परमधर्मपीठीय मिशन संघों ने 200वीं वर्षगांठ मनाई

धर्म प्रचार के लिए परमधर्मपीठीय मिशन संघ, जो लोगों के सुसमाचार प्रचार के लिए कलीसिया के तत्वावधान में आती है, मंगलवार 3 मई को इसकी स्थापना की 200वीं वर्षगांठ है।
मंगलवार, 3 मई, पोप पियुस ग्यारहवें द्वारा अपने मोतु प्रोप्रियो (स्व लिखित) रोमानोरम पोंटिफिचुम में प्रदान किए गए परमधर्मपीठीय मिशन संघों की पोंटिफिकल स्थिति की 100 वीं वर्षगांठ को भी चिह्नित करता है। मोतु प्रोप्रियो ने समाज की मिशनरी भावना और विश्वव्यापी कलीसिया के लिए इसकी आवश्यक सेवा की पुष्टि की।
उसी मोतु प्रोप्रियो द्वारा, पोप ने पवित्र बालकपन की मंडली और प्रेरित संत पेत्रुस की मंडली को भी परमधर्मपीठीय दर्जा प्रदान किया।
परमधर्मपीठीय मिशन संघों के अध्यक्ष और लोगों के सुसमाचार प्रचार के लिए कलीसिया के सहायक सचिव, महाधर्माध्यक्ष जॉमपिएत्रो दल टोसो ने वाटिकन न्यूज को बताया कि कलीसिया के जीवन और मिशनरी कार्यों में काथलिक विश्वासियों की भागीदारी को कलीसिया के नेतृत्व द्वारा आवश्यक के रूप में देखा जाता है।            
महाधर्माध्यक्ष जॉमपिएत्रो ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है; वास्तव में, यह एक आधुनिक विचार है यदि हम इसके बारे में सोचते हैं। संत पापा फ्राँसिस ने भी कई बार कहा है कि प्रत्येक बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति कलीसिया के मिशनरी कार्य में भाग लेने के लिए बुलाया गया है। परमधर्मपीठीय मिशनरी संघों के माध्यम से, विश्वासी प्रार्थना करके, दान देकर या कलीसिया की मिशनरी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।"
महाधर्माध्यक्ष दल टोसो ने आगे कहा: "इन मिशनरी कार्यों के माध्यम से और कलीसिया के काम में भाग लेकर, हम ख्रीस्तीय दुनिया भर में अपने भाइयों और बहनों के साथ अपने विश्वास को ठोस रूप से जीते हैं।"
इसकी स्थापना के 200 सालों तक धर्म प्रचार के लिए परमधर्मपीठीय मिशन सोसाइटी प्रार्थना, एनीमेशन और धन देकर विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में कई मिशनरी-संबंधित परियोजनाओं का समर्थन करती आ रही है।
सुसमाचार प्रचार के लिए परमधर्मपीठीय मिशन संघों की सबसे आश्चर्यजनक कहानी यह है कि इसकी स्थापना और प्रेरणा एक युवा फ्रांसीसी महिला, पॉलीन जेरिकोट ने की थी। उसे इसी महीने 22 मई को फ्रांस के लियोंस में धन्य घोषित किया जाएगा।
पॉलीन जरीकॉट ने दस व्यक्तियों का एक नेटवर्क स्थापित किया जिन्होंने दुनिया भर में कलीसिया के मिशनरी कार्य के लिए प्रार्थना और छोटे साप्ताहिक दान की पेशकश की।
पॉलीन मेरी जेरिकोट का जन्म 1799 में और 1862 में मृत्यु हुई। वे धर्म के प्रचार के लिए परमधर्मपीठीय मिशन संघ की संस्थापिका हैं।
25 फरवरी 1963 को संत पापा जॉन तेईस्वें ने पॉलीन को धन्य घोषित किया गया था। 26 मई 2020 को, संत पापा फ्रांसिस ने धन्य पॉलिन की मध्यस्थता द्वारा हुए चमत्कार को मान्यता देने वाले डिक्री के प्रकाशन को अधिकृत किया।
लियोन के एक धनी परिवार में जन्मी पॉलीन ने, 15 साल के आरामदायक जीवन के बाद, शारीरिक और आध्यात्मिक पीड़ा का अनुभव किया। क्षमा और गहन प्रार्थना ने उसे गंभीर आघात से उबरने के लिए प्रेरित किया और उस क्षण से उसका जीवन मौलिक रूप से बदल गया।
उसने लियोन में माता मरियम के प्रार्थनालय में एक प्रतिज्ञा के साथ खुद को ईश्वर को समर्पित किया। उसने गरीबों एवं बीमारों की सेवा करते हुए ईश्वर की सेवा में खुद को समर्पित किया।
जरूरतमंदों की मदद करने के साथ-साथ गहन प्रार्थना में अपना जीवन बिताया। उसने प्रतिदिन पवित्र युखारिस्त ग्रहण  किया और पापियों के पश्चताप और दुनिया के सुसमाचार प्रचार के लिए प्रार्थना किया करती थी।
मिशन की आर्थिक कठिनाइयों को समझते हुए, पॉलीन ने धन जुटाने के पहल को बढ़ावा दिया। जिसे आज विश्वास के प्रचार के लिए पोंटिफिकल मिशन संघ के रूप में जाना जाता है, जो आधिकारिक तौर पर 3 मई 1822 को स्थापित किया गया था।

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