सेवक बनो मेरे साथियों !

कहा जाता है कि जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा या गर्त्त खोदते हैं, वे एक दिन उसी गड्ढे में गिरते हैं। बुराई करने की प्रवृति, अधिपतियों और सत्ताधारियों के निरंकुश शासन और अधिकार की भूख कभी खत्म नहीं होती है। पद की गरिमा से और अहम् की भावना से ग्रसित एवं कुंठित मानसिकता वाले हमेशा भलाई करने वाले ईश्वर भक्त जैसे नबी येरेमियस के विरुद्ध षड्यंत्र रचते हैं ताकि उनका सर्वनाश करे। और वे लोग सफल भी हो जाते हैं। लेकिन ईश्वर सब कुछ देखता है और वह उचित समय में अपने काम को सम्पत्र करता है। येसु अपनी तीसरी और अंतिम भविष्यवाणी में अपने ऊपर आने वाली विपत्तियों के बारे में अपने शिष्यों को अवगत कराते हैं कि उसे येरुसालेम जाना पड़ेगा, मानव पुत्र को महायाजकों और शास्त्रियों के हवाले कर दिया जायेगा, वे उसे प्राणदण्ड की आज्ञा सुना कर गैरयहूदियों के हवाले कर देंगे, जिससे वे उसका उपहास करें, उसे कोड़े लगायें और क्रूस पर चढ़ायें; लेकिन तीसरे दिन वह जी उठेगा। येसु ने अपने शिष्यों को इन सारी बातों के बारे में इसलिए बताया ताकि वे उस समय विचलित न हों। लेकिन उसके शिष्य इन सब बातों को नहीं समझ पाये थे।
येसु तो अपने ऊपर आने वाली विपत्तियों को सोच कर काफी व्याकुल थे। ऐसी परिस्थिति में याकूब और योहन की माता का येसु के पास आना और उन दोनों के लिए उसके राज्य में एक को येसु के दायें और दूसरे को उसके बायें बैठने देने के लिए निवेदनपूर्ण पैरवी करना एक मातृसुलभ गुण का परिचायक है। येसु उस माता और अपने शिष्यों को समझाते हैं कि बिना पद और अधिकार के जो लोग नि: स्वार्थपूर्ण सेवा देते हैं वे सच्चे और ईमानदार सेवक होते हैं। आज हमें सच्चे और ईमानदार सेवक और दास बनने के लिए येसु बुलाते हुए निमंत्रण देते हैं और कहते हैं क्योंकि मानव पुत्र भी अपनी सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने तथा बहुतों के उद्धार के लिए अपने प्राण देने आया हैं ' हम येसु के अनुयायी होने के नाते अपने कर्त्तव्य के प्रति निष्ठावान रहकर अपनी दीन सेवा जरुरतमंदों को दे सकें।

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