया और लड़की को दिया गया और वह उसे अपनी माँ के पास ले गयी।

योहन के शिष्य आ कर उसका शव ले गये। उन्होंने उसे दफ़नाया और जा कर ईसा को इसकी सूचना दी।

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