प्रभु के दुःखभोग का खजूर रविवार 10 April 2022

प्रभु येसु के येरुसालेम प्रवेश की स्मृति

पु०: हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त की कृपा, ईश्वर का प्रेम तथा पवित्र आत्मा का साहचर्य आप सबों को प्राप्त हो।

सब: और आपको भी।

पु०: प्रिय भाइयो और बहनो, चालीसे के आरंभ से ही हम तपस्या और परोपकार के कामों से अपना हृदय तैयार करते आये हैं। आज हम सारे विश्व में फैली कलीसिया के साथ, प्रभु येसु के पास्का रहस्य का समारोह आरम्भ करने के लिए एकत्र हुए हैं। इसी दिन ख्रीस्त ने दुःख भोगने और मरकर फिर जी उठने के लिए अपनी नगरी येरुसालेम में प्रवेश किया। इसलिए विश्वास और भक्ति के साथ हम उनके इस नगर- प्रवेश की याद करते हुए उनका अनुसरण करें जिससे उनके दुःख और मृत्यु में सम्मिलित होकर उनके पुनरुत्थान तथा महिमामय जीवन में भाग ले सकें।

(संबोधन के बाद पुरोहित अपने हाथों को फैलाए हुए निम्नलिखित में से कोई एक प्रार्थना बोलते हैं।)

 

आशिष

हम प्रार्थना करें:

हे सर्वशक्तिमान् सदा जीवंत ईश्वर, इन डालियों को अपनी आशीष से पवित्र कर। जैसे हम आज बड़े उल्लास के साथ राजा खीस्त का अनुसरण कर रहे हैं, वैसे ही हम उनकी कृपा से एक दिन अनंत येरुसालेम में प्रवेश करेंगे। वह युगानुयुग जीते रहते और राज्य करते हैं।

सब: आमेन ।  

(पुरोहित मौन भाव से डालियों पर पवित्र जल छिड़कते हैं।)

 

सुसमाचार

सन्त लूकस के अनुसार पवित्र सुसमाचार 19: 29-40

जब येसु जैतून नामक पहाड़ के समीप-बेथफ़गे और बेथानिया के निकट पहुँचे, तो उन्होंने दो शिष्यों को यह कहते हुए भेजा, "सामने के गाँव जाओ। वहाँ पहुँच कर तुम एक बछेड़ा बँधा हुआ पाओगे, जिस पर अब तक कोई नहीं सवार हुआ है। उसे खोल कर यहाँ ले आओ। यदि कोई तुम से पूछे कि तुम उसे क्यों खोल रहे हो, तो उत्तर देना-प्रभु को इसकी जरूरत है।" जो भेजे गये थे, उन्होंने जा कर वैसा ही पाया, जैसा येसु ने कहा था। जब वे बछेड़ा खोल रहे थे, तो उसके मालिकों ने उन से कहा, "इस बछेड़े को क्यों खोल रहे हो?" उन्होंने उत्तर दिया, "प्रभु को इसकी ज़रूरत है"। वे बछेड़ा येसु के पास ले आये और उस बछेड़े पर अपने कपड़े बिछा कर उन्होंने येसु को उस पर चढ़ाया। ज्यों-ज्यों येसु आगे बढ़ते जा रहे थे, लोग रास्ते पर अपने कपड़े बिछाते जा रहे थे। जब वे जैतून पहाड़ की ढाल पर पहुँचे, तो पूरा शिष्य-समुदाय आनंदविभोर हो कर आँखों देखे सब चमत्कारों के लिए ऊँचे स्वर से इस प्रकार ईश्वर की स्तुति करने लगा- धन्य हैं वह राजा, जो प्रभु के नाम पर आते हैं! स्वर्ग में शान्ति! सर्वोच्च स्वर्ग में महिमा! भीड़ में कुछ फ़रीसी थे। उन्होंने येसु से कहा, "गुरूवर! अपने शिष्यों को डाँटिए"। परन्तु येसु ने उत्तर दिया, "मैं तुम से कहता हूँ, यदि वे चुप रहें, तो पत्थर ही बोल उठेंगे।"

यह प्रभु का सुसमाचार है।

पु०: प्रिय भाइयो- बहनो, येरुसालेम के निवासियों की तरह हम भी येसु ख्रीस्त का जय- जयकार करते हुए शांतिपूर्वक जुलूस निकालें।

 

दूसरा भाग: पवित्र मिस्सा

 

संगृहीत प्रार्थना (निवेदन)

हे सर्वशक्तिमान् सदा- जीवंत ईश्वर, तेरी इच्छा से हमारे मुक्तिदाता मनुष्य बने और क्रूस पर मरे, ताकि मानवजाति को दीनता का आदर्श मिले। हम उनके दु: खभोग से शिक्षा ग्रहण करें और उनके पुनरुत्थान के सहभागी बन जाएँ। वह तेरे तथा पवित्र आत्मा के संग एक ईश्वर होकर युगानुयुग जीते और राज्य करते हैं।

पहला पाठ

(प्रस्तुत पाठ का विषय है नबी इसायस द्वारा मसीह के दुःखभोग की भविष्य वाणी। इस में विशेष रूप से मसीह के आज्ञापालन तथा ईश्वर पर उनके भरोसे पर बल दिया जाता है।)

नबी इसायस का ग्रंथ                      50, 4-7 

मैंने अपमान करने वालों से अपना मुँह नहीं छिपाया। मैं जानता हूँ कि मुझे निराश नहीं होना पड़ेगा।”

प्रभु ने मुझे शिष्य बना कर वाणी दी है, जिससे मैं थके-माँदे लोगों को सँभाल सकूँ। वह प्रतिदिन प्रातः मेरे कान खोल देता है, जिससे मैं शिय की तरह सुन सकूँ। प्रभु ने मेरे कान खोल दिये हैं; मैंने न तो उसका विरोध किया और न पीछे हटा। मैंने मारने वालों के सामने अपनी पीठ कर दी और दाढ़ी नोचने वालों के सामने अपना गाल। मैंने अपमान करने और थूकने वालों से अपना मुख नहीं छिप़ाया। प्रभु मेरी सहायता करता है; इसलिए मैं अपमान से विचलित नहीं हुआ। मैंने पत्थर की तरह अपना मुँह कड़ा कर लिया। मैं जानता हूँ कि अन्त में मुझे निराश नही होना पड़ेगा।

यह प्रभु की वाणी है।

 

भजन (स्तोत्र 21: 8-9.17-20.23-24)

अनुवाक्य:- हे मेरे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तूने मुझे क्यों छोड़ दिया है?

1. मुझे जो भी देखते हैं, मेरा उपहास करते हैं; वे सिर हिलाते हुए मेरी हँसी उड़ाते हैं- उसने प्रभु पर भरोसा रखा है, वही अब उसे बचाये; यदि वह उसे प्यार करता है, तो वह उसे छुड़ाये।

2. कुत्तों के झुण्ड ने मुझे घेर लिया है, कुकर्मियों का दल मेरे चारों ओर खड़ा है। वे मेरे हाथ- पाँव छेद देते हैं; मैं अपनी एक- एक हड्डी गिन सकता हूँ।

3. वे मेरे वस्त्र आपस में बाँट लेते हैं और मेरे कुरते पर चिट्ठी डालते हैं। हे प्रभु! तू मेरे पास रह जा। तू मेरा बल है; मेरी सहायता कर।

4. मैं अपने भाइयों के सामने तेरे नाम का बखान करूँगा, मैं सभाओं में तेरा गुणगान करूँगा। प्रभु के भक्तो, उसकी स्तुति करो। याकूब के सब वंशजो! उसकी महिमा गाओ। इस्राएल के सब वंशजो! उसका आदर करो।

 

दूसरा पाठ

(येसु ने कहा है, "जो अपने को बड़ा मानता है वह छोटा बनाया जायेगा और जो अपने को छोटा मानता है, वह बड़ा बनाया जायेगा।" सन्त पौलुस इस सच्चाई को मसीह के विषय में स्पष्ट कर देते हैं- मसीह ने अपने दुःखभोग तथा क्रूस पर अपने मरण द्वारा अपने को दीन- हीन बना लिया है, इसलिए ईश्वर ने उन्हें महान् बना दिया है।)

फ़िलिप्पियों के नाम सन्त पौलुस का पत्र                 2, 6:11

“उन्होंने अपने को दीन- हीन बना लिया है, इसलिए ईश्वर ने उन्हें महान् बना दिया है।"

यद्यपि येसु मसीह ईश्वर थे और उन को पूरा अधिकार था कि वह ईश्वर की बराबरी करें, फिर भी उन्होंने दास का रूप धारण कर तथा मनुष्यों के समान बन कर अपने को दीन-हीन बना लिया और उन्होंने मनुष्य का रूप धारण करने के बाद मरण तक, हाँ क्रूस पर मरण तक, आज्ञाकारी बन कर अपने को और भी दीन बना लिया। इसलिए ईश्वर ने उन्हें महान् बनाया और उन को वह नाम प्रदान किया, जो सब नामों में श्रेष्ठ है, जिससे येसु का नाम सुन कर आकाश, पृथ्वी तथा अधोलोक के सब निवासी घुटने टेकें और पिता की महिमा के लिए सब लोग यह स्वीकार करें कि ईसा मसीह प्रभु हैं।

यह प्रभु की वाणी है।

 

जयघोष    (फिलि० 2, 8-9)

मसीह हमारे लिए मरण तक, हाँ क्रूस के मरण तक, आज्ञाकारी बन गये, इसलिए ईश्वर ने उन्हें महान् बना दिया है और उन को वह नाम प्रदान किया है जो सब नामों में श्रेष्ठ है।

 

सुसमाचार

सन्त लूकस के अनुसार प्रभु येसु का दुःखभोग   22: 14- 23-56

समय आने पर येसु प्रेरितों के साथ भोजन करने बैठे और उन्होंने उन से कहा, "मैं कितना चाहता था कि दुःख भोगने से पहले पास्का का यह भोजन तुम्हारे साथ करूँ; क्योंकि मैं तुम लोगों से कहता हूँ, जब तक यह ईश्वर के राज्य में पूर्ण न हो जाये, मैं इसे फिर नहीं खाऊँगा"।

इसके बाद येसु ने प्याला लिया, धन्यवाद की प्रार्थना पढ़ी और कहा, "इसे ले लो और आपस में बाँट लो; क्योंकि मैं तुम लोगों से कहता हूँ, जब तक ईश्वर का राज्य न आये, मैं दाख का रस फिर नहीं पिऊँगा"। उन्होंने रोटी ली और धन्यवाद की प्रार्थना पढ़ने के बाद उसे तोड़ा और यह कहते हुए शिष्यों को दिया, "यह मेरा शरीर है, जो तुम्हारे लिए दिया जा रहा है। यह मेरी स्मृति में किया करो"। इसी तरह उन्होंने भोजन के बाद यह कहते हुए प्याला दिया, "यह प्याला मेरे रक्त का नूतन विधान है। यह तुम्हारे लिए बहाया जा रहा है।

"देखो, मेरे विश्वासघाती का हाथ मेरे साथ मेज़ पर है। मानव पुत्र तो, जैसा लिखा है, चला जाता है; किन्तु धिक्कार उस मनुष्य को, जो उसे पकड़वाता है!’ वे एक दूसरे से पूछने लगे कि हम लोगों में कौन यह काम करने वाला है। उन में यह विवाद छिड़ गया कि हम में किस को सब से बड़ा समझा जाना चाहिए। येसु ने उन से कहा, "संसार में राजा अपनी प्रजा पर निरंकुश शासन करते हैं और सत्ताधारी संरक्षक कहलाना चाहते हैं। परन्तु तुम लोगों में ऐसा नहीं है। जो तुम में बड़ा है, वह सब से छोटे-जैसा बने और जो अधिकारी है, वह सेवक-जैसा बने। आखि़र बड़ा कौन है-वह, जो मेज़ पर बैठता है अथवा वह, जो परोसता है? वहीं न, जो मेज़ पर बैठता है। परन्तु मैं तुम लोगों में सेवक-जैसा हूँ। "तुम लोग संकट के समय मेरा साथ देते रहे। मेरे पिता ने मुझे राज्य प्रदान किया है, इसलिए मैं तुम्हें यह वरदान देता हूँ कि तुम मेरे राज्य में मेरी मेज़ पर खाओगे-पियोगे और सिंहासनों पर बैठ कर इस्राएल के बारह वंशों का न्याय करोगे। "सिमोन! सिमोन! शैतान को तुम लोगों को गेहूँ की तरह फटकने की अनुमति मिली है। परन्तु मैंने तुम्हारे लिए प्रार्थना की है, जिससे तुम्हारा विश्वास नष्ट न हो। जब तुम फिर सही रास्ते पर आ जाओगे, तो अपने भाइयों को भी सँभालना।"

पेत्रुस ने उन से कहा, "प्रभु! मैं आपके साथ बन्दीगृह जाने और मरने को भी तैयार हूँ"। किन्तु येसु के कहा, "पेत्रुस! मैं तुम से कहता हूँ कि आज, मुर्गे के बाँग देने से पहले ही, तुम तीन बार यह अस्वीकार करोगे कि तुम मुझे जानते हो।" येसु ने उन से कहा, "जब मैंने तुम्हें थैली, झोली और जूतों के बिना भेजा तो क्या तुम्हें किसी बात की कमी हुई थी?" उन्होंने उत्तर दिया, "किसी बात की नहीं"। इस पर येसु ने कहा, "परन्तु अब जिसके पास थैली है, वह उसे ले ले और अपनी झोली भी और जिसके पास नहीं है, वह अपना कपड़ा बेच कर तलवार ख़रीद ले; क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ कि धर्मग्रन्थ का यह कथन मुझ में अवश्य पूरा होगा-उसकी गिनती कुकर्मियों में हुई। और जो कुछ मेरे विषय में लिखा है, वह पूरा होने को है।" शिष्यों ने कहा, "प्रभु! देखिए, यहाँ दो तलवारें हैं।" परन्तु येसु ने कहा, "बस! बस!"

येसु बाहर निकल कर अपनी आदत के अनुसार जैतून पहाड़ गये। उनके शिष्य भी उनके साथ हो लिये। येसु ने वहाँ पहुँच कर उन से कहा, "प्रार्थना करो, जिससे तुम परीक्षा में न पड़ो"। तब वे पत्थर फेंकने की दूरी तक उन से अलग हो गये और घुटने टेक कर उन्होंने यह कहते हुए प्रार्थना की, "पिता! यदि तू ऐसा चाहे, तो यह प्याला मुझ से हटा ले। फिर भी मेरी नहीं, बल्कि तेरी ही इच्छा पूरी हो।" तब उन्हें स्वर्ग का एक दूत दिखाई पड़ा, जिसने उन को ढारस बँधाया। वे प्राणपीड़ा में पड़ने के कारण और भी एकाग्र हो कर प्रार्थना करते रहे और उनका पसीना रक्त की बूँदों की तरह धरती पर टपकता रहा। वे प्रार्थना से उठ कर अपने शिष्यों के पास आये और यह देख कर कि वे उदासी के कारण सो गये हैं, उन्होंने उन से कहा, "तुम लोग क्यों सो रहे हो? उठो और प्रार्थना करो, जिससे तुम परीक्षा में न पड़ो।"

येसु यह कह ही रहे थे कि एक दल आ पहुँचा। यूदस, बारहों में से एक, उस दल का अगुआ था। उसने येसु के पास आ कर उनका चुम्बन किया। येसु ने उस से कहा, "यूदस! क्या तुम चुम्बन दे कर मानव पुत्र के साथ विश्वासघात कर रहे हो?" येसु के साथियों ने यह देख कर कि क्या होने वाला है, उन से कहा, "प्रभु! क्या हम तलवार चलायें?" और उन में एक ने प्रधानयाजक के नौकर पर प्रहार किया और उसका दाहिना कान उड़ा दिया। किन्तु येसु ने कहा, "रहने दो, बहुत हुआ", और उसका कान छू कर उन्होंने उसे अच्छा कर दिया। जो महायाजक, मन्दिर-आरक्षी के नायक और नेता येसु को पकड़ने आये थे, उन से उन्होंने कहा, "क्या तुम मुझ को डाकू समझ कर तलवारें और लाठियाँ ले कर निकले हो? मैं प्रतिदिन मन्दिर में तुम्हारे साथ रहा और तुमने मुझ पर हाथ नहीं डाला। परन्तु यह समय तुम्हारा है-अब अन्धकार का बोलबाला है।" तब उन्होंने येसु को गिरफ़्तार कर लिया और उन्हें ले जा कर प्रधानयाजक के यहाँ पहुँचा दिया। पेत्रुस कुछ दूरी पर उनके पीछे-पीछे चला। लोग प्रांगण के बीच में आग जला कर उसके चारों ओर बैठ रहे थे। पेत्रुस भी उनके साथ बैठ गया। एक नौकरानी ने आग के प्रकाश में पेत्रुस को बैठा हुआ देखा और उस पर दृष्टि गड़ा कर कहा, "यह भी उसी के साथ था"। किन्तु उसने अस्वीकार करते हुए कहा, "नहीं भई! मैं उसे नहीं जानता"। थोड़ी देर बाद किसी दूसरे ने पेत्रुस को देख कर कहा, "तुम भी उन्हीं लोगों में एक हो"। पेत्रुस ने उत्तर दिया, "नहीं भई! मैं नही हूँ।"

पेत्रुस ने कहा, "अरे भई! मैं नहीं समझता कि तुम क्या कह रहे हो"। वह बोल ही रहा था कि उसी क्षण मुर्गे ने बाँग दी और प्रभु ने मुड़ कर पेत्रुस की ओर देखा। तब पेत्रुस को याद आया कि प्रभु ने उस से कहा था कि आज मुर्गे के बाँग देने से पहले ही तुम मुझे तीन बार अस्वीकार करोगे, और वह बाहर निकल कर फूट-फूट कर रोया।

येसु पर पहरा देने वाले प्यादे उनका उपहास और उन पर अत्याचार करते थे। वे उनकी आँखों पर पट्टी बाँध कर उन से पूछते थे, "यदि तू नबी है, तो हमें बता-तुझे किसने मारा?" वे उनका अपमान करते हुए उन से और बहुत-सी बातें कहते रहे। दिन निकलने पर जनता के नेता, महायाजक और शास्त्री एकत्र हो गये और उन्होंने येसु  को अपनी महासभा में बुला कर उन से कहा, "यदि तुम मसीह हो, तो हमें बता दो।" उन्होंने उत्तर दिया, यदि मैं आप लोगों से कहूँगा, तो आप विश्वास नहीं करेंगे और यदि मैं प्रश्न करूँगा, तो आप लोग उत्तर नहीं देंगे। परन्तु अब से मानव पुत्र सर्वशक्तिमान् ईश्वर के दाहिने विराजमान होगा।" इस पर सब-के-सब बोल उठे, "तो क्या तुम ईश्वर के पुत्र हो?’ येसु ने उत्तर दिया, "आप लोग ठीक ही कहते हैं। मैं वही हूँ।" इस पर उन्होंने कहा, "हमें और गवाही की ज़रूरत ही क्या है? हमने तो स्वयं इसके मुँह से सुन लिया है।"

तब सारी सभा उठ खड़ी हो गयी और वे उन्हें पिलातुस के यहाँ ले गये। वे यह कहते हुए येसु पर अभियोग लगाने लगे, "हमें पता चला कि यह मनुष्य हमारी जनता में विद्रोह फैलाता है, कैसर को कर देने से लोगों को मना करता और अपने को मसीह, राजा कहता"। पिलातुस ने येसु से यह प्रश्न किया, "क्या तुम यहूदियों के राजा हो?" येसु ने उत्तर दिया, "आप ठीक ही कहते हैं"। तब पिलातुस ने महायाजकों और भीड़ से कहा, "मैं इस मनुष्य में कोई दोष नहीं पाता।" उन्होंने यह कहते हुए आग्रह किया, "यह गलीलिया से लेकर यहाँ तक, यहूदिया के कोने-कोने में अपनी शिक्षा से जनता को उकसाता है।"

पिलातुस ने यह सुन कर पूछा कि क्या वह मनुष्य गलीली है और यह जान कर कि यह हेरोद के राज्य का है, उसने येसु को हेरोद के पास भेजा। वह भी उन दिनों येरूसालेम में था। हेरोद येसु को देख कर बहुत प्रसन्न हुआ। वह बहुत समय से उन्हें देखना चाहता था, क्योंकि उसने येसु की चर्चा सुनी थी और उनका कोई चमत्कार देखने की आशा करता था। वह येसु से बहुत से प्रश्न करता रहा, परन्तु उन्होंने उसे उत्तर नहीं दिया। इस बीच महायाजक और शास्त्री ज़ोर-ज़ोर से येसु पर अभियोग लगाते रहे। तब हेरोद ने अपने सैनिकों के साथ येसु का अपमान तथा उपहास किया और उन्हें भड़कीला वस्त्र पहना कर पिलातुस के पास भेजा। उसी दिन हेरोद और पिलातुस मित्र बन गयें-पहले तो उन दोनों में शत्रुता थी।

अब पिलातुस ने महायाजकों, शासकों और जनता को बुला कर उन से कहा, "आप लोगों ने यह अभियोग लगा कर इस मनुष्य को मेरे सामने पेश किया कि यह जनता में विद्रोह फैलाता है। मैंने आपके सामने इसकी जाँच की; परन्तु आप इस मनुष्य पर जिन बातों का अभियोग लगाते हैं, उनके विषय में मैंने इस में कोई दोष नहीं पाया और हेरोद ने भी दोष नहीं पाया; क्योंकि उन्होंने इसे मेरे पास वापस भेजा है। आप देख रहे हैं कि इसने प्राणदण्ड के योग्य कोई अपराध नहीं किया है। इसलिए मैं इसे पिटवा कर छोड़ दूँगा।"

पर्व के अवसर पर पिलातुस को यहूदियों के लिए एक बन्दी रिहा करना था। वे सब-के-सब एक साथ चिल्ला उठे, "इसे ले जाइए, हमारे लिए बराब्बस को रिहा कीजिए।" बराब्बस शहर में हुए विद्रोह के कारण तथा हत्या के अपराध में क़ैद किया गया था। पिलातुस ने येसु को मुक्त करने की इच्छा से लोगों को फिर समझाया, किन्तु वे चिल्लाते रहे, "इसे क्रूस दीजिए! इसे क्रूस कीजिए!" पिलातुस ने तीसरी बार उन से कहा, "क्यों? इस मनुष्य ने कौन-सा अपराध किया है? मैं इस में प्राणदण्ड के योग्य कोई दोष नहीं पाता। इसलिए मैं इसे पिटवा कर छोड़ दूँगा।’ परन्तु वे चिल्ला-चिल्ला कर आग्रह करते रहे कि इसे क्रूस दिया जाये और उनका कोलाहल बढ़ता जा रहा था। तब पिलातुस ने उनकी माँग पूरी करने का निश्चय किया। जो मनुष्य विद्रोह और हत्या के कारण क़ैद किया गया था और जिसे वे छुड़ाना चाहते थे, उसने उसी को रिहा किया और येसु को लोगों की इच्छा के अनुसार सैनिकों के हवाले कर दिया।

जब वे येसु को ले जा रहे थे, तो उन्होंने देहात से आते हुए सिमोन नामक कुरेने निवासी को पकड़ा और उस पर क्रूस रख दिया, जिससे वह उसे येसु के पीछे-पीछे ले जाये। लोगों की भारी भीड़ उनके पीछे-पीछे चल रही थी। उन में नारियाँ भी थीं, जो अपनी छाती पीटते हुए उनके लिए विलाप कर रही थी। येसु ने उनकी ओर मुड़ कर कहा, "येरूसालेम की बेटियो! मेरे लिए मत रोओ। अपने लिए और अपने बच्चों के लिए रोओ, क्योंकि वे दिन आ रहे हैं, जब लोग कहेंगे-धन्य हैं वे स्त्रियाँ, जो बाँझ है; धन्य हैं वे गर्भ, जिन्होंने प्रसव नहीं किया और धन्य है वे स्तन, जिन्होंने दूध नहीं पिलाया! तब लोग पहाड़ों से कहने लगेंगे-हम पर गिर पड़ों, और पहाडि़यों से-हमें ढक लो; क्योंकि यदि हरी लकड़ी का हाल यह है, तो सूखी का क्या होगा?" वे येसु साथ दो कुकर्मियों को भी प्राणदण्ड के लिए ले जा रहे थे। वे ‘खोपड़ी की जगह’ नामक स्थान पहुँचे। वहाँ उन्होंने येसु को और उन दो कुकर्मियों को भी क्रूस पर चढ़ाया-एक को उनके दायें और एक को उनके बायें। येसु ने कहा, "पिता! इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं"। तब उन्होंने उनके कपड़े के कई भाग किये और उनके लिए चिट्ठी निकाली।

जनता खड़ी हो कर यह सब देख ही थी। नेता यह कहते हुए उनका उपहास करते थे, "इसने दूसरों को बचाया। यदि यह ईश्वर का मसीह और परमप्रिय है, तो अपने को बचाये।" सैनिकों ने भी उनका उपहास किया। वे पास आ कर उन्हें खट्ठी अंगूरी देते हुए बोले, "यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने को बचा"। येसु के ऊपर लिखा हुआ था, "यह यहूदियों का राजा है"। क्रूस पर चढ़ाये हुए कुकर्मियों में एक इस प्रकार येसु की निन्दा करता था, "तू मसीह है न? तो अपने को और हमें भी बचा।" पर दूसरे ने उसे डाँट कर कहा, "क्या तुझे ईश्वर का भी डर नहीं? तू भी तो वही दण्ड भोग रहा है। हमारा दण्ड न्यायसंगत है, क्योंकि हम अपनी करनी का फल भोग रहे हैं; पर इन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।" तब उसने कहा, "येसु! जब आप अपने राज्य में आयेंगे, तो मुझे याद कीजिएगा"। उन्होंने उस से कहा, "मैं तुम से यह कहता हूँ कि तुम आज ही परलोक में मेरे साथ होगे।"

अब लगभग दोपहर हो रहा था। सूर्य के छिप जाने से तीसरे पहर तक सारे प्रदेश पर अँधेरा छाया रहा। मन्दिर का परदा बीच से फट कर दो टुकड़े हो गया। येसु ने ऊँचे स्वर से पुकार कर कहा, "पिता! मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूँ", और यह कह कर उन्होंने प्राण त्याग दिये।

शतपति ने यह सब देख कर ईश्वर की स्तुति करते हुए कहा, "निश्चित ही, यह मनुष्य धर्मात्मा था"। बहुत-से लोग यह़ दृश्य देखने के लिए इकट्ठे हो गये थे। वे सब-के-सब इन घटनाओं को देख कर अपनी छाती पीटते हुए लौट गये। उनके सब परिचित और गलीलिया से उनके साथ आयी हुई नारियाँ कुछ दूरी पर से यह सब देख रहीं थीं।

महासभा का यूसुफ़़ नामक सदस्य निष्कपट और धार्मिक था। वह सभा की योजना और उसके षड्यन्त्र से सहमत नहीं हुआ था। वह यहूदियों के अरिमथिया नगर का निवासी था और ईश्वर के राज्य की प्रतीक्षा में था। उसने पिलातुस के पास जा कर येसु का शव माँगा। उसने शव को क्रूस से उतारा और छालटी के कफ़न में लपेट कर एक ऐसी क़ब्र में रख दिया, जो चट्टान में खुदी हुई थी और जिस में कभी किसी को नहीं रखा गया था। उस दिन शुक्रवार था और विश्राम का दिन आरम्भ हो रहा था। जो नारियाँ येसु के साथ गलीलिया से आयी थीं, उन्होंने यूसुफ़़ के पीछे-पीछे चल कर क़ब्र को देखा और यह भी देखा कि येसु का शव किस तरह रखा गया है। लौट कर उन्होंने सुगन्धित द्रव्य तथा विलेपन तैयार किया और विश्राम के दिन नियम के अनुसार विश्राम किया।

यह प्रभु का सुसमाचार है।

 

विश्वास घोषणा एवं धर्मसार

मैं सर्वशक्तिमान् पिता -

स्वर्ग और पृथ्वी, सब दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के सृष्टिकर्ता- एक ही ईश्वर में विश्वास करता (करती) हूँ। मैं ईश्वर के इकलौते पुत्र, एक ही प्रभु येसु ख्रीस्त में विश्वास करता (करती) हूँ, जो सभी युगों के पहले पिता से उत्पन्न है। वह ईश्वर से उत्पन्न ईश्वर, प्रकाश से उत्पन्न प्रकाश, सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वर है, वह बनाया हुआ नहीं, बल्कि उत्पन्न हुआ है, वह पिता के साथ एकतत्त्व है; उसी के द्वारा सब कुछ सृष्ट हुआ। वह हम मनुष्यों के लिए और हमारी मुक्ति के लिए स्वर्ग से उतरा और पवित्र आत्मा के द्वारा कुँवारी मरियम से देह धारणकर मनुष्य बना। उसने पोंतुस पिलातुस के समय दुःख भोगा, वह हमारे लिए क्रूस पर ठोंका गया, वह मर गया और दफ़नाया गया

और धर्मग्रंथ के अनुसार तीसरे दिन फिर से जी उठा। वह स्वर्ग में आरोहित हुआ और पिता के दाहिने विराजमान है। वह जीवितों और मृतकों का न्याय करने महिमा के साथ फिर आएगा और उसके राज्य का कभी अंत नहीं होगा। वह प्रभु और जीवनदाता है :  मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता (करती) हूँ, वह पिता और पुत्र से प्रसृत होता है। पिता और पुत्र के साथ उसकी आराधना और महिमा होती है, वह नबियों के मुख से बोला है। मैं एक, पवित्र, काथलिक तथा प्रेरितिक कलीसिया में विश्वास करता (करती) हूँ। मैं पापों की क्षमा के लिए एक ही बपतिस्मा स्वीकार करता (करती) हूँ और मृतकों के पुनरुत्थान तथा अनंत जीवन की बाट जोहता (जोहती) हूँ। आमेन।

 

 

विश्वासियों के निवेदन (महाप्रार्थना)

1. पवित्र कलीसिया के लिए

प्रिय भाई- बहनो, हम पवित्र कलीसिया के लिए प्रार्थना करें: प्रभु ईश्वर सारे जगत् में उसे शान्ति और एकता प्रदान करे तथा सुरक्षित रखे और हम चैन तथा शान्ति में जीवन बिताते हुए सर्वशक्तिमान् पिता ईश्वर की महिमा कर सकें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तूने ख्रीस्त के द्वारा सब जातियों पर अपनी महिमा प्रकट की है। अपनी दया का कार्य जारी रखने के लिए तूने जो कलीसिया स्थापित की है, उसकी रक्षा कर। वह सारी पृथ्वी पर फैल जाये और दृढ़ विश्वास के साथ तेरे नाम का यश गाती रहे, हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

2. संत पिता के लिए

हम संत पिता के लिए भी प्रार्थना करें; - प्रभु ईश्वर ने उन्हें धर्माध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है। वह उनको अपनी कलीसिया के कल्याण के लिए स्वस्थ और सुरक्षित रखें ताकि वे ईश्वर की पवित्र प्रजा पर शासन कर सकें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तेरी ही इच्छा पर सब कुछ निर्भर है। कृपया हमारी प्रार्थना सुन ले और हमारे संत पिता की प्रेमपूर्वक रक्षा कर तेरे द्वारा शासित ख्रीस्तीय प्रजा इन्हीं महायाजक के अधीन रह कर विश्वास और पुण्य में बढ़ती जाय, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

3. याजक- वर्ग तथा अन्य विश्वासियों के लिए

हम अपने धर्माध्यक्ष (नाम) अन्य सभी धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों तथा कलीसिया की सब श्रेणियों और विश्वासियों की सारी मंडली के लिए प्रार्थना करें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, पवित्र आत्मा के द्वारा तू समस्त कलीसिया को पवित्र करता और चलाता है। इसकी सब श्रेणियों के लिए हमारा निवेदन है कि तेरी कृपा से सब के सब ईमानदारी के साथ तेरी सेवा करते रहें, - हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

4. दीक्षार्थियों के लिए

हम (अपने इन) दीक्षार्थियों के लिए भी प्रार्थना करें: प्रभु ईश्वर की असीम दया से वे उसका वचन अपने हृदय में ग्रहण करें, बपतिस्मा में नया जन्म लेकर अपने पापों की क्षमा पायें और हमारे प्रभु ख्रीस्त के अंग बन जायें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तू अपनी कलीसिया की संतान की वृद्धि करता रहता है। (हमारे इन) दीक्षार्थियों का विश्वास और ज्ञान बढ़ा कि ये बपतिस्मा द्वारा नया जन्म पाकर तेरे पुत्रों में सम्मिलित हो सकें, - हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

5. ख्रीस्तीय एकता के लिए

ख्रीस्त में विश्वास करने वाले सभी भाई- बहनों के लिए हम प्रार्थना करें: वे सत्य के मार्ग पर बढ़ते जायें और प्रभु ईश्वर उन्हें अपनी एकमात्र कलीसिया में एकत्र कर सुरक्षित रखें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तू बिखरे हुए लोगों को एकत्र करता और संजोए रखता है। अपने पुत्र के रेवड़ पर कृपादृष्टि डाल। जो लोग एक ही बपतिस्मा द्वारा पवित्र किये गये हैं, वे अखंड विश्वास और प्रेम के बंधन में एक बने रहें, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

6. यहूदी जाति के लिए

यहूदियों के लिए हम प्रार्थना करें: प्रभु ईश्वर की वाणी सबसे पहले उन्हीं को प्राप्त हुई थी। उसकी कृपा से वे ईश्वर को अधिकाधिक प्यार करें और उसके व्यवस्थान के प्रति अधिक विश्वासी बनते जायें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तूने इब्राहीम और उनकी संतान से प्रतिज्ञाएँ की थीं। अपनी कलीसिया की प्रार्थना कृपापूर्वक सुन ले। जिस जाति को तूने पूर्वकाल में अपनी निजी प्रजा बनाया था, वह अब पूर्ण मुक्ति पा सकें, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

7 .उनके लिए जो ख्रीस्त में विश्वास नहीं करते है

हम उन लोगों के लिए प्रार्थना करें जो ख्रीस्त में विश्वास नहीं करते हैं; वे पवित्र आत्मा की ज्योति पाकर मुक्ति के मार्ग पर आ जायें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, जिन्होंने ख्रीस्त को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, वे तेरी दृष्टि में निष्कपट आचरण करके सत्य को पा जायें। हमारा परस्पर प्रेम भी बढ़ता जाये, हम तेरा दिव्य जीवन जीने का प्रयत्न करते रहें और इस तरह पृथ्वी पर तेरे प्रेम के सुयोग्य साक्षी बन जायें, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

8. उनके लिए जो ईश्वर में विश्वास नहीं करते हैं

ईश्वर को नहीं मानने वालों के लिए हम प्रार्थना करें कि सच्चे हृदय से भला आचरण करके वे ईश्वर को जानें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तूने मनुष्यों को बनाया है कि वे तुझे पा कर ही विश्राम लें। ऐसी कृपा कर कि हानिप्रद विघ्न - बाधाओं के बीच भी सब लोग तेरे स्नेह के चिन्ह पहचानें और विश्वासियों के भले कार्य देख कर तुझी को सच्चा ईश्वर और मानव जाति का पिता सहर्ष स्वीकार करें, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

9. राज्य- शासकों के लिए

सभी राज्य शासकों के लिए भी हम प्रार्थना करें: प्रभु ईश्वर अपनी इच्छा के अनुसार उनका मन और हृदय संचालित करें जिससे वे सबों के लिए सच्ची शान्ति और स्वतंत्रता का प्रबन्ध कर सकें।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, सब मनुष्यों के विचार और सब राष्ट्रों के अधिकार तेरे ही हाथों में हैं। हमारे शासकों पर दयादृष्टि कर। तेरी सहायता से पृथ्वी के कोने- कोने में शान्ति सुरक्षित रहे, राष्ट्र समृद्ध होते जायें और धर्म की स्वतंत्रता बनी रहे, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

10. विभिन्न आवश्यकताओं के लिए

प्रिय भाइयो और बहनो, हम सर्वशक्तिमान् पिता ईश्वर से प्रार्थना करें कि वह संसार को सब भ्रान्तियों से शुद्ध करें, सब रोगों को चंगा करें, अकाल दूर रखें, बंदीगृह खोल दें, बेड़ियाँ तोड़ डालें, राहियों को निरापद रखें, यात्रियों को सकुशल वापस लाये, रोगियों को स्वास्थ्य और मरने वालों को मुक्ति प्रदान करे।

हे सर्वशक्तिमान् शाश्वत ईश्वर, तू ही दुःखियों को दिलासा और पीड़ितों को धीरज देता है। संकट में पड़े लोगों की दुहाई तेरे पास पहुँचे और सब के सब अपनी विपत्ति में तेरी दया का सहारा पाकर आनन्द का अनुभव करें, -हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

 

अर्पण -प्रार्थना

 हे प्रभु, अपने एकलौते पुत्र के दुःखभोग के फलस्वरूप तू हमसे शीघ्र ही प्रसन्न होने की कृपा कर। हम तुझे अपने पुण्य कर्मों से प्रसन्न नहीं कर सकते, पर इस अनुपम बलिदान के द्वारा तेरी दया और क्षमा प्राप्त करें, हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन। 

 

अवतरणिका: प्रभु का दुःखभोग

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, पवित्र पिता, सर्वशक्तिमान् और शाश्वत ईश्वर, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु खीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। निर्दोष होने पर भी इन्होंने पापियों के लिए स्वेच्छा से दु: ख भोगा और अपराधियों के लिए अन्यायपूर्ण मृत्यु- दण्ड स्वीकार किया। अपनी मृत्यु द्वारा इन्होंने हमारे अपराध मिटा दिये और अपने पुनरुत्थान द्वारा हमें फिर से धर्मी बना दिया। इसीलिए, सभी स्वर्गदूतों के साथ मिलकर हम बड़े समारोह के साथ तेरा स्तुतिगान करते हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

प्रसाद- भजन

मेरे पिता! यदि यह प्याला मेरे पिए बिना नहीं टल सकता, तो तेरी इच्छा पूरी हो।

कम्यूनियन के बाद प्रार्थना

हे प्रभु, इन पवित्र उपहारों से पोषित होकर हम तुझसे विनम्र निवेदन करते हैं कि जैसे तूने अपने पुत्र की मृत्यु से विश्वास का फल प्राप्त करने की आशा हमें दी है, वैसे ही उनके पुनरुत्थान के प्रभाव से हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचा दे। हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा।

आशीष- प्रार्थना

हे प्रभु, अपने इस परिवार की सुधि ले जिसके लिए हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त शत्रुओं के हवाले किये जाने और क्रूस की यातना सहने से नहीं हिचके। हम यह प्रार्थना करते हैं, उन्हीं हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा।

 

Homily / Sermon by Rayan SVD

 

प्रभु के दुःखभोग का खजूर रविवार

जय येसु की। ख्रीस्त में प्यारे भाइयों और बहनों।

आज खजूर इतवार है। आज के पूजन विधी के साथ पवित्र सप्ताह की शुरूआत होती है। प्रभु येसु ख्रीस्त की मृत्यु और पुनरुत्थान के रहस्य के दु: खभोग में भाग लेने का अवसर है। आज के दिन में प्रभु येसु येरूसलेम में प्रवेश करते है। पिछले दो महीने में उन्होंने तीन बार अपने दु: खभोग, मरण एवं पुनरुत्थान के बारे में बताते हैं। वह हकीकत बनने का समय आ गया है। माता कलीसिया आज के पूजन विधी की शुरूआत में संत लूकस के सुसमाचार से एक पाठ सुनाती है जिससे हमें ज्ञान होता है कि जिस प्रकार येसु आज येरूसलेम में प्रवेश करेंगे वैसे ही कुछ दिनों बाद स्वर्ग में अपने पिता के पास जायेंगे। जब हम लूकस के अनुसार सुसमाचार 19: 28-40 को सुनते हैं तो हम महसुस करते हैं कि स्वयं प्रभु येसु आज के महान जुलूस का आयोजन करते हैं। शिष्य अस्त- व्यस्त हो जाते हैं। वे एक बछेड़ा लाते हैं वे बछडे में येसु को बिठाने के लिए एक आसन तैयार करते हैं। यह सोचने का विषय है कि आज तक इस बछड़े में कोई बैठा ही नहीं।

लोग भी जुलूस में भाग लेते हैं। वे अपने- अपने कपड़े बिछाकर सजाते हैं। लगता है कि वे प्रभु येसु को राजा मानते हैं जो शहर में प्रवेश कर के शहर पर कबजा करने वाले हैं। यह दिलचस्य बात है कि लोग केवल येसु के पैर जमीन को छूने देंगे परन्तु गधे के पैर भी। यह इसलिए कि लोग येसु को प्रभु के नाम पर आनेवाला व्यक्ति के रूप में पहचान लिया है। उनकी नज़र में येसु पृथ्वी पर शांति और सर्वोच्य स्वर्ग में महिमा लाने के लिए नियुक्त है। येसु को शिष्यों को खोया देख कर फरीसी गुस्सा करते हैं और उनके बारे में येसु से शिकायत करते हैं। येसु के पास एक अदभुत उत्तर है यदि शिष्य चुप रहेंगे, तो पत्थर भी बोल उठेंगे।

इसी प्रकार, ख्रीस्त में प्यारे भाइयों और बहनों, आज के दिन प्रभु येसु उस भविष्यवाणी को पूरा करते हैं जो 550 वर्ष पूर्व जब इस्रायेली जनता बबिलोनिया में निर्वासन के समय नबी इसयाह ने बताया था आज का पहला पाठ, ईश्वर द्वारा चुने गये लोग के कष्टों के बारे में हमें याद दिलाता है। यह ईश्वर का सेवक तो खुद नबी इसायाह हो सकता या निवासित में रहनेवाले इस्रायेली जनता या स्वयं प्रभु येसु जो 2000 वर्ष पूर्व जोखिम उठायें थे। आज के पीड़ित मानव जाती के पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी के चपेट आये लोग या रूस और यूक्रौन युद्ध में मरे और जोखिम उठाने बतता ने लगे। आज का पहला पाठ हमें यह बताता है कि यदि कोई ईश्वर के प्रति वफादार रहना चाहता है और ईश्वर के वचन के अनुसार अपना जीवन बिताना चाहता है तो उसे दुख को गले लगाना से संकोच नहीं करना चाहिए। वह दुख संकट से भाग नहीं सकता। सिर्फ भाग ले सकता है । उसे यह याद रखना जरूरी है कि अंतिम विजय ईश्वर की होती है।

आज के दूसरे पाठ संत पौलुस फिलिपियों के लिए अपने पत्र में प्रभु येसु ख्रीस्त एक आदर्श व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है। फिलिपि के लोगों पर नैतिक जीवन जीने के लिए दबाव डालते हुए इस भजन का उपयोग करता है जिसे हम अंग्रेजी में Christological Hymn कहते हैं। येसु मसीह की तुलना आदम से करते हुए संत पौलुस कहते हैं कि आदम अदन की वाटिका में ईश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया और ईश्वर जैसे बनने के लिए कोशिश की परन्तु येसु मसीह ईश्वर की आज्ञा के अनुसार क्रूस पर अपनी मृत्यु तक आज्ञाकारी बने रहे। आदम के अहंकार संसार में मृत्यु का कारण बना। परन्तु येसु मसीह का आज्ञाकारिता ने मानव जाती को बचाया। इस प्रकार, येसु फिलिपियों के लिए और हम सबों के लिए एक आदर्श नमूना स्थापित किया ताकि हम कष्टों को, दुःख तकलिफों को गले लगा सकें।

आज का सुसमाचार उन सभी घटनाओं का वर्णन करता है जो प्रभु येसु के साथ घटी थी: पास्का भोजन से लेकर प्रभु की मृत्यु और दफनाने की क्रिया सुसमाचार का कुछ मुख्य बिन्धु इस प्रकार है;

1. पास्का भोजन को आनंदमय और आभारी का अवसर दुःखमयी बन जाता है तब प्रभु येसु घोषणा करते हैं कि बारहों में से एक उन्हें धोखा देगा और पकड़वा देगा। यह येसु और शिष्यगण के लिए दर्दनाक क्षण बना।

2. यह इसलिए हुआ क्योंकि प्रभु के द्वारा चुने गये यूदस इस्कारीयोती को शैतान ने अपना वश में कर दिया। प्रभु येसु के साथ तीन साल रहने के बावजूद, प्रभु के वचन और कर्मों के गवही बनने के बावजूद की युदस शैतान का साथी बन गया।

3. जिस वक्त यूदस इस्कारीयोती प्रभु को पकड़ाने का फैसला किया उस क्षण से उसके मन वह हृदय अंधकारमय हो गया। अंधेरा छा गय। वह नहीं परन्तु उस पर रहने वाला शैतान ही काम कर रहा था।

4. Roman Governor पिलातूस, प्रभु येसु को बचाने के लिए कई अवसर ढूढ़ता रहा लेकिन भीड़ से डर रहा था। वे जोर से चिल्लाने लगे कि येसु को मार डालना ही उचित है।

5. पिलातुस एक कायर था। वह अपने बारे में और अपने अधिकार की रक्षा करना चाहता था। यह कितना महान सत्य है जिसे हम प्रज्ञा ग्रन्थ 3: 1 में पढ़ते हैं: धर्मियों की आत्माएँ ईश्वर के हाथ में है। ईश्वर का यह वचन कितना सच है। आज हमे अपने आप से कुछ प्रश्न पूछना चाहते हैं:

1. हर बार, जब हम प्रभु के दुखभोग मरण एवं पुनरूत्थान के पाठ पढ़ते हैं या सुनते हैं तो हम क्या महसूस करते हैं? क्या क्या सोचते हैं?

2. हम सब भीड़ का व्यवहार जानते हैं याने mob behaviour कोई सोचता नहीं है। भीड़ की मानसीकता विनाशकरी है यह प्रश्न उठाना अनिवार्य है कि मैं ने कितने बार भीड़ की मानसीकता को अपनाया। भीड़ में से एक की तरह व्यवहार किया।

3. मैंने कितनी बार उचित सोच विचार के बिना अन्य लोगों की निंदा की। आईये हम अपने कर्म और वचन की जिम्मेदारी से प्रभु येसु ख्रीस्त के दुखभोग में भाग लें और प्रभु येसु के साथ जी उठने के लिए कोशिश करें। आमेन।

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