पूर्ण चंगाई 

जब येसु सिमोन और अन्द्रेयस के घर गये , तो उन्होंने सिमोन की सास की बीमारी के विषय में येसु को बताया। येसु जानते थे कि इस संसार में हर किसी को कोई न कोई दु:ख या तकलीफ है। हम भी इस वास्तविकता से अवगत हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि येसु ने सिमोन की सास को पकड़ कर उठाया और उसका बुखार उतर गया। इसी प्रकार और भी कई अन्य लोग जो विभिन्न रोगों से ग्रसित थे, उन सबों को येसु ने चंगाई प्रदान किया। कहा जा सकता है कि येसु ने रात भर वहाँ चंगाई देने का काम किया। यह हमारी नजर में शारीरिक चंगाई मात्र नजर आयेगी। किन्तु जिनको चंगाई प्राप्त हुई उनके लिए यह एक आत्मिक, मानसिक चंगाई भी थी। दूसरे शब्दों में हम इसे पूर्ण चंगाई कह सकते हैं। येसु का सिमोन की सास का हाथ पकड़ कर उठाना भी एक सामान्य या आम बात लगती है, किन्तु गहराई से विचार करें तो येसु ने ऐसे ही सभी दबे कुचले और गिरे हुए लोगों को हाथ पकड़ कर उठाया। येसु ने लोगों को उनकी उम्मीद से या उनकी जरूरत से या उनकी आशा से बढ़कर अधिक ही दिया। ऐसे ही साधारण कार्यों को येसु ने करते हुए असाधारण उदाहरण हमारे सामने प्रस्तुत किया है। मृत्यु पर जीवन की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय की शुरुआत येसु कर चुके थे। अब इस काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी हममें से प्रत्येक की है।

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