यौन शोषण करने के आरोप में पुरोहित को 18 साल की कैद

नई दिल्ली, 2 मई, 2022: केरल की एक अदालत ने एक कैथोलिक पुरोहित को चार नाबालिग सेमिनरीयंस का यौन शोषण करने के आरोप में 18 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) मामलों से निपटने वाली अतिरिक्त सत्र अदालत ने 29 अप्रैल को फादर थॉमस परकलाम को अपराध का दोषी पाया। 35 वर्षीय पुरोहित चेन्नई स्थित सोसाइटी ऑफ सेंट यूजीन डी माजेनोड के सदस्य हैं।
मण्डली के अधिकारियों ने न तो प्रश्नों का जवाब दिया है और न ही आरोपी की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया है।
मामला 2016 में शुरू हुआ जब कोट्टारक्कारा सर्कल के तहत पुथूर में पुलिस ने पुरोहित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध) और पॉक्सो अधिनियम की अन्य संबंधित धाराओं के तहत दंडनीय अपराध करने का मामला दर्ज किया।
तिरुवनंतपुरम में बाल कल्याण समिति को शिकायत मिलने के बाद यौन शोषण का मामला सामने आया। घटना के समय सभी 16 वर्ष की आयु के पीड़ित, कोल्लम जिले के पुल्माला में एक सेमिनरी के छात्र थे। पुरोहित इसके रेक्टर थे। न्यायाधीश के एन सुजीत ने फादर थॉमस को दोषी पाया। वह पुनालुर के धर्मप्रांत के तहत कोट्टाराक्कारा पैरिश के पूर्व पुरोहित भी थे।
तीन मामलों में पुरोहित को पांच-पांच साल की सजा और चौथे मामले में तीन साल की सजा सुनाते हुए न्यायाधीश सुजीत ने उसे हर मामले में एक-एक लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
अदालत ने यह भी सिफारिश की कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीड़ितों को उनके द्वारा झेले गए शारीरिक और मानसिक आघात के अनुरूप पर्याप्त मुआवजा प्रदान करे।
अदालत ने कहा, "तत्काल मामले में सामने आई तथ्यात्मक परिस्थितियों से पता चलता है कि यौन हमले के कारण पीड़ित लड़कों को शारीरिक और मानसिक आघात और अहंकार का सामना करना पड़ा था, उनका पुनर्वास करना आवश्यक है।" पुलिस हिरासत से फरार हो गए आरोपी को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया गया है।
यह ताजा मामला है जहां एक कैथोलिक पुरोहित को नाबालिगों के यौन शोषण करने के लिए दंडित किया गया था।
29 दिसंबर, 2021 को मुंबई की एक पोक्सो अदालत ने बॉम्बे आर्चडायसीस के फादर लॉरेंस जॉनसन को 2015 में एक किशोर लड़के के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पुरोहित को 2016 में गिरफ्तार किया गया था।
2017 में, केरल के कन्नूर जिले की एक पॉक्सो अदालत ने केरल के मनांथवडी धर्मप्रांत के फादर रॉबिन वडक्कुमचेरी को 15 साल की लड़की के साथ बार-बार बलात्कार करने और गर्भवती करने के आरोप में 20 साल जेल की सजा सुनाई। वह कोट्टियूर में सेंट सेबेस्टियन चर्च के पल्ली पुरोहित थे।
2015-2017 के दौरान केरल में पुरोहितों से जुड़े बाल शोषण की कम से कम पांच बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं।
इस तरह की घटनाओं में वृद्धि ने 2017 में केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल को छात्रों के साथ बातचीत करने वाले पुरोहितों और धर्मबहनों के लिए एक प्रोटोकॉल पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
परिषद के तत्कालीन उप सचिव और प्रवक्ता फादर वर्गीस वल्लिकट ने कथित तौर पर ऐसे मामलों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया
केरल में पहली पॉक्सो सजा में, 8 दिसंबर, 2016 को एर्नाकुलम की एक अदालत ने कोट्टापुरम धर्मप्रांत के फादर एडविन फिगारेज़ को एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के लिए दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 215,000 रुपये जुर्माना भरने का भी आदेश दिया।
इससे पहले उसी साल अक्टूबर में, कन्नूर जिले के एक सेमिनरी के रेक्टर फादर जेम्स थेकेमुरीयल को एक सेमिनरियन्स के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
2014 में, केरल के त्रिचुर आर्चडायसिस के तहत थिक्कट्टुस्सरी में सेंट पॉल चर्च के पुरोहित राजू कोक्कन को नौ साल की बच्ची के साथ कई बार बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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