जॉर्डन के राजा और रानी 2022 शांति की राह पुरस्कार से सम्मानित

जॉर्डन के हाशमाइट साम्राज्य के राजा अब्दुल्ला और रानी रानिया अल अब्दुल्ला को अंतरधार्मिक सद्भाव और संवाद को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका के लिए, शरणार्थियों की मेजबानी हेतु जॉर्डन के मानवीय प्रयासों के साथ-साथ शांति के लिए संभावनाओं को बढ़ाने में उनके प्रयासों के लिए 2022 शांति की राह अवार्ड से सम्मानित किया गया। पाथ टू पीस फाउंडेशन के 29वें वार्षिक उत्सव में सोमवार को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन, में आयोजित किया गया था।
9 मई को अपने 29वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर, शांति के पथ फाउंडेशन ने राजा अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन और जॉर्डन के हाशमाइट सम्राज्य की रानी रानिया अल अब्दुल्ला को 2022 पाथ टू पीस अवार्ड प्रदान किया।
प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार, इस वर्ष राजपरिवार को प्रदान किया गया, जिसका उद्देश्य है राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय दोनों क्षेत्रों में शांति के विकास के लिए उनकी प्रतिबद्धता हेतु व्यक्तियों को पहचान देना।
इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठीय मिशन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष गाब्रिएल काचा और पाथ टू पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष उपस्थित थे, जिन्होंने गाला में 370 मेहमानों का स्वागत किया।
समारोह के दौरान महाधर्माध्यक्ष काचा ने पुरस्कार विजेता के शांति की सेवा के कार्य और मध्यपूर्व एवं विश्व में अंतरधार्मिक सौहार्द पर प्रकाश डाला। उन्होंने याद किया कि जॉर्डन के राजा और रानी को पुरस्कृत किये जाने का प्रस्ताव पहली बार 2015 में आया था।
महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि शांति फाऊंडेशन के पथ का मूल ख्रीस्त द्वारा अपने प्रेरितों का अभिवादन है ˸ "तुम्हें शांति मिले"। शांति का अभिवादन मध्यपूर्व की संस्कृति में  आम बात है।
महाधर्माध्यक्ष ने धार्मिक सहिष्णुता और अंतरधार्मिक संवाद के लिए राजा अब्दुल्ला की प्रतिबद्धता की ओर इशारा किया, विशेष रूप से हशमाइट के संरक्षक के रूप में इस्लामिक और ख्रीस्तीय दोनों पवित्र स्थलों की सुरक्षा के उनके प्रयासों में, 2004 के "अम्मन संदेश" जो इस बात की पुष्टि करता है कि इस्लाम में आतंकवाद का कोई स्थान नहीं है; और उनका 2010 का एक वार्षिक "विश्व अंतरधार्मिक सौहार्द सप्ताह" का प्रस्ताव जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।
उन्होंने रानी रानिया की शिक्षा, अंतर-सांस्कृतिक संवाद के लिए चिंता की सराहना की। महाधर्माध्यक्ष ने जॉर्डन के राजा के संघर्ष क्षेत्रों से भाग रहे आप्रवासियों को शरण देने की इच्छा एवं 2014 में जॉर्डन राज्य की यात्रा के दौरान पोप फ्राँसिस की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति को पुनः प्रतिध्वनित किया, जब संत पिता ने फिलिस्तीन, इराक और सीरिया से शरणार्थियों का स्वागत करने के लिए जॉर्डन के ऐतिहासिक खुलेपन को मान्यता दी थी।
पुरस्कार वितरण समारोह में जॉर्डन के राजा ने शांति की राह फाऊंडेशन के प्रति आभार प्रकट किया तथा जॉर्डन के सभी लोगों की ओर से पुरस्कार को स्वीकार किया।
राजा अब्दुल्लाह ने गौर किया कि "शांति की राह पर हमारी यात्रा को येरूसालेम से होकर जाना चाहिए तथा कहा कि पवित्र शहर कई अरबी ख्रीस्तियों का घर है जो दुनिया के सबसे पुराने ख्रीस्तीय समुदाय का घर है और पवित्र नगर में अपनी उपस्थिति को सुरक्षित रखना सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
"येरूसालेम, भावी शांति एवं स्थिरता उसका मूल है जिसकी खोज हम कर रहे हैं और उसे भय और हिंसा का नहीं बल्कि शांति एवं सहअस्तित्व का लंगर होना चाहिए।
राजा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो-राज्य समाधान के माध्यम से एक न्यायसंगत और स्थायी शांति की दिशा में, "एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए, पूर्वी येरुसालेम को अपनी राजधानी के रूप में, साथ-साथ रहने हेतु शांति और सुरक्षा में इज़राइल के साथ काम करने का आग्रह किया।”

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