मार्ग, सत्य और जीवन। 

येसु मार्ग, सत्य और जीवन है। उसने अपने कार्यों के द्वारा ईश्वर की महिमा प्रकट की और बहुतों ने विश्वास किया। एक समारी स्त्री को येसु ने अपने को प्रकट किया। उस समारी स्त्री ने येसु के कथनों पर विश्वास किया और जाकर बहुतों को येसु के बारे में बताया। येसु के वचनों को सुन कर दूसरों ने भी उस पर विश्वास किया। जिन्होंने भी येसु के संजीवन जल में से थोड़ा भी पीया है वे खुद जल- स्रोत बन कर दूसरों को जीवन जल प्रदान कर रहे हैं। हर प्यासे को कुएँ के पास आना पड़ता है अपनी प्यास बुझाने के लिए । येसु घूम- घूम कर हर प्यासे को अपने जीवन रूपी वचन से तृप्त करते रहे। जितनों ने येसु पर विश्वास किया वे तृप्त हो गए और विश्वास नहीं करने वाले आज तक प्यासे ही रह गए। मरुभूमि में इस्राएली जनता ने पानी के लिए मूसा के विरुद्ध और ईश्वर के प्रति भुनभुनाने का पाप किया फिर भी ईश्वर ने मरुभूमि में उनकी रक्षा की। अपनी चुनी हुई प्रजा को ईश्वर ने पानी पिलाया, मन्ना और बटेर खिलाया। लेकिन हम सभी जानते हैं कि मनुष्य का पापी पेट कभी तृप्त नहीं होता है। हर विपरीत परिस्थिति में एक- दूसरे के विरुद्ध भुनभुनाना, नेतृत्व करने वाले की अवमानना करना और ईश्वरीय शक्ति और उसकी अनुकम्पा को कोसना एक सामान्य व्यक्ति के लिए बहुत ही आसान है। ईश्वर प्रेम है और दया से परिपूर्ण है। वही ईश्वर है जिसने मिस्र से अपनी प्रजा को छुड़ाया, मरुभूमि में उनकी रक्षा की, प्रतिज्ञात देश पहुँचाया और पर्वत पर प्रबंध किया अर्थात् वह ईश्वर अपनी चुनी हुई प्रजा के प्रति वचनवद्ध है।
संत पौलुस रोमियों के नाम पत्र में कहते हैं कि ईश्वर ने हमारे विश्वास के कारण ही हमें धार्मिक माना है। हर विश्वास की परख कठिनाइयों में ही होती है। मरुभूमि में भटकती हुई इस्राएली जनता की तरह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम भी ईश्वर के विरुद्ध भुनभुनाने लगते हैं। पारिवारिक, सामाजिक, साम्प्रदायिक और व्यक्तिगत नासमझी के कारण कट्टरपंथी, अलगाववादी और हठधर्मी बन बैठते हैं और एक दूसरे को सहन नहीं कर पाते हैं। ऐसी ही परिस्थिति में संत पौलुस हममें से प्रत्येक को येसु मसीह के द्वारा ईश्वर से मेल करने का आग्रह करते हैं। क्योंकि जो व्यक्ति येसु मसीह के द्वारा ईश्वर से मेल करता है वह ईश्वर के आत्मा से संचालित होता है। वह पवित्र किया जाता है और उसके लिए आशा का द्वार खोला जाता है। येसु ने हमारे पापों के लिए अपने को अर्पित कर दिया। ईश्वर ने येसु के द्वारा अपने प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण दिया है । ईश्वर प्रेम है और हमें उनके प्रेम में बने रहना चाहिए।

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