'मेरा नया मिशन भाईचारे को बढ़ावा देना होगा', धर्माध्यक्ष मार्टिनेली

दक्षिणी अरब के नवनियुक्त प्रेरितिक विकार धर्माध्यक्ष पावलो मार्टिनेली, अरब प्रायद्वीप में अपने नए मिशन के बारे में वाटिकन न्यूज से बात की।
1 मई को पोप फ्रांसिस ने धर्माध्यक्ष पॉल हिंडर द्वारा प्रस्तुत इस्तीफे को स्वीकार करने के बाद धर्माध्यक्ष पावलो मार्टिनेली, ओ.एफ. कैप को दक्षिणी अरब का प्रेरितिक विकार नियुक्त किया।
दक्षिणी अरब विकारिएट में ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और युद्धग्रस्त यमन शामिल हैं। इन बहुसंख्यक मुस्लिम देशों में लगभग दस लाख काथलिकों का एक छोटा समुदाय है, जो प्रायः विदेशी अप्रवासी श्रमिकों और विभिन्न देशों के प्रवासियों से बना है। 1916 से, अरबी प्रायद्वीप को फ्रांसिस्कन परिवार के सदस्यों को सौंपा गया है।
वर्तमान में धर्माध्यक्ष मार्टिनेली मिलान महाधर्मप्रांत के  सहायक धर्माध्यक्ष हैं। उनहोंने बहुसंख्यक मुस्लिम संदर्भ में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के बीच अपने नए मिशन की चुनौतियों के बारे में वाटिकन न्यूज का अंतोनेल्ला पलेर्मो से बात की।
उन्होंने कहा कि 4 फरवरी 2019 को अबू धाबी में पोप फ्राँसिस और अल-अजहर के ग्रैंड इमाम शेख अहमद अल-तैयब द्वारा हस्ताक्षरित ‘विश्व शांति और एकजुटता पर मानव बंधुत्व पर दस्तावेज़’ और उसके बाद के विश्वपत्र ' फ्रातेल्ली तुत्ती', दोनों दक्षिणी अरब में उनके प्रेरितिक कार्यों के लिए प्रेरणा के बड़े स्रोत होंगे।
उन्होंने कहा कि दो दस्तावेज उनके लिए विशेष रूप से सार्थक हैं, क्योंकि वे असीसी के संत फ्रांसिस से प्रेरित हैं, जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के बीच भाईचारा संवाद और साझा करना एक "व्यवहार्य संभावना" है।
हालांकि, धर्माध्यक्ष मार्टिनेली ने स्वीकार किया, जैसा कि यूक्रेन में युद्ध और दुनिया में चल रहे कई अन्य संघर्षों से पता चलता है कि भाईचारे के संबंधों को बढ़ावा देना किसी भी तरह से आसान काम नहीं है। वे कहते हैं कि वास्तव में, बंधुत्व को संभव बनाने के लिए दिलों को आत्म-केंद्रित से रिश्ते के दृष्टिकोण में बदलने की आवश्यकता है।
धर्माध्यक्ष मार्टिनेली ने कहा, "बंधुत्व का अर्थ है दुनिया के केंद्र में खुद को नहीं रखना, बल्कि रिश्तों को केंद्र में रखना। ख्रीस्तियों के लिए भाईचारे का रिश्ता इस मान्यता से शुरू होता है कि हम सभी ईश्वर की संतान हैं। यह एक सामान्य भाईचारा नहीं है, जिसमें मैं दूसरे व्यक्ति को केवल एक दर्पण के रूप में, अपनी छवि की एक फोटोकॉपी के रूप में पहचानता हूं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति में अच्छाई को स्वीकार करता हूं। यह एक अच्छा साझा जीवन बनाने का एक सतत प्रयास है।"
धर्म और राजनीतिक शक्ति के बीच संबंधों के विवादास्पद मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर, वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति के आलोक में, धर्माध्यक्ष मार्टिनेली ने 'फ्रातेल्ली तुत्ती' में संत पापा फ्राँसिस के शब्दों को याद करते हुए कहा, धर्मों का कर्तव्य है कि वे एक अच्छे जीवन को बढ़ावा दें और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किसी भी धर्म के शोषण के प्रयास की निंदा करें।
उन्होंने कहा, "धर्म को अच्छाई और मेल-मिलाप का एक तरीका समझा जाना चाहिए, हमेशा इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मैं दूसरों को अपने विचारों के आगे नहीं झुका सकता। धर्म की इस केंद्रीय विशेषता को संरक्षित किया जाना चाहिए।"
धर्माध्यक्ष मार्टिनेली ने यमन में चल रहे युद्ध के बारे में भी बताया, जिसका संत पापा फ्राँसिस ने इस सप्ताह के शुरू में इतालवी समाचार पत्र ‘कोरिएरे देल्ला सेरा’ के साथ अपने साक्षात्कार में फिर से उल्लेख किया। इस संबंध में धर्माध्यक्ष ने राजनयिक स्तर और जमीनी स्तर पर भी मुलाकात की संस्कृति का निर्माण करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
"[हमें स्वयं को पोषित करने वाले हितों के सांचे को तोड़ने आवश्यकता है, जमीनी स्तर पर सार्थक मुलाकातों को प्रोत्साहित करना है। सामान्य भलाई पर ध्यान केंद्रित करके लोगों को यह समझाने की भी आवश्यकता है कि तनाव के बावजूद विभिन्न संस्कृतियां एक-दूसरे का सामना कैसे कर सकती हैं।] "

Add new comment

2 + 10 =