कोंगो के धर्माध्यक्षों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया

कोंगो गणराज्य के धर्माध्यक्षों ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद अपनी चिंता व्यक्त की है, जिसमें अफ्रीकी राष्ट्र के पूर्व में तीन दर्जन लोग मारे गए।
कोंगो की सरकार ने कहा है कि पूर्वी कोंगो में संयुक्त राष्ट्र के मिशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कुल 36 लोग मारे गये हैं और 170 लोग घायल हुए हैं।
इसके जवाब में, कोगों के धर्माध्यक्षों ने लोगों के गुस्से के लिए समझदारी दिखायी है किन्तु कहा है कि हिंसा को कभी बर्दास्त नहीं किया जा सकता।
कोंगो के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष मार्सेल उतेम्बी तापा द्वारा हस्ताक्षरित विज्ञप्ति में कहा गया है कि धर्माध्यक्षों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है।
धर्माध्यक्षों ने कहा है कि वे इस तनाव को दुःख और उदासी के साथ देख रहे हैं, जबकि कोंगो में यूएन के स्थिरीकरण मिशन की कमजोरियों के कारण लोगों के गुस्से पर भी गौर किया है।
कोंगो में संयुक्त राष्ट्र बल (मोनुस्को) के पास लगभग 16,000 सैनिक हैं, लेकिन देश के पूर्व में असुरक्षा को स्थिर करने में वह विफल रहा है, जो 20 वर्षों से अधिक समय से व्याप्त है।
देश के नियम के अनुसार, कोंगो के धर्माध्यक्षों ने नागरिकों को हिंसा और लूटपाट नहीं करने का आह्वान किया है जो लोगों के लिए केवल बुराई और दुःख लाता है।
उन्होंने कहा, "प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय नियम और कोंगो गणराज्य के संविधान के अनुसार हरेक नागरिक का अधिकार है।"
धर्माध्यक्षों ने पिछले सप्ताह हुए तनाव के लिए जाँच की मांग की है और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है तथा मृतकों को दिव्य करुणा को सिपूर्द किया है।
कोंगो के धर्माध्यक्षों ने शांति बनाये रखने की अपील की है और कहा है कि राजनीतिक और सामुदायिक नेता ऐसे भाषण से परहेज करें जिससे घृणा और हिंसा हो सकती है।
उन्होंने सरकार को प्रोत्साहन दिया है कि वह कांगो में संयुक्त राष्ट्र बल तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से वार्ता करें ताकि शांति में वापस लौटने की स्थिति बनायी जा सके।
प्रदर्शन को देखते हुए कोंगो की सरकार ने यूएन के शांति निर्माण मिशन के प्रवक्ता मथियस गिलमन से कहा था कि वह देश छोड़ दे।
सरकार का कहना है कि उन्होंने "अभद्र और अनुचित" टिप्पणी की, जिसका अर्थ है कि मोनुस्को के पास विद्रोही आंदोलन, एम23 से निपटने के लिए सैन्य साधनों की कमी है, जिसकी जड़ देश के पूर्व में वर्तमान तनाव में है।
यूएन मिशन के खिलाफ नवीनतम प्रदर्शन 25 जुलाई को शुरू हुई और यह देश के कई क्षेत्रों में गंभीर बन गई है।
प्रदर्शनकारियों ने दो दशकों से अधिक समय से इन क्षेत्रों में काम कर रहे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सशस्त्र समूहों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र बल की नालायकी के खिलाफ आवाज उठाई है।

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