शुक्रवार, 19 अगस्त, संत योहन यूदेस

शुक्रवार, 19 अगस्त, संत योहन यूदेस
एज़ेकिएल 37:1-14, स्तोत्र 107:2-9, मत्ती 22:34-40

"उन मृतकों में प्राण फूँक दो, जिससे उन में जीवन आ जाये।" (एज़ेकिएल 37:9)

क्या आपने कभी फ्रीडाइविंग नाम के खेल के बारे में सुना है? जिसमें एक तैराक बिना ऑक्सीजन टैंक के खुले पानी में गोता लगाता है और इसलिए उसे लंबे समय तक अपनी सांस रोककर रखना पड़ता है। जब वह पानी से बाहर आता है, तो वह साँस (हवा)लेने के लिए हांफ रहा होता है क्योंकि उसे सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की सख्त जरूरत होती है।
आज के पहले पाठ में, हम एक अलग प्रकार की ऑक्सीजन की आवश्यकता देखते हैं- पवित्र आत्मा की सांस। नबी एज़ेकिएल, बाबुल में यहूदी बंधुओं से बात करते हुए, सूखी, बेजान हड्डियों (37:4) की छवि के माध्यम से अनुभव कर रहे उजाड़ और आशा की हानि को दर्शाता है। परन्तु प्रभु ईश्वर कहते हैं, "मैं तुम में प्राण डालूँगा और तुम जीवित हो जाओगी।" (37:5)। और वह सांस क्या है? वह है- पवित्र आत्मा!
क्या आप जानते हैं कि सांस, हवा और आत्मा के लिए एक ही हिब्रू शब्द हैं? वह शब्द है- रुच। ऑक्सीजन की तरह, ईश्वर की सांस हमारे अस्तित्व के लिए मौलिक है। हम इसे धर्मग्रन्थ के आरंभिक पदों में देखते हैं जब ईश्वर का आत्मा जल के ऊपर मँडराता है (उत्पत्ति 1:2)। नए नियम में, येसु के मृतकों में से जी उठने के बाद, वह अपने शिष्यों में आत्मा की सांस लेता है और उन्हें सुसमाचार का प्रचार करने के लिए भेजता है (संत योहन 20:21-22)। उनके द्वारा पवित्र आत्मा के कार्य करने से, शिष्यों ने सुसमाचार प्रचार किया और सुसमाचार को संसार भर में फैलाया।
हम सभी ने बपतिस्मा और दृढीकरण संस्कार में पवित्र आत्मा को प्राप्त किया है। वह आप में रहता है, लेकिन हो सकता है कि आप अभी उसकी उपस्थिति का अनुभव नहीं कर रहे हों। आप एज़ेकिएल के दर्शन में उन सूखी हड्डियों की तरह महसूस कर रहे होंगे, जो ईश्वर से "खोई हुई" और "काटी गई" थीं (37:11)। या हो सकता है कि आप निराशा या थकान से जूझ रहे हों और ऐसा महसूस कर रहे हों कि आपकी सांस खत्म हो रही है। यदि हां, तो जान लें कि वह हमेशा आपके साथ है, आपको बार-बार पुनर्जीवित करने और तरोताजा करने के लिए तैयार है।
और आपको पूरी तरह से समाप्त होने तक प्रतीक्षा करने की भी आवश्यकता नहीं है! हर दिन, हर घडी, हर पल आप आत्मा को आने के लिए कह सकते हैं और खुद को उसकी जीवन देने वाली शक्ति और अनुग्रह से भर सकते हैं।
आज जब आप प्रार्थना कर रहे हों तो एक गहरी सांस लें। कल्पना कीजिए कि पवित्र आत्मा आपको उसी तरह भर रहा है जैसे हवा आपके फेफड़ों को भर रही है। उसे आपको भरने के लिए कहते रहें। हम सभी को ईश्वर की सांस की जरूरत है। हम इसके बिना जीवित नहीं रह सकते। और हमें भरना उसकी खुशी है। "पवित्र आत्मा, आओ और आज मुझे भर दो!" आमेन!

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