चांद पर प्रथम अंतरिक्ष यात्री को पोप पौल षष्ठम का संदेश

20 जुलाई 1969 को टेलीविजन के सामने संत पापा पौल षष्ठम

अपोलो 11 की ऐतिहासिक चांद लैंडिंग के 50 साल पूरा होने पर, वाटिकन रेडियो द्वारा संत पापा पौल षष्ठम की याद, जिन्होंने चंद्रमा पर कामयाबी हासिल करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को आशीष प्रदान की थी।

20 जुलाई 1969 की रात को विश्व के करोड़ों स्त्री, पुरूष और बच्चों के साथ संत पापा पौल षष्ठम भी अमरीकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग को टेलीविजन पर देख रहे थे जो चांद पर पैर रखने वाले प्रथम इंसान बने थे।

उस ऐतिहासिक घटना के 50 साल पूरा होने पर वैज्ञानिक मानते हैं कि उसके समान उपलब्धि हासिल करने के लिए मानव को एक दूसरा बड़ा प्रयास करने की आवश्यकता है। उस महत्वपूर्ण घटना के प्रभाव से समकालीन पोप भी अछूते नहीं रहे। वे प्रथम संत पापा बने जिन्होंने उसी समय चंद्रमा पर पाँव रखे तीन अंतरिक्ष यात्रियों को, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के बधाई टेलीग्राम भेजने से पहले, संदेश भेजा और आशीष प्रदान की।

संत पापा पौल षष्ठम ने संदेश में कहा था, "संत पापा पौल षष्ठम आप अंतरिक्ष यात्रियों को सम्बोधित कर रहे हैं ˸ चंद्रमा पर कामयाबी हासिल करने वाले आप सभी को सम्मान, अभिवादन और आशीर्वाद।"

संत पापा पौल षष्ठम के लिए चंद्रमा पर पैर रखना और कार्य करना, ईश्वर की महानता की पहचान है। चंद्रमा स्वयं हमारी रातों के लिए दीपक है।

हमारी रातों और हमारे सपने का दीपक, जो अपने साथ हमारे जीवन के लिए आत्मा की आवाज लेकर आता है।

जब यान को चांद पर उतारा गया, तब चांद के तल को प्रकाशित किया गया जिसमें विश्वभर के लोगों ने खोज की परिमार्जित अस्पष्ट तस्वीरों को बड़ी उत्सुकता के साथ टेलीविजन पर देखा।

संत पापा पौल षष्ठम ने भी कस्तेल गंदोल्फो के वाटिकन वेधशाला से इस अनोखे दृश्य को देखा।

जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग चांद के धूल-धूसरित तल पर पाँव रखे तब संत पापा पौल षष्ठम ने ताली बजायी और कहा, "हम पूरी काथलिक कलीसिया के साथ, अपनी शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के द्वारा आपके करीब हैं।"

संत पापा पौल षष्ठम ने अंतरिक्ष यात्रा में हमेशा रूचि दिखलायी है।उन्होंने परमधर्माध्यक्ष के रूप अपने पहले भाषण में कहा था कि ईश्वर के आशीर्वाद से उन्होंने एक नये युग की शुरूआत की है। बाद में एक अवसर पर अंतरिक्ष यात्रियों को उन्होंने चंद्रमा के तल पर स्थापित करने के लिए एक उत्कीर्ण कांस्य पट्टिका भेंट की थी,जिसमें लिखा था, "प्रभु, हमारे ईश्वर, तेरा नाम समस्त पृथ्वी पर कितना महान है।"

चांद की यात्रा से वापस लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के एक टुकड़े को संत पापा को भेंट किया था जो अब भी रोम के कस्तेल गंदोल्फो में सुरक्षित है।

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