मौका 

अपने जीवन को बदलने के लिए ईश्वर सबों को मौका देते हैं। वे कहते हैं- "एक पश्चात्तापी पापी के लिए स्वर्ग में अधिक आनन्द मनाया जायेगा।" (लूकस 15 : 7 )

हमें नबी एजेकिएल बतलाते हैं कि जो पाप करता, पश्चात्ताप के द्वारा जीवन में सुधार नहीं लाता और अंत तक उसी प्रकार पापमय जीवन बिताता है, वह अवश्य अपने पाप के कारण ही मर जायेगा। लेकिन यदि पापी अपना पापमय जीवन त्याग देता है तो उसे जीवन मिलेगा। दूसरा पक्ष यह है कि उसी भाँति धर्मी व्यक्ति धार्मिकता त्यागकर पापमय जीवन बिताता है तब वह पाप के कारण अवश्य मरेगा। हमारे जीवन में दो ही रास्ते हैं पापमय जीवन को चुनना और बढ़ना या धार्मिकता का जीवन और संपूर्ण न्यायसंगत व्यवहार। अपने जीवन में हम किसको प्राथमिकता देते हैं? चालीसे का पुण्य काल हमें जीवन को चुनने के लिए आह्वान करता है। 
सुसमाचार में येसु फरीसियों और शास्त्रियों की धार्मिकता की चर्चा करते हैं। इनका जीवन लोगों के सामने मात्र ढकोसला है। प्रार्थना, दशमांस, उपवास, परहेज चौकों में खड़ा होना पसन्द करते हैं ताकि लोग देखें और उनकी वाहवाही करें। येसु हमें उनका अनुकरण करने से मना करते हैं। हम भाई से मेल- मिलाप दिल से करें और भेंट चढ़ाएँ। कचहरी जाते वक्त ही मुद्दई से समझौता करें। शुद्ध और पवित्र जीवन जीने के लिए आत्मत्याग, संयम बरतें जो नेता हैं वे शास्त्रियों की नकल न करें। हमें साधारण लोगों के समान जो अति आवश्यक है उसे करते जाएँ। पड़ोसी प्रेम, क्षमा, सहयोग, सहानुभूति, आदान प्रदान सभों के जीवन में हो जिससे प्रभु की कृपा हम पर बनी रहे।

Add new comment

1 + 2 =