पास्का का तीसरा रविवार 01 May 2022

पास्का का तीसरा रविवार 01 May 2022

 

प्रवेश भजन

समस्त पृथ्वी! ईश्वर का जयकार करो। उसके प्रतापी नाम की महिमा और स्तुति करो। अल्लेलूया!

 

पश्चाताप- विधि

खाना बना कर परोसना अतिथि सत्कार की एक विशेषता है जिसमें अतिथियों के प्रति हमारा प्रेम झलकता है। सुसमाचार में भी हम बहुत बार खाना परोसने के दृश्य को देखते हैं। वास्तविकता तो यह है कि खाना खाने/ परोसने के दौरान हम बहुत से प्रेमालाप करते हैं। जानी- अनजानी, दुःख- सुख सभी प्रकार के वार्त्तालापों का समय होता है, खाने का समय। आज हम येसु को अपने शिष्यों के लिए भोजन तैयार करते देखते हैं। येसु की मृत्यु के बाद उनके शिष्य इतना टूट गए थे कि वे अपनी पुरानी पेशे की शुरूआत करते हैं। कहा जा सकता है, ये उनके जीवन की शुरूआत नहीं थी। वे पुनः एक बार येसु के साथ विश्वासघात, अस्वीकार, दुःख- पीड़ा की घटना को फिर से जी रहे थे। पर वे पुनरूत्थान के बारे में सोच ही नहीं रहे थे। इस चिन्ता में वे गलत दिशा में जाल डाल रहे थे। ऐसे में येसु उन्हें निर्देशित करते हैं। येसु इस भोजन के द्वारा उन्हें याद दिलाते हैं कि वे उनसे प्रेम करते हैं और हमेशा उनके साथ हैं। इस दुःख की घड़ी के बाद शिष्यों ने पुनः एक बार उनके प्रेम को पहचाना। दुःख और मृत्यु के बाद पुनरूत्थान प्रेम के साथ पुनः प्रकट होता है। यह एक ऐसा प्रेम है जो हमें व्यक्तिगत रूप से येसु से जोड़े रखता है। और यह प्रेम हमें अपनी प्रार्थनाओं और दूसरों की सेवा से प्राप्त होता है। (जीवन झरना, क्लरेशियन बाईबिल डायरी)

पु०: भाइयो और बहनो, हम अपने पापों को स्वीकार करें, ताकि हम यह पवित्र बलि चढ़ाने के योग्य बन जाएँ।

सब: हे भाइयो-बहनो, मैं सर्वशक्तिमान् ईश्वर और आप लोगों के सामने स्वीकार करता हूँ कि मैंने मन, वचन और कर्म से तथा अपना कर्त्तव्य पूरा न करने से (सब लोग अपनी छाती पीटते हुए बोलते हैं )अपने कसूर से, अपने कसूर से, अपने भारी कसूर से घोर पाप किया है। इसलिए, मैं नित्य कुँवारी धन्य मरियम से, सब स्वर्गदूतों, संतों और आप लोगों से, हे भाइयो-बहनो, विनती करता हूँ कि आप लोग मेरे लिए प्रभु ईश्वर से प्रार्थना करें।

पु०: सर्वशक्तिमान् ईश्वर हम लोगों पर दया करे और हमारे पाप क्षमा कर हमें अनंत जीवन प्रदान करे।

सब: आमेन।

पु०: हे प्रभु दया कर। सब: हे प्रभु दया कर।

पु०: हे ख्रीस्त दया कर। सब: हे ख्रीस्त दया कर।

पु०: हे प्रभु दया कर। सब: हे प्रभु दया कर।

पु०: स्वर्ग में ईश्वर की महिमा

सब: और पृथ्वी पर उसके कृपापात्रों को शांति। हम तेरी प्रशंसा करते हैं, तुझे धन्य कहते हैं, तेरी आराधना करते हैं, और तेरी महिमा गाते हैं। हम तेरी परम महिमा के कारण तेरा गुणगान करते हैं। हे प्रभु ईश्वर, स्वर्ग के स्वामी, सर्वशक्तिमान् पिता ईश्वर हे प्रभु! एकलौते पुत्र, येसु ख्रीस्त! हे प्रभु ईश्वर, ईश्वर के मेमने, पिता के पुत्र! तू

संसार के पाप हर लेता है, हम पर दया कर तू संसार के पाप हर लेता है, हमारा निवेदन स्वीकार कर तू पिता की दाहिनी ओर विराजमान है, हम पर दया कर। क्योंकि तू ही पवित्र है, तू ही प्रभु है। तू ही येसु ख्रीस्त पवित्र आत्मा के साथ, पिता ईश्वर की महिमा में सर्वोच्च है। आमेन।

 

संगृहीत प्रार्थना (निवेदन)

हे ईश्वर, तेरी प्रजा नये आत्मिक यौवन में सदा आनंदित रहे। हमें तेरी दत्तक संतान होने का गौरव पुनः प्राप्त हुआ है, इसलिए हम हर्षित हैं। तेरी कृपा से हम दृढ़ भरोसे के साथ अपने पुनरुत्थान की बाट जोहते रहें। हमारे प्रभु तेरे पुत्र येसु खीस्त के द्वारा, जो तेरे तथा पवित्र आत्मा के संग एक ईश्वर होकर युगानुयुग जीते और राज्य करते हैं।

 

पहला पाठ

(धर्म के विरोधी कितना ही अत्याचार क्यों न करें, कलीसिया येसु के पुनरुत्थान का साक्ष्य देती रहेगी। यदि विश्वासियों को इस कारण दुःख उठाना पड़ता है, तो उनको आनन्द का अनुभव होता है क्योंकि वे पेत्रुस और प्रेरितों की तरह 'येसु के नाम के कारण अपमानित हो जाने के योग्य समझे जाते हैं।')

प्रेरित- चरित                      5, 27-32.40-41   

हम और पवित्र आत्मा इन बातों के साक्षी हैं।”

प्रधानयाजक ने प्रेरितों से कहा, "हमने तुम लोगों को कड़ा आदेश दिया था कि वह नाम लेकर शिक्षा मत दिया करो और तुम लोगों ने येरुसालेम के कोने- कोने में अपनी शिक्षा का प्रचार किया और उस मनुष्य की हत्या की जिम्मेवारी हमारे सिर पर मढ़ना चाहते हो।” इस पर पेत्रुस और अन्य प्रेरितों ने यह उत्तर दिया, "मनुष्यों की अपेक्षा ईश्वर की आज्ञा का पालन करना अधिक उचित है। आप लोगों ने येसु को क्रूस पर लटका कर मार डाला था, किन्तु हमारे पूर्वजों के ईश्वर ने उन्हें जिलाया है। ईश्वर ने उन्हें शासक तथा मुक्तिदाता का उच्च पद देकर अपने दाहिने बैठा दिया, जिससे वह उनके द्वारा इस्त्राएल को पश्चात्ताप तथा पापक्षमा प्रदान करे। इन बातों के साक्षी हम हैं और पवित्र आत्मा भी, जिसे ईश्वर ने उन लोगों को प्रदान किया है, जो उसकी आज्ञा का पालन करते हैं।" उन्होंने प्रेरितों को यह कड़ा आदेश देकर छोड़ दिया कि तुम लोग येसु का नाम लेकर उपदेश न दिया करो। प्रेरित इसलिए आनन्दित होकर महासभा के भवन से निकले कि वे येसु के नाम के कारण अपमानित हो जाने के योग्य समझे गये।  

यह प्रभु की वाणी है।

 

भजन स्तोत्र 29 : 2.4-6.11-13

अनुवाक्य:- हे प्रभु! मैं तेरी स्तुति करूँगा तूने मेरा उद्धार किया है।

1. हे प्रभु! मैं तेरी स्तुति करूँगा। तूने मेरा उद्धार किया है। तूने मेरे शत्रुओं को मुझपर हँसने नहीं दिया। हे प्रभु! तूने मेरी आत्मा को अधोलोक से निकाला है, तूने मुझे मृत्यु से बचा लिया है।

2. जो प्रभु से प्रेम रखते हैं, वे प्रभु के आदर में गीत गायें और उसके पवित्र नाम की महिमा करें। उसका क्रोध क्षण भर का है किन्तु उसकी कृपा जीवन भर बनी रहती है। संध्या को भले ही रोना पड़े, किंतु प्रातःकाल आनन्द ही आनन्द होता है।

3. हे प्रभु! मेरी सुन। मुझ पर दया कर। हे प्रभु ! मेरी सहायता कर। तूने मेरा शोक आनन्द में बदल दिया है। हे प्रभु! मेरे ईश्वर! मैं अनन्तकाल तक तेरी स्तुति करूँगा।

 

दूसरा पाठ

(योहन ईश्वर के सुसमाचार के कारण पतमस नामक टापू में निर्वासित किये गये हैं। वह अपने मसीही भाइयों का साहस बँधाते हैं। येसु जीवन के स्रोत हैं और जो उनमें विश्वास करते हैं, वे इस विश्वास के कारण धैर्य के साथ इस जीवन का दुःख सहते हैं।)

प्रकाशना- ग्रंथ                             5, 11-14

“बलि चढ़ाया हुआ मेमना वैभव तथा सामर्थ्य का अधिकारी है।”

मेरे सामने वह दर्शन चलता रहा और मैं - योहन ने सिंहासन, प्राणियों और वयोवृद्धों के चारों ओर खड़े बहुत से स्वर्गदूतों की आवाज सुनी- उनकी संख्या लाखों और करोड़ों की थी। वे ऊँचे स्वर से कह रहे थे, "बलि चढ़ाया हुआ मेमना सामर्थ्य, वैभव, प्रज्ञा, शक्ति, सम्मान, महिमा तथा स्तुति का अधिकारी है।" तब मैंने समस्त सृष्टि को आकाश और पृथ्वी के, पृथ्वी नीचे और समुद्र के अंदर के प्रत्येक जीव को- यह कहते सुना, "सिंहासन पर विराजमान को तथा मेमने को युगानुयुग स्तुति, सम्मान, महिमा तथा सामर्थ्य।” और चार प्राणी बोले, “आमेन” और वयोवृद्धों ने मुँह के बल गिर कर दण्डवत् किया।

यह प्रभु की वाणी है।

 

जयघोष        

अल्लेलूया, अल्लेलूया! हे प्रभु! हमारे लिए धर्मग्रंथ की व्याख्या कर। हम से बातें कर और हमारा हृदय उद्दीप्त कर दे। अल्लेलूया!

 

सुसमाचार

(येसु अपनी मृत्यु के बाद अपने शिष्यों को बारम्बार अपने पुनरुत्थान का प्रमाण दे कर बड़े प्रेम से उन से मिले थे। वह हम को भी प्यार करते हैं और हमें भी उनके प्रेम के बदले उन को प्यार करना चाहिए।)

सन्त योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार                21, 1-19

“येसु शिष्यों के पास आये और रोटी ले कर उन्हें देने लगे, और उसी तरह मछली भी।”

तिबेरियस के समुद्र के पास येसु अपने शिष्यों को फिर दिखाई पड़े। यह इस प्रकार हुआ। सिमोन पेत्रुस, थोमस जो यमल कहलाता था, नथानाएल जो गलीलिया के काना का निवासी था, जेबेदी के पुत्र और येसु के दो अन्य शिष्य साथ थे। सिमोन पेत्रुस ने उनसे कहा, "मैं मछली मारने जा रहा हूँ।” वे उससे बोले, "हम भी आपके साथ चलते हैं।” वे चल पड़े और नाव पर चढ़े, किन्तु उस रात उन्हें कुछ नहीं मिला। सबेरा हो ही रहा था कि येसु तट पर दिखाई दिये, शिष्य उन्हें नहीं पहचान सके। येसु ने उनसे कहा, "बच्चो! खाने को कुछ मिला?” उन्होंने उत्तर दिया, “जी नहीं!” इस पर येसु ने उनसे कहा, “नाव के दाहिने जाल डाल दो और तुम्हें मिलेगा।” उन्होंने जाल डाला और इतनी मछलियाँ फँस गयीं कि वे जाल नहीं निकाल सके। तब उस शिष्य ने, जिसे येसु प्यार करते थे, पेत्रुस से कहा, "यह तो प्रभु ही हैं।" जब पेत्रुस ने सुना कि यह प्रभु हैं, तो वह अपना कपड़ा पहनकर क्योंकि वह नंगा था- समुद्र में कूद पड़ा। दूसरे शिष्य मछलियों से भरा जाल खींचते हुए डोंगी पर आये, वे किनारे से केवल लगभग दो सौ हाथ थे। उन्होंने तट पर उतरकर वहाँ कोयले की आग पर रखी हुई मछली देखी और रोटी भी। येसु ने उनसे कहा, "तुमने अभी- अभी जो मछलियाँ पकड़ी हैं, उनमें से कुछ ले आओ।” सिमोन पेत्रुस गया और जाल किनारे खींच लाया। उसमें एक सौ तिरपन बड़ी- बड़ी मछलियाँ थीं। और इतनी मछलियाँ होने पर भी जाल नहीं फटा था। येसु ने कहा, “आओ, जलपान कर लो।” शिष्यों में से किसी को येसु से यह पूछने का साहस नहीं हुआ कि आप कौन हैं। वे जानते थे कि वह प्रभु हैं। येसु अब पास आये और रोटी लेकर उन्हें देने लगे, और उसी तरह मछली भी। इस प्रकार येसु मृतकों में से जी उठने के बाद तीसरी बार अपने शिष्यों के सामने प्रकट हुए। जलपान के बाद येसु ने सिमोन पेत्रुस से कहा, "सिमोन, योहन के पुत्र! क्या तुम इनकी अपेक्षा मुझे अधिक प्यार करते हो?” उसने उन्हें उत्तर दिया, "जी हाँ, प्रभु! आप जानते हैं कि मैं आपको प्यार करता हूँ।" उन्होंने पत्रुस से कहा, "मेरे मेमनों को चराओ” येसु ने दूसरी बार उससे कहा, “सिमोन, योहन के पुत्र! क्या तुम मुझे प्यार करते हो?” उसने उत्तर दिया, "जी हाँ, प्रभु! आप जानते हैं कि मैं आपको प्यार करता हूँ।" उन्होंने पेत्रुस से कहा, “मेरी भेड़ों को चराओ।” येसु ने तीसरी बार उससे कहा, "सिमोन, योहन के पुत्र! क्या तुम मुझे प्यार करते हो?” पेत्रुस को इससे दुःख हुआ कि उन्होंने तीसरी बार उससे यह पूछा, "क्या तुम मुझे प्यार करते हो” और उसने येसु से कहा, "प्रभु! आपको तो सब कुछ मालूम है। आप जानते हैं कि मैं आपको प्यार करता हूँ।” येसु ने उससे कहा, "मेरे मेमनों को चराओ।" मैं तुमसे यह कहता हूँ- जवानी में तुम स्वयं अपनी कमर कसकर जहाँ चाहते थे, वहाँ घूमते- फिरते थे, लेकिन बुढ़ापे में तुम अपने हाथ फैलाओगे और दूसरा व्यक्ति तुम्हारी कमर कसकर तुम्हें वहाँ ले जायेगा जहाँ तुम जाना नहीं चाहते।” इन शब्दों से येसु ने संकेत किया कि किस प्रकार की मृत्यु से पेत्रुस द्वारा ईश्वर की महिमा का विस्तार होगा। येसु ने अंत में पेत्रुस से कहा, "मेरा अनुसरण करो।"

यह प्रभु का सुसमाचार है।

 

विश्वास घोषणा एवं धर्मसार

मैं सर्वशक्तिमान् पिता -

स्वर्ग और पृथ्वी, सब दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के सृष्टिकर्ता- एक ही ईश्वर में विश्वास करता (करती) हूँ। मैं ईश्वर के इकलौते पुत्र, एक ही प्रभु येसु ख्रीस्त में विश्वास करता (करती) हूँ, जो सभी युगों के पहले पिता से उत्पन्न है। वह ईश्वर से उत्पन्न ईश्वर, प्रकाश से उत्पन्न प्रकाश, सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वर है, वह बनाया हुआ नहीं, बल्कि उत्पन्न हुआ है, वह पिता के साथ एकतत्त्व है; उसी के द्वारा सब कुछ सृष्ट हुआ। वह हम मनुष्यों के लिए और हमारी मुक्ति के लिए स्वर्ग से उतरा और पवित्र आत्मा के द्वारा कुँवारी मरियम से देह धारणकर मनुष्य बना। उसने पोंतुस पिलातुस के समय दुःख भोगा, वह हमारे लिए क्रूस पर ठोंका गया, वह मर गया और दफ़नाया गया

और धर्मग्रंथ के अनुसार तीसरे दिन फिर से जी उठा। वह स्वर्ग में आरोहित हुआ और पिता के दाहिने विराजमान है। वह जीवितों और मृतकों का न्याय करने महिमा के साथ फिर आएगा और उसके राज्य का कभी अंत नहीं होगा। वह प्रभु और जीवनदाता है :  मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता (करती) हूँ, वह पिता और पुत्र से प्रसृत होता है। पिता और पुत्र के साथ उसकी आराधना और महिमा होती है, वह नबियों के मुख से बोला है। मैं एक, पवित्र, काथलिक तथा प्रेरितिक कलीसिया में विश्वास करता (करती) हूँ। मैं पापों की क्षमा के लिए एक ही बपतिस्मा स्वीकार करता (करती) हूँ और मृतकों के पुनरुत्थान तथा अनंत जीवन की बाट जोहता (जोहती) हूँ। आमेन।

 

विश्वासियों के निवेदन

पु० प्रिय भाई- बहनो, पिता ईश्वर हम सबों को बेहद प्यार करता है और वह हमसे भी प्रेम की आशा करता है। हम अपनी सब आवश्यकताओं को उसके समक्ष रखें और कहें:

सबः हे पिता हमारी प्रार्थना सुन।

1. हमारे संत पिता, सभी धर्माध्यक्षों एवं पुरोहितों को ईश्वर सब तरह की बुराइयों से बचाए रखे। वे सुसमाचार का प्रचार, अपने वचन एवं कर्म से करें और ख्रीस्त एवं कलीसिया के प्रति सदा विश्वस्त बने रहें। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

2. देश के सभी नेता अपने कर्त्तव्यों का सही ढंग से पालन करें और अपने उत्तरदायित्वों को भली- भाँति निभाने का प्रयत्न करें। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

3. जो लोग आशाहीन जीवन व्यतीत कर रहे हैं और यह सोच रहे हैं कि उनका सब कुछ नष्ट हो गया है, ईश्वर उनके दुःख को आनन्द में बदल दे। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

4. जो लोग बीमारी से पीड़ित हैं, हिंसा के शिकार तथा आकस्मिक घटनाओं के चंगुल में फंसे हैं, ईश्वर उन्हें धीरज और बल प्रदान करे और उन्हें ऐसी स्थितियों से छुटकारा दिलाए। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

5. जो लोग निरुत्साह का जीवन जी रहे हैं, ईश्वर अपने आत्मा की शक्ति द्वारा उनके निरुत्साह को दूर कर उनके विश्वास को जीवंत कर दे। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

(निजी प्रार्थनाएँ)

पु०: हे प्रेममय पिता, हम तेरे असीम प्रेम के लिए तुझे धन्यवाद देते हैं और प्रार्थना करते हैं कि हम इसका प्रत्युत्तर ईमानदारी, उदारता एवं आनंदपूर्वक दे सकें। तू हमारा मित्र बन कर सदा हमारे साथ रह और हमें अनंत जीवन के मार्ग पर ले चल। हम यह प्रार्थना करते हैं, प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

अर्पण -प्रार्थना

 हे प्रभु, अपनी उल्लासमयी कलीसिया का यह चढ़ावा ग्रहण कर। तेरी ही कृपा से इसको यह अपार आनंद मिला है। ऐसी कृपा कर कि हमारे ये उपहार चिरस्थायी सुख का फल उत्पन्न करें। ये हम यह प्रार्थना करते हैं, अपने प्रभु खीस्त के द्वारा।  

 

पास्का की अवतरणिका 1

पास्का रहस्य

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा- सर्वदा और विशेष करके (इस रात में / इस दिन / इस अवसर पर) अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब खीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। ये ही हैं सच्चा मेमना, जिन्होंने संसार का पाप हर लिया है; इन्होंने मृत्यु सहकर हमारी मृत्यु नष्ट कर दी और पुनर्जीवित होकर हमें नवजीवन प्रदान किया है। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! ....

 

पास्का की अवतरणिका 2

खीस्त में नया जीवन

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब खीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। इन्हीं के द्वारा अनंत जीवन के लिए ज्योति की संतान उत्पन्न होते और विश्वासियों के लिए स्वर्गराज्य के प्रांगण खुल जाते हैं, क्योंकि इनकी मृत्यु द्वारा हम मृत्यु से मुक्त हुए हैं। और इनके पुनरुत्थान द्वारा हम पुनर्जीवित हुए हैं। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र , पवित्र , पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

पास्का की अवतरणिका 3

पुनर्जीवित ख्रीस्त सदा हमारे मध्यस्थ

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु , यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब खीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। ये हमारे लिए स्वयं को सदा बलि चढ़ाते हैं और निरंतर तेरे सम्मुख हमारे पक्ष में आग्रह करते हैं: ये ही हैं वह यज्ञ- बलि, जो अब फिर कभी नहीं मरते; वह मेमना, जो एक बार बलि चढ़ाये गये, परन्तु अब अनंत काल तक जीवित रहते हैं। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

पास्का की अवतरणिका 4

पास्का रहस्य द्वारा सम्पूर्ण सृष्टि का पुनर्निर्माण

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा- सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। क्योंकि पुरानी पद्धति नष्ट होने के साथ पतित विश्व का नवनिर्माण हुआ और ख्रीस्त में हमें जीवन की पूर्णता प्राप्त हुई है। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

पास्का की अवतरणिका 5

खीस्त: याजक और बलि

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा- सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। अपना शरीर अर्पित करके इन्होंने प्राचीन बलिदानों को क्रूस के बलिदान में पूर्ण बनाया और स्वयं पुरोहित, वेदी और बलि का मेमना बनकर हमारी मुक्ति के लिए स्वयं को तुझे समर्पित किया। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

कम्यूनियन अग्रस्तव  

शिष्यों ने प्रभु येसु को रोटी तोड़ते समय पहचान लिया। अल्लेलूया!

 

कम्यूनियन के बाद प्रार्थना

हे प्रभु, हम सब पर दयादृष्टि डाल। तूने शाश्वत संस्कार द्वारा हमारा नवनिर्माण किया है। एक दिन हमारा शरीर पुनरुत्थान की अविनाशी महिमा प्राप्त करे। यह प्रार्थना स्वीकार कर, हमारे प्रभु खीस्त के द्वारा।

 

समारोही आशीष

ईश्वर ने अपने इकलौते पुत्र के पुनरुत्थान द्वारा आपलोगों का उद्धार करके आपको दत्तक संतान बना लिया है, वही आपलोगों को आनंद का वरदान दे।

सब: आमेन।

मुक्तिदाता ख्रीस्त ने आपलोगों को चिरस्थायी स्वतंत्रता दी है, वही आपलोगों को अनंत जीवन का उत्तराधिकारी बनाये।

सब: आमेन।

आपलोग बपतिस्मा में विश्वास द्वारा ख्रीस्त के साथ जी उठे हैं, इसलिए इस पृथ्वी पर आदर्श जीवन बिताकर उनके राज्य में सदा- सर्वदा विराजें।

सब: आमेन। सर्वशक्तिमान् ईश्वर, पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा का आशीर्वाद आपलोगों पर उतरे और सदा बना रहे।

सब: आमेन।

 

 

1. Homily / Sermon

पास्का का तीसरा रविवार 01 मई 2022

 

परिचय:

आज का सुसमाचार वर्णन हमें पेत्रुस के पुनर्वास को दिखाता है, जिसने कैफ़स के प्रांगण में तीन बार येसु को अस्वीकार किया, पश्चाताप किया, और फिर येसु से कलीसिया में प्रधानता प्राप्त की। सुसमाचार हमें मनुष्य की तलाश में ईश्वर को भी दिखाता है, तब भी जब मनुष्य उससे बचने की कोशिश करता है। इस विषय ने फ्रांसिस थॉम्पसन को अपनी प्रसिद्ध रहस्यवादी कविता, "द हाउंड ऑफ हेवन" लिखने के लिए प्रेरित किया। प्रेरित चरित से लिया गया पहला पाठ हमें बताता है कि कैसे पवित्र आत्मा ने पेत्रुस को, जिसे येसु ने अपनी कलीसिया का प्रमुख नियुक्त किया था, शक्तिशाली लोगों से डरे हुए व्यक्ति से पुनरुत्थान के लिए एक बहादुर गवाह में बदल दिया।

आज का अन्तर भजन, हमें याद दिलाता है कि यह ईश्वर है जो हमें हमारी परेशानियों से बचाता है जो प्रभु से प्रेम रखते हैं, वे प्रभु के आदर में गीत गायें और उसके पवित्र नाम की महिमा करें। उसका क्रोध क्षण भर का है, किन्तु उसकी कृपा जीवन भर बनी रहती है। संध्या को भले ही रोना पड़े , किन्तु प्रातःकाल आनन्द ही आनन्द होता है। प्रकाशनाग्रन्थ से लिया गया दूसरा पाठ, संत योहन के पुनर्जीवित प्रभु के दर्शन को स्वर्ग में विराजमान "ईश्वर के मेमने" के रूप में प्रस्तुत करता है। समृद्ध कल्पना का उपयोग करते हुए, संत योहन बताते हैं कि येसु ने कुछ अभूतपूर्व किया है और हमें वह दिया है जिसके हम हकदार हैं। इसलिए, स्वर्गदूत ईश्वर के सिंहासन के चारों ओर स्तुति गाते हैं। प्रकाशनाग्रन्थ की पुस्तक पुनर्जीवित प्रभु में ईसाई आशा की अभिव्यक्ति है। सुसमाचार हमारे दयालु उद्धारकर्ता की पुनरुत्थान के बाद की कहानी बताता है जो हताश और निराश शिष्यों के अपने समूह की तलाश में जाता है। संत योहन इसे येसु के पुनरुत्थान के बाद के तीसरे दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत करता है। यह घटना साबित करती है कि जी उठने के बाद येसु के प्रकटन केवल मतिभ्रम नहीं थे। आज के सुसमाचार के पहले भाग में, पुनर्जीवित येसु अपने शिष्यों के सामने प्रकट होते हैं और उन्हें मछली की एक चमत्कारी पकड़ में उनके मिशन का प्रतीक देते हैं और उसके बाद येसु द्वारा तैयार भुनी हुई मछली का नाश्ता करते हैं। दूसरा भाग येसु और सिमोन के बीच एक संवाद है। तीन बार, येसु ने सिमोन पेत्रुस से पूछा, "क्या तुम मुझसे प्रेम करते हो?" और पेत्रुस जवाब देता है कि वह प्रेम करता है। कहानी में इस्तेमाल किए गए दो रूपक, अर्थात् मछली पकड़ना और चरवाहा, कलीसिया के कर्तव्य हैं जो उसके मिशन कार्य का जिक्र करते हैं। पेत्रुस, एक क्षमा किए हुए पापी के रूप में, उसके प्रेम की गुणवत्ता के लिए भाइयों और बहनों के समुदाय में एक नेता के रूप में चुना जाता है। अपने प्राथमिक मिशन में, उन्हें कमजोर मेमनों और भेड़ों की देखभाल दी जाती है, और उन्हें बताया जाता है कि इस मिशन के प्रति उनकी निष्ठा उन्हें शहादत की ओर ले जाएगी।

 

पहला पाठ (प्रेरित चरित 5:27-32, 40-41):

यह पाठ वर्णन करता है कि पेंतेकोस्त के बाद के प्रेरितों ने कैसे प्रतिक्रिया दी जब यहूदी नेताओं ने उन्हें येसु के बारे में प्रचार करने से रोकने की कोशिश की। प्रेरितों को महासभा के सामने लाया गया और येसु के नाम पर उपदेश देना बंद करने का आदेश दिया गया। यह दूसरी बार था जब उन्हें महासभा - यहूदी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तार किया गया था। जब महायाजक ने मांग की कि पेत्रुस और उसके साथी उसकी सुनें और उसके आदेशों का पालन करें, तो पेत्रुस ने उत्तर दिया, “मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर हमें ईश्वर की आज्ञा का पालन करना चाहिए।” फिर उन्होंने “इस्राएल को मन फिराव और पापों की क्षमा देने के लिये ईश्वर के येसु को उद्धारकर्ता के रूप में उठाये जाने की गवाही दी।” हालाँकि उन्हें कोड़े लगाए गए थे और उन्हें "अपराध" न दोहराने का सख्त आदेश दिया गया था, फिर भी प्रेरितों ने "आनन्दित होकर कि वे येसु के नाम के लिए पीड़ित होने के योग्य पाए गए थे," चले गए।

 

दूसरा पाठ (प्रकाशना ग्रन्थ 5:11-14):

यह संत योहन का उस दर्शन का विवरण है जो उसे स्वर्ग में, पृथ्वी पर, पृथ्वी के नीचे और समुद्र के सभी लोगों द्वारा जी उठे येसु को दी गई स्तुति के बारे में दिया गया था। स्वर्ग में, स्वर्गदूत और अन्य आध्यात्मिक प्राणी ईश्वर के सिंहासन के चारों ओर स्तुति गाते हैं। ईश्वर के हाथ में मुहरबंद खर्रा है। एक आवाज पूछती है, "कौन इस योग्य है कि वह पुस्तक प्राप्त करे और उसकी मुहरों को खोले?" फिर जी उठे येसु को एक मारे गए मेमने के रूप में चित्रित किया गया है जो स्वर्ग में ईश्वर के सिंहासन के सामने खड़ा है। स्वर्ग के लोग यह कहते हुए उसकी स्तुति करते हैं, "इस योग्य मेमना है जो शक्ति और धन, बुद्धि और ताकत, सम्मान और महिमा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मारा गया था।" पीड़ित की तरह, इसायाह के निर्दोष मेमने, येसु को ईश्वर ने सही ठहराया है। इस मार्ग ने प्रारंभिक ईसाइयों को यह संदेश दिया कि पूजा के योग्य एकमात्र प्रभु पुनर्जीवित हुए "प्रभु येसु मसीह" हैं। अंतिम फसह के मेमने के रूप में येसु के एक बार और हमेशा के लिए बलिदान ने प्रत्येक क्षमा किए गए पापी और विश्वासयोग्य विश्वासी के लिए मृत्यु से जीवन में जाना संभव बना दिया है। प्रत्येक युख्रिस्तिक उत्सव में, ईश्वर के योग्य और विजयी मेमने को तीन बार आमंत्रित किया जाता है क्योंकि एकत्रित सभा क्षमा की आवश्यकता को स्वीकार करती है: "हे ईश्वर के मेमने, तू संसार के पाप हर लेता हैं, हम पर दया कर। हे ईश्वर के मेमने, तू संसार के पाप हर लेता हैं, हम पर दया कर। हे ईश्वर के मेमने, तू संसार के पाप हर लेता हैं, हमें शांति प्रदान कर।"

 

सुसमाचार व्याख्या:

गलीलिया में जी उठे येसु: अपने प्रेरितों को पुनर्जीवित मसीह की इस उपस्थिति का वर्णन करने का प्राथमिक उद्देश्य पेत्रुस का पुनर्वास करना था जिसने तीन बार येसु को अस्वीकार किया था, लेकिन फिर पश्चाताप किया था, और पेत्रुस पर कलीसिया में प्रधानता के वास्तविक सम्मान पर जोर देना था। मत्ती के सुसमाचार में, येसु ने स्त्रियों को यह कहते हुए प्रकट किया, "डरो नहीं। जाओ और मेरे भाइयों को यह सन्देश दो कि वे गलीलिया जायें। वहाँ वे मेरे दर्शन करेंगे।” ऐसा लगता है कि पुनर्जीवित मसीह का गलीलिया में अपने प्रेरितों को देखने का एक विशिष्ट उद्देश्य था। यहीं पर उसने अपना मिशन शुरू किया था और अपने प्रेरितों की भर्ती की थी। उसका उद्देश्य पेत्रुस और गलीलिया में प्रेरितों को प्रेरितिक मिशन प्रदान करना था। हम महसूस करते हैं कि जी उठे येसु ही थे जिन्होंने प्रारंभिक कलीसिया की मिशनरी गतिविधियों की योजना बनाई और उन्हें निर्देशित किया। हम निश्चित हो सकते हैं कि पुनर्जीवित प्रभु स्वयं पवित्र आत्मा के प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और संरक्षण के माध्यम से आज अपने कलीसिया का नेतृत्व और निर्देशन करते हैं, जैसा कि उन्होंने प्रेरितों के लिए किया था और उनके उत्तराधिकारियों के लिए किया है।

मछली पकड़ने के लिए वापस समुद्र में: संत योहन के सुसमाचार के अध्याय 21 में पेत्रुस को अपने पुराने जीवन के रास्ते पर लौटते हुए दिखाया गया है, शायद, अपने स्वामी के सूली पर चढ़ने की विनाशकारी घटनाओं को भूलने की कोशिश कर रहा है। छह अन्य प्रेरित उसके साथ जुड़ते हैं: थॉमस जो पूर्व संदेही था, जेबेदी के पुत्र, विश्वासयोग्य और वफादार नथानिएल, और  ईसा के दो अन्य शिष्य जिनका नाम नहीं लिया गया था। यद्यपि योहन उल्लेख करता है कि "यह तीसरी बार था कि येसु मृतकों में से जी उठने के बाद चेलों के सामने प्रकट हुए।" यह वास्तव में चौथा प्रकटन है। पहला मरियम मगदलेना  (20:11-17) के लिए था। दूसरा थोमस के बिना चेलों के लिए था (20:19-23)। तीसरा थोमस और उसके चेलों के लिए था (20:26-29)। येसु के पुनरुत्थान के बाद का यह प्रकटन हमें उनकी सेवकाई की एक पूर्व घटना की याद दिलाता है, अर्थात् पेत्रुस और अन्य शिष्यों की गलीलिया सागर में मछली पकड़ने की रात के बाद की बुलाहट। (मछुआरे अक्सर रात में काम करते थे ताकि सुबह बाजार में सबसे ताज़ी संभव मछली बेचने में सक्षम हो सकें)। दोनों ही मामलों में, येसु ने शिष्यों को दूसरी बार समुद्र में अपना जाल डालने के लिए कहा। दोनों ही मामलों में, वे बड़ी संख्या में मछलियाँ पकड़ते हैं, और दोनों ही घटनाओं में, येसु ने पेत्रुस को अपने पीछे चलने के लिए आमंत्रित किया। "कलीसिया के पिता और चिकित्सक अक्सर इस प्रकरण के रहस्यमय अर्थ पर ध्यान देते हैं: नाव कलीसिया है, जिसकी एकता उस जाल का प्रतीक है जो फटा नहीं है; समुद्र दुनिया है, नाव में पेत्रुस कलीसिया के सर्वोच्च अधिकार के लिए खड़ा है, और मछलियों की संख्या चुने हुए लोगों की संख्या को दर्शाती है।

पुनर्जीवित प्रभु के साथ युख्रिस्तिक भोजन: प्रेरितों का अपने पुराने व्यवसाय में लौटना उनके परिवर्तन के अगले चरण को निर्धारित करता है। आखिरकार, उन्हें समझ में आ जाता है कि किनारे पर मौजूद अजनबी उन्हें मछली की जबरदस्त पकड़ के लिए निर्देशित कर रहा है, वास्तव में वह "प्रभु" है। वे उसे पहचानते हैं जब वे वही कर रहे होते हैं जो वे हमेशा से करते आए हैं। इसके तुरंत बाद, चेले येसु के साथ भोजन करते हैं। हालाँकि बाद में येसु के अनुयायियों ने युख्रिस्त को एक औपचारिक अनुष्ठान में सीमित कर दिया, जिसमें हर कोई पवित्र रोटी का एक छोटा टुकड़ा और पवित्र दाखरस का एक घूंट साझा करता है, उसके पहले शिष्यों ने उसकी पुनर्जीवित उपस्थिति को पूर्ण भोजन के साथ मनाया। येसु ने उनके द्वारा पकड़ी गई मछलियों में से कुछ को भोजन में शामिल करके उनके काम को प्रमाणित किया। यह इस बिंदु पर था कि उन्होंने महसूस किया कि उनका "ईश्वर" उनमें से था, जिससे उन्हें उनकी महिमामय उपस्थिति का अनुभव प्रदान किया गया। संत योहन के सुसमाचार में, येसु ने अपनी सेवकाई को काना (2:1- 11) में बहुतायत के चमत्कार के साथ शुरू किया और अपनी सेवकाई को तिबेरियस सागर (21:4-6) पर बहुतायत के एक और चमत्कार के साथ बंद कर दिया। "येसु ने आकर रोटी ली, और उन्हें दी, और मछलियों के साथ भी ऐसा ही किया" (21:13)।

येसु लोगों की शारीरिक और आध्यात्मिक ज़रूरतों दोनों के प्रति संवेदनशील हैं। तब से, कलीसिया ने लोगों को भोजन, वस्त्र, आवास और शिक्षित करके येसु के उदाहरण का अनुसरण किया है। लोगों की भौतिक जरूरतों के लिए हमारी चिंता न केवल मानवीय पीड़ा को दूर करती है बल्कि एक शक्तिशाली आध्यात्मिक गवाह भी बनाती है।

पेत्रुस का तीन बार स्वीकरण : "येसु के पुनरुत्थान के बाद उनके प्रकट होने के बारे में कहानियों की एक विशेषता यह है कि वे लगभग हमेशा येसु के साथ किसी को नियुक्त करने के साथ समाप्त होते हैं। येसु एक उद्देश्य के लिए प्रकट होते हैं। येसु की उपस्थिति दृढ़ता से बुलाने की भावना से जुड़ी हुई है। येसु की गिरफ्तारी की रात को पेत्रुस ने तीन बार येसु को अस्वीकार किया (18:17, 25, 27), और पश्चाताप किया; अब, येसु उसे खुद को छुड़ाने के लिए तीन मौके दे रहा है। येसु ने पहले पेत्रुस के पाप का निपटारा किया और फिर उसे उसकी ओर से कार्य करने के लिए नियुक्त किया। येसु दो बार पूछते है कि क्या पेत्रुस उनसे गहरे, मजबूत, और अधिक बलिदानी प्रकार के अगापे प्रेम से प्रेम करता है, न कि केवल भाईचारे के प्रेम या मित्रता से संबंधित दार्शनिक प्रेम। किसी भी घटना में, "एक बात जिसके बारे में येसु ने पेत्रुस को कलीसिया की देखभाल करने के लिए नियुक्त करने से पहले उससे पूछताछ की, वह थी प्रेम। यह ईसाई सेवा के लिए बुनियादी योग्यता है। अन्य गुण वांछनीय हो सकते हैं, लेकिन प्रेम पूरी तरह से अपरिहार्य है (1 कुरिंथि 13:1-3)।"  इस तीन बार स्वीकरण के द्वारा, पेत्रुस को नेतृत्व की स्थिति में बहाल किया जाता है, जहां से वह अपने तीन बार येसु को अस्वीकार से गिर गया था। इसके अलावा, यह घोषित किया जाता है कि पेत्रुस वास्तव में एक पुरोहित है, जिसे मसीह की भेड़ों को चराने के द्वारा मसीह के लिए अपना प्यार दिखाना है, अस्वीकार को पुष्टि में पुनर्चक्रित करना है। पेत्रुस का पुनर्वास ईश्वरीय अनुग्रह का उत्सव है। सच्चे चरवाहे द्वारा नियुक्त किए गए चरवाहे के रूप में, जैसा उसने किया, भेड़ों की देखभाल करने के लिए, पेत्रुस भी नेतृत्व का प्रतीक है। "मेरी भेड़ों को चराओ" पुनरुत्थान के बाद के कलीसिया का एजेंडा बना रहेगा जब तक कि पुनर्जीवित प्रभु महिमा में प्रकट नहीं हो जाते।

 

पेत्रुस की शहादत की भविष्यवाणी: अंत में, येसु कहते है कि पेत्रुस अपनी मृत्यु के द्वारा ईश्वर की महिमा करेगा जैसे येसु ने अपने द्वारा ईश्वर की महिमा की है। "अपने हाथ फैलाओ" सूली पर चढ़ने जैसा लगता है, और इस सुसमाचार के लेखन के समय तक पेत्रुस शहीद हो चुके थे, शायद रोम में सूली पर चढ़ाने से। किंवदंती यह है कि उसने उल्टा सूली पर चढ़ने के लिए कहा क्योंकि वह अपने ईश्वर का अनुकरण करने के लिए अयोग्य महसूस करता था, हालांकि इस किंवदंती के सबूत कमजोर हैं।

प्रेरितों का अनुभव और हमारा अनुभव: जैसे पेत्रुस ने पुनरुत्थित प्रभु को पहचान लिया और पानी में छलांग लगा दी, उसी तरह ईसाई भी पुनरुत्थित येसु में अपने विश्वास का दावा करते हैं और पानी और आत्मा में बपतिस्मा लेते हैं। जैसे पहले चेले पुनरुत्थित येसु के साथ भोजन करते हैं, वैसे ही अब हम नियमित रूप से उसके साथ यूखरिस्त साझा करते हैं। और जिस तरह जी उठे येसु ने पेत्रुस को अपनी ओर से एक पास्टोरल मिशन करने के लिए नियुक्त किया, उसी तरह हमारे लिए बपतिस्मा और यूखरिस्त का स्वाभाविक परिणाम खुद को और अपने विश्वास को दूसरों के साथ साझा करना है।

 

जीवन संदेश:

1) विभिन्न रूपों, परिस्थितियों और घटनाओं में हमारे जीवन में आने वाले पुनर्जीवित येसु को देखने, सुनने और अनुभव करने के लिए हमें अपनी आंखें, कान और दिल को खोलने करने की जरूरत है।

अ) पुनर्जीवित प्रभु हमें सफलता और उपलब्धियां देते हैं: हम अक्सर अपनी अप्रत्याशित जीत, महान उपलब्धियों, नौकरी में पदोन्नति, चमत्कारी उपचार, और रिश्तों में सफलता के पीछे पुनरुत्थित येसु की उपस्थिति को स्वीकार करने में विफल होते हैं। आइए हम मूर्खतापूर्ण तरीके से अपने करियर में सफलता का श्रेय केवल कड़ी मेहनत को न दें; हमारा अच्छा स्वास्थ्य केवल दैनिक व्यायाम के साथ-साथ भोजन और पेय में संयम; और हमारी अच्छी वित्तीय स्थिति केवल मितव्ययी खर्च करने की आदतों और पैसे के अच्छे प्रबंधन के लिए है। आइए हम ईश्वरीय चेतावनियों को याद करें, "मुझ से अलग रहकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते" (संत योहन 15:5); और "यदि प्रभु ही घर नहीं बनाये, तो राजमिस्त्रियों का श्रम व्यर्थ है।" (स्त्रोत 127:1)।

स) पुनर्जीवित प्रभु हमारे दर्द और पीड़ा में मौजूद हैं: प्रेरित चरित 9:1-13 हमें बताता है कि कैसे पुनर्जीवित प्रभु ने साऊल को दमिश्क मार्ग पर धकेल कर और उसे अस्थायी रूप से अंधा बनाकर उसके जीवन को बदल दिया। वही येसु अक्सर दुर्घटनाओं, बीमारियों, प्रियजनों की हानि, दर्द, पीड़ा और रिश्तों में समस्याओं के रूप में हमारे पास आते हैं। जब कार्डिनल बर्नडाइन को अग्नाशय के कैंसर के विकास को रोकने के लिए उनके पित्ताशय और उनकी एक किडनी को शल्यचिकित्सा हटाने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तो उन्होंने कहा: "कैंसर ने मेरे जीवन में सक्रिय रूप से शामिल पुनर्जीवित येसु की उपस्थिति में मेरे विश्वास को बढ़ाया। मैं अपने व्यस्त पास्टोरल जीवन में किसी भी समय अस्पताल के कमरे में उनका अनुभव कर सकता था" बिशप डेसमंड टूटू, जो प्रोस्टेट कैंसर के खिलाफ लड़ाई हार रहे थे, ने बताया कि किस तरह इस बीमारी ने उन्हें चीजों को देखने और उन चीजों को सुनने के लिए नए कान और नई आंखें दीं, जिन्हें उन्होंने हल्के में लिया था, जैसे- अपने जीवनसाथी का प्यार, बीथोवेन सिम्फनी, गुलाब पर ओस, पोते के चेहरे पर हंसी आदि।

द) पुनर्जीवित ईश्वर हमारे दोस्तों और शुभचिंतकों में हमारे पास आ रहे हैं: येसु उन लोगों में मौजूद हैं जो हमारे पास आते हैं और हमारे दुखद और हताश क्षणों में हमें प्रोत्साहित करते हैं। पुनर्जीवित ईश्वर हमारी सख्त जरूरतों में कम से कम अपेक्षित व्यक्तियों से अप्रत्याशित मदद के रूप में हमसे मिलने आते हैं। वह हमारी पार्टियों, समारोहों और आनंद के अवसरों में वहीं है।

ग) पुनर्जीवित ईश्वर हमारी प्रार्थना में मौजूद हैं। वह हमारे साथ अपना जीवन साझा करने के लिए पवित्र मिस्सा के दौरान हमारी वेदियों पर मौजूद है; वह पवित्र शास्त्र के शब्दों में मौजूद है; वह वहां संस्कारों में है और वह वहां है जहां उसके नाम पर दो या तीन इकट्ठे होते हैं (मत्ती 18:20)।

 

2) हमें पुनर्जीवित ईश्वर के साथ काम करने की जरूरत है और प्रार्थना में उनसे परामर्श करने और उनका निर्देश प्राप्त करने के बाद, उनके आशीर्वाद से अपनी सभी गतिविधियों की योजना बनाएं। आइए हम प्रार्थना करें कि हम एक कलीसिया बनें जो लोगों के लिए मछली पकड़ने, भेड़ों की देखभाल करने और उन्हें जीवन के वचन के साथ खिलाने की सुसमाचार जीवन शैली में जारी रहे।

 

3) आइए हम प्रेम, करुणा और सेवा के वास्तविक कृत्यों द्वारा अपनी कमजोरी के क्षणों की भरपाई करें। पेत्रुस को अपने प्यार को साबित करने के लिए बुलाया गया: “यदि तू मुझ से प्रेम रखते हो तो मेरी भेड़ों को चराओ।” वही पुनर्जीवित हुए प्रभु हमें याद दिलाते है: "यदि तुम मुझे प्यार करोगे तो मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे।" ( संत योहन 14:15)। हमारे वर्तमान कार्य और गतिविधियाँ मसीह के लिए हमारे प्रेम के बारे में क्या कहती हैं? पुनर्जीवित येसु हमारी क्षमायाचना को स्वीकार करते हैं, हमारे ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हैं, हमें अपराध-बोध से मुक्त करते हैं, और हमारी सभी कमजोरियों को क्षमा करते हैं। वह हमें चुनौती देते रहते है कि हम वफादारी से, आज़ादी से, हमारी देखभाल के लिए सौंपी गई अपनी भेड़ों को चराकर उसके लिए अपना प्यार प्रदर्शित करें।

 

 

 

 

 

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