वाटिकन ने बौद्ध पर्व वैसाख के लिए भेजा संदेश

अंतरधार्मिक वार्ता के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद ने वैसाख पर्व के लिए अपना वार्षिक संदेश भेजा, जिसका शीर्षक है "बौद्ध और ख्रीस्तीय: आशावान लचीलेपन में एक साथ खड़े रहना।" दुनिया भर में बौद्ध महात्मा बुद्ध के जन्म के उपलक्ष्य में समारोह मनाते हैं।
दुनिया भर में कई बौद्ध शुक्रवार, 6 मई को वैसाख पर्व मना रहे हैं। अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिनों में मनाया जाने वाला यह पर्व गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान और मृत्यु की याद दिलाता है।
अंतरधार्मिक वार्ता के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद ने रविवार को इस अवसर के लिए अपना संदेश जारी किया, जिसका शीर्षक है, "बौद्ध और ख्रीस्तीय: आशावान लचीलेपन में एक साथ खड़े रहना।" वैश्विक स्तर पर मानवीय संकटों के बीच वाटिकन की हार्दिक बधाई संदेश पत्र पर परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष, कार्डिनल मिगुएल और इसके सचिव मोन्सिन्योर इंदुनिल जनकरत्ने ने हस्ताक्षर किया।
वाटिकन के अधिकारियों ने कहा, "हम ऐसे समय में लिख रहे हैं जब मानवता कई संकटों का सामना कर रही है।" "लगातार तीसरे वर्ष भी, दुनिया भर के लोग कोविद-19 द्वारा लाए गए स्वास्थ्य संकट के बंधक बन गये है।"
यह स्वीकार करते हुए कि पारिस्थितिक संकट से संबंधित लगातार प्राकृतिक आपदाओं ने "एक साझा पृथ्वी के नागरिकों के रूप में हमारी नाजुकता को उजागर किया है," उन्होंने "निर्दोष रक्त बहाने और व्यापक पीड़ा को भड़काने के लिए" जारी संघर्षों की निंदा की।
उनहोंने कहा, "दुर्भाग्य से, अभी भी ऐसे लोग हैं जो हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म का उपयोग करते हैं।"
कार्डिनल और विभाग सचिव ने संत पापा फ्राँसिस की निराशा को याद किया कि जहां मानवता "विज्ञान और विचार में अपनी प्रगति पर गर्व करती है," वहीं "शांति लाने में पीछे जा रही है।" इन संकटों से उत्पन्न त्रासदियों के जवाब में उभरती एकजुटता के संकेतों के बावजूद, उन्होंने व्यक्त किया कि "स्थायी समाधान की खोज कठिन बनी हुई है।"
वाटिकन के अधिकारियों ने कहा कि  भौतिक धन की खोज और आध्यात्मिक मूल्यों का परित्याग के कारण "समाज में एक सामान्यीकृत नैतिक गिरावट आई है।" इस संदर्भ में, संदेश ने बौद्धों और ख्रीस्तियों को सुलह और लचीलापन की तलाश में मानवता को बनाए रखने के लिए उनकी धार्मिक और नैतिक जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित होने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्रोत्साहित किया, "धार्मिक लोगों को, उनके महान सिद्धांतों से निरंतर, आशा की दीपक बनने का प्रयास करना चाहिए। यह भले ही छोटा हो, फिर भी उस मार्ग को प्रकाशित करता है जो मानवता को आध्यात्मिक शून्यता पर विजय की ओर ले जाता है जो इतने गलत काम और पीड़ा का कारण बनता है।"
"सुसमाचार कभी भी उत्तर के रूप में हिंसा का सुझाव नहीं देता है।" उन्होंने गौर किया कि येसु द्वारा घोषित आशीर्वचन "हमें दिखाता है कि कैसे दुनिया के बीच में आध्यात्मिक मूल्यों को प्राथमिकता देना चाहिए।"
वाटिकन के अधिकारियों ने बौद्धों की करुणा और ज्ञान की प्रशंसा की जो विभिन्न सामाजिक पहलों को प्रेरित करती है और आशा के महत्व पर प्रकाश डालती है। "जैसा कि संत पापा फ्राँसिस ‘लौदातो सी’ में कहते हैं, हमारे पास हमेशा एक रास्ता है जिसे हम अपनी शुरुआत फिर से कर सकते हैं, हम अपनी समस्याओं को हल करने के लिए हमेशा कुछ तो कर ही सकते हैं।"
वाटिकन ने अपना विश्वास व्यक्त किया कि आशा हमें निराशा से बचाती है। "आइए हम एक बेहतर कल के लिए मिलकर काम करें!"
वाटिकन के अधिकारियों ने अपने "मित्रों" को की शुभकामनाएं देते हुए अपने संदेश को समाप्त किया, "एक अच्छा वैसाख उत्सव आशा को जीवित रखे और ऐसे कार्य उत्पन्न करे जो वर्तमान संकटों के कारण होने वाली प्रतिकूलताओं का स्वागत और प्रतिक्रिया देगा।"
25 से अधिक वर्षों से, परमधर्मपीठीय परिषद वैसाख के लिए संदेश भेज रही है और इसी तरह रमजान और दिवाली के लिए भी संदेश भेजती है।

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