सुखद शुरुआत 

पेत्रुस लोगों को संबोधित करते हैं कि जीवन के अधिपति को आप लोगों ने मार डाला। किन्तु ईश्वर ने उन्हें मृतकों में से जिलाया है। हम इस बात के साक्षी हैं। अब उनके छोटे विश्वास द्वारा आश्र्चयजनक कार्य संभव हुआ है। ( लूकस 17 : 6 ) चंगा करने वाला तो ईश्वर है। उनका कहना है- "येसु के नाम मैं विश्वास के कारण उसी नाम ने इस मनुष्य को पूर्ण रूप से स्वस्थ कर दिया।" पेत्रुस लोगों को कुमार्ग त्याग कर पश्चात्ताप करने और ईश्वर के पास लौटने का आग्रह करते हैं। 
येसु ने अपने शिष्यों से कहा कि मुझे देखो, छूओ, मैं कोई भूत- प्रेत नहीं हूँ। येसु उनके सामने खाते हैं जो यह प्रमाणित करता है कि वे जीवित हैं। येसु को शिष्यों ने जाना था, पहचाना था और बहुत प्यार किया था। वे उनके साथ रहते थे। उनके मरने पर शिष्यों के लिए सब कुछ समाप्त हो गया था। पर कहानी वहीं खत्म नहीं हुई, येसु उनके पास आये और उनको फिर से उत्साहित किया। जिस जीवन को उन्होंने जीया था और बाँटा था उन्हें दफन किया अब उनके पास फिर से आये हैं। यह कितने आनन्द का विषय था। 
आज का पाठ जीवन की सच्चाई के बारे बताता है। जो दुःखद अन्त को बदल कर सुखद शुरुआत से होता है। जो क्रूस ठोया नहीं जा सकता था वह आज आशीर्वाद का बहुत बड़ा खजाना बन जाता है। मनुष्य के प्रति ईश्वर का प्यार ऐसा है कि वह खुद मनुष्य के पास आते हैं। ( प्रकाशना 3 : 20 ) विभिन्न अवसरों पर और विभिन्न रूपों में ईश्वर हमारे पास आते हैं- क्या हम उन्हें पहचान पाते और उनको अपना प्रत्युत्तर दे पाते हैं?

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