कार्डिनल क्रायेस्की यूक्रेन में, 'येसु, मुझे आप पर भरोसा है'

पोप फ्राँसिस के नाम पर वाटिकन उदार सेवा विभाग के प्रीफेक्ट कार्डिनल कोनराड क्रायेस्की यूक्रेन के ज़ापोरिज़्झिया शहर के पास मानवीय सहायता प्रदान करते हुए गोली से बाल-बाल बच जाते हैं और अपने मिशन को जारी रखते हैं।
24 फरवरी को रूस के आक्रमण के बाद से उदार सेवा के लिए बने परमधर्मपीठीय विभाग के प्रीफेक्ट कार्डिनल कोनराड क्रेजेवस्की चौथी बार यूक्रेन में हैं। वे पोप फ्राँसिस के नाम पर यूक्रेन के लोगों के लिए मानवीय सहायता, रोजरी माला और आध्यात्मिक निकटता प्रदान करने गये हैं।
कार्डिनल क्रायेस्की ने पहले ओडेसा की यात्रा की, फिर शनिवार को ज़ापोरिज़्ज़िया की यात्रा की, उसके बाद वे खार्किव जायेंगे।
कार्डिनल क्रायेस्की ने शनिवार को वाटिकन न्यूज से टेलीफोन पर बात की और बताया कि उन्हें लगता है कि यह उनके जीवन का एक उल्लेखनीय दिन है।
वे कहते हैं "आज शनिवार एक विशेष दिन है, क्योंकि संत पापा द्वारा मुझे अपने दानदाता के रूप में चुने हुए नौ साल हो चुके हैं और इस दिन ही मुझे एक धर्माध्यक्ष नियुक्त किया गया था।"
कार्डिनल ने पोप फ्राँसिस की उपस्थिति में एक समारोह के दौरान 17 सितंबर 2013 को संत पेत्रुस महागिरजाघर में अपना धर्माध्यक्षीय अभिषेक प्राप्त किया।
इस वर्षगांठ पर, कार्डिनल क्रेजेवस्की एक काथलिक धर्माध्यक्ष, एक प्रोटेस्टेंट धर्माध्यक्ष और एक यूक्रेनी सैनिक के साथ यूक्रेनी शहर ज़ापोरिज़्ज़िया के पास थे।
उनकी मदद से, उन्होंने अपने मिनीबस में खाद्य सामग्रियों और अन्य जरुरी सामग्रियों को लोड किया और युद्ध की अग्रिम पंक्ति में चले गये। एक ऐसा क्षेत्र जहाँ भारी गोलीबारी के कारण "सैनिकों के अलावा कोई भी प्रवेश नहीं करता है।"
वे खाद्य पदार्थों और अन्य सहायता आपूर्ति के साथ इस अवंतर भूमि में फंसे लोगों की मदद करने के लिए गये थे।
जैसे ही उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों के लिए सामान उतारना समाप्त किया,कि कार्डिनल क्रायेस्की और उनके दल हल्के हथियारों की गोलीबारी की चपेट में आ गए।
उन्होंने घटना के बाद वाटिकन न्यूज से कहा "मेरे जीवन में पहली बार, मुझे नहीं पता था कि कहाँ दौड़ना है ... क्योंकि दौड़ना पर्याप्त नहीं है। आपको पता होना चाहिए कि कहां जाना है।"
कार्डिनल क्रायेस्की और उनके साथ गये सभी लोग इस घटना से बच गए और मिनीबस में भरी हुई सहायता देना जारी रखा। यहां तक ​​कि उन्होंने अपने पास मौजूद सभी रोजरी मालाओं को भी सौंप दिया, जिन्हें संत पापा ने आशीर्वाद दिया था। जिन्होंने माला को प्राप्त किया, तुरंत अपने गले में डाल लिया।
इसलिए, शनिवार का दिन कार्डिनल क्रायेस्की के धर्माध्यक्षीय अभिषेक की एक विशेष वर्षगांठ थी। उन्होंने इस दिन को "दया के बिना" के रूप में वर्णित किया, जैसा कि उन्होंने पवित्र सप्ताह के दिवस त्रय पर अपने अंतिम मिशन के दौरान कहा था - "न तो आँसू हैं और न ही शब्द।"
इस सबसे हालिया घटना के बाद, कार्डिनल क्रायेस्की ने अपने विश्वास को दोहराया, "हम केवल प्रार्थना को दोहरा सकते हैं: 'येसु, मुझे तुम पर भरोसा है।'"

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