चरवाहों की भेंट और ख़तना

संत योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार
1: 16-21

वे शीघ्र ही चल पड़े और उन्होंने मरियम, यूसुफ़़, तथा चरनी में लेटे हुए बालक को पाया। उसे देखने के बाद उन्होंने बताया कि इस बालक के विषय में उन से क्या-क्या कहा गया है। सभी सुनने वाले चरवाहों की बातों पर चकित हो जाते थे। मरियम ने इन सब बातों को अपने हृदय में संचित रखा और वह इन पर विचार किया करती थी। जैसा चरवाहों से कहा गया था, वैसा ही उन्होंने सब कुछ देखा और सुना; इसलिए वे ईश्वर का गुणगान और स्तुति करते हुए लौट गये। आठ दिन बाद बालक के ख़तने का समय आया और उन्होंने उसका नाम ईसा रखा। स्वर्गदूत ने गर्भाधान के पहले ही उसे यही नाम दिया था।

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