यूक्रेन के धर्माध्यक्ष ˸ बम गिरने पर भी हम लोगों के साथ रहते हैं

यूक्रेन की ग्रीक काथलिक कलीसिया में डोनेस्क के धर्माध्यक्ष स्तेफन मेनिओक ने काथलिकों से आग्रह किया है कि वे पीड़ित लोगों के लिए प्रार्थना करें जिन्हें डोनबास प्रांत में रूस की क्रूरतापूर्ण बमबारी का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध जारी होने के बावजूद पुरोहित वहाँ के लोगों के साथ हैं।
इनमें से कुछ क्षेत्रों पर 2014 में कब्जा कर लिया गया था जब रूसी समर्थित अलगाववादियों ने खुद को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया था। इसके दूसरे भाग 24 फरवरी को रूस आक्रमण के बाद उनके कब्जे में आ गये हैं। युद्ध की वर्तमान सीमाएँ पूरे क्षेत्र में फैली हुई हैं।
डोनेस्क के खारकिव के महाधर्माध्यक्ष स्तेफन मेनिओक ने वाटिकन न्यूज को काथलिक पुरोहितों की भूमिका बतलायी जो खतरों का सामना करने के बावजूद अपनी पल्लियों में अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं।
धर्माध्यक्ष मेनियोक का धर्माध्यक्षीय अभिषेक 20 वर्षों पहले, डोनेस्क – खारकिव के धर्माध्यक्ष नियुक्त किये जाने के बाद फरवरी 2002 में हुआ है।
अप्रैल 2014 में उनका धर्मप्रांत दो हिस्सों में बंट गया और वे डोनेस्क के धर्माध्यक्ष बने। उसी महीने में डोनबास में भी युद्ध शुरू हो गया था। वे पूर्वी यूक्रेन स्थित जारवानितसिया मरियम तीर्थ का दौरा करने के बाद डोनेक्स लौट रहे थे तभी उन्हें जानकारी मिली कि उनका आवास अलगाववादी के द्वारा कब्जा कर लिया गया है। अतः वे घर नहीं लौट सके एवं जापोरिजजिया में रह गये जहाँ वे अभी भी रह रहे हैं एवं अपनी धर्माध्यक्षीय कार्य जारी रख रहे हैं।   
धर्माध्यक्ष मेनिओक ने बतलाया कि उनके चार पुरोहित डोनेस्क में रह गये और अपनी प्रेरिताई जारी रखा। "एक पुरोहित लुहानस्क में रह गये। वे पल्लियों में रहे और लोग आते रहे यद्यपि आधा से अधिक लोग प्रांत छोड़ चुके हैं। 24 फरवरी से पहले ये पुरोहित इधर-उधर जा सकते थे; हालांकि, अब वे अपनी पल्लियों को नहीं छोड़ सकते, इसलिए वे सेवा के लिए बने हुए हैं।"
जब से रूस द्वारा बड़े स्तर पर आक्रमण शुरू हो गया है डोनेस्क धर्मप्रांत फिर से प्रभावित हो गया है। मारियुपोल में सेवा करनेवाला पुरोहित मुश्किल से बच पाया।
उन्होंने कहा, "हमने हाल में तीन अन्य पल्लियों को खो दिया। पुरोहितों को उन पल्लियों को क्रेमिन्ना में छोड़ना पड़ा जिनपर सेवेरोदोनेस्क में रूसी सैनिकों ने कब्जा कर लिया है। वहाँ हिंसक संघर्ष जारी है और लैसेकनस्क जो यूक्रेनी सैनिकों के नियंत्रण में है, "रूसी सेना की युद्ध रणनीति बहुत भयंकर है : सबसे पहले वे बम बरसा कर शहरों या गाँवों को ध्वस्त करते, नागरिकों को मार डालते और उसके बाद आगे बढ़ते हैं।"
खतरा धर्मप्रांत के सभी ओर है, फिर भी कुल 53 पुरोहित अपने समुदायों की सेवा जारी रखे हुए हैं।
धर्माध्यक्ष स्तेफन मनियोक का जन्म पश्चिमी यूक्रेन के लविव प्रांत में हुआ था। उन्होंने कहा, "यद्यपि मेरी मानसिकता पश्चिमी यूक्रेनी लोगों की है, मैं इन लोगों को पसंद करता हूँ। मुझे पूर्वी यूक्रेन भेजा गया क्योंकि मैं एक मिशनरी हूँ। मैं मुक्तिदाता (रेडेम्पडोरिस्ट) धर्मसमाज का सदस्य हूँ और हमारा कैरिज्म है लोगों के पास जाना जो परित्यक्त हैं। इन लोगों का दिल खुला और अच्छा है। जब हमने पल्लियों की स्थापना की तब विश्वासियों की संख्या केवल 10 थी। एक या दो साल के बाद ही गिरजाघर विश्वासियों से भरने लगा था। यह घटना अत्यन्त रोचक है।"
धर्माध्यक्ष ने कहा कि जापोरिजजिया में दुनिया के हर भाग से मानवीय मदद पहुँच रहे हैं तथा स्थानीय कारितास केंद्र एवं बसिलियन (संत बसिल महान के ऑर्डर की धर्मबहनों) धर्मबहनों द्वारा दिन और रात उसका वितरण जरूरतमंदों एवं शरणार्थियों के बीच किया जा रहा है।
कारितास मरियुपोल भी मार्च में अपने मुख्य कार्यालय पर गोलाबारी के बाद जापोरिजजिया चला गया है। इस गोलाबारी में 7 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें 2 कारितास के कर्मचारी थे।
मारितास मरियुपोल अपने शहर के शरणार्थियों की मदद करता है जिसे रूसी सैनिकों ने अपने कब्जे में ले लिया है।
धर्माध्यक्ष ने कहा, "जिन लोगों ने हम पर आक्रमण किया है, उनके प्रति हमारा मनोभाव ख्रीस्तीय होना चाहिए ˸ ईश्वर के उन बच्चों के समान जिन्होंने रास्ता खो दिया है। वे भी ईश्वर की छवि हैं किन्तु पाप से कलंकित हैं और उन्हें गलत जानकारी मिल रही होगी। हमारी प्रार्थना सच्चाई के लिए उनकी आंखों को खोल दे।"
उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि ईश्वर मुझे डोनेस्क वापस ले जायेंगे और मैं पहले से जानता हूँ कि अपने पहले उपदेश में मैं एक शब्द भी उच्चारण नहीं कर पाऊँगा बल्कि सिर्फ रोऊँगा। झूठ और बुराई पर सच्चाई की जीत हो।"  

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