पास्का का चौथा रविवार 08 May 2022

पास्का का चौथा रविवार 08 May 2022

 

प्रवेश भजन

पृथ्वी प्रभु की अनुकम्पा से परिपूर्ण है। उसके शब्दमात्र से आकाश बना है। अल्लेलूया!

 

पश्चाताप- विधि

हम प्रतिदिन की गतिविधियों में इतना उलझ जाते हैं कि हम निश्चित ही नहीं कर पाते हैं कि कौन सा मार्ग लें। ऐसे समय में प्रभु येसु कहते हैं “संसार की ज्योति मैं हूँ। जो मेरा अनुसरण करता है, वह अंधकार में भटकता नहीं रहेगा। ये वही येसु थे जिन्होंने अपना समय लोगों के साथ व्यतीत किया, जो बीमार थे उनको चंगाई प्रदान की थी और जिन्होंने लोगों को नया जीवन दिया और इस तरह से उन्होंने लोगों को सही रास्ता भी दिखाया था। और लोगों के लिए एक ऐसा गड़ेरिया बने जो उनके साथ जीवन यापन करता हो। ठीक उसी प्रकार यदि हम उनका अनुसरण करें तो अवश्य ही हमारा दिशा- निर्देशन करेंगे, विशेषकर विकट परिस्थिति में यहूदी समाज में फरीसियों ने लोगों को डरा कर रखा था क्योंकि उन्होंने ईश्वर के प्रेम को समझ नहीं पाया था। उनके लिए आज्ञाकारिता ही सब कुछ थी और वे लोगों को भी वही करने की सलाह देते थे। उनकी शिक्षा के अनुसार यदि हम आज्ञाकारिता का पालन करते हैं तो हम निराश हो जाते हैं। ऐसे में प्रभु कहते हैं मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और वे मेरा अनुसरण करती है। हम लोग ईश्वर की संतान हैं जो हमें येसु के भाई- बहन होने का दर्जा देता है। और यह हमेशा याद दिलाता है कि हम कौन है और क्या कर सकते हैं। (जीवन झरना, क्लरेशियन बाईबिल डायरी)

पु०: भाइयो और बहनो, हम अपने पापों को स्वीकार करें, ताकि हम यह पवित्र बलि चढ़ाने के योग्य बन जाएँ।

सब: हे भाइयो-बहनो, मैं सर्वशक्तिमान् ईश्वर और आप लोगों के सामने स्वीकार करता हूँ कि मैंने मन, वचन और कर्म से तथा अपना कर्त्तव्य पूरा न करने से (सब लोग अपनी छाती पीटते हुए बोलते हैं )अपने कसूर से, अपने कसूर से, अपने भारी कसूर से घोर पाप किया है। इसलिए, मैं नित्य कुँवारी धन्य मरियम से, सब स्वर्गदूतों, संतों और आप लोगों से, हे भाइयो-बहनो, विनती करता हूँ कि आप लोग मेरे लिए प्रभु ईश्वर से प्रार्थना करें।

पु०: सर्वशक्तिमान् ईश्वर हम लोगों पर दया करे और हमारे पाप क्षमा कर हमें अनंत जीवन प्रदान करे।

सब: आमेन।

पु०: हे प्रभु दया कर। सब: हे प्रभु दया कर।

पु०: हे ख्रीस्त दया कर। सब: हे ख्रीस्त दया कर।

पु०: हे प्रभु दया कर। सब: हे प्रभु दया कर।

पु०: स्वर्ग में ईश्वर की महिमा

सब: और पृथ्वी पर उसके कृपापात्रों को शांति। हम तेरी प्रशंसा करते हैं, तुझे धन्य कहते हैं, तेरी आराधना करते हैं, और तेरी महिमा गाते हैं। हम तेरी परम महिमा के कारण तेरा गुणगान करते हैं। हे प्रभु ईश्वर, स्वर्ग के स्वामी, सर्वशक्तिमान् पिता ईश्वर हे प्रभु! एकलौते पुत्र, येसु ख्रीस्त! हे प्रभु ईश्वर, ईश्वर के मेमने, पिता के पुत्र! तू

संसार के पाप हर लेता है, हम पर दया कर तू संसार के पाप हर लेता है, हमारा निवेदन स्वीकार कर तू पिता की दाहिनी ओर विराजमान है, हम पर दया कर। क्योंकि तू ही पवित्र है, तू ही प्रभु है। तू ही येसु ख्रीस्त पवित्र आत्मा के साथ, पिता ईश्वर की महिमा में सर्वोच्च है। आमेन।

 

संगृहीत प्रार्थना (निवेदन)

हे सर्वशक्तिमान् सदा जीवंत ईश्वर, हमें स्वर्ग के पथ पर ले चल, जहाँ संतों की मण्डली शाश्वत आनंद मनाती है। जहाँ गड़ेरिये ख्रीस्त विराजमान हैं, वहीं उनकी विनम्र रेवड़ भी पहुँचे। यह वर दे, उन्हीं हमारे प्रभु तेरे पुत्र येसु खीस्त के द्वारा, जो तेरे तथा पवित्र आत्मा के संग एक ईश्वर होकर युगानुयुग जीते और राज्य करते हैं।

 

पहला पाठ

(येसु मसीह का धर्म यहूदियों के लिए ही नहीं, बल्कि सबों के लिए है। सन्त पौलुस इस बात पर बहुत बल देते थे और इस कारण कुछ अनुदार यहूदी उन्हें सताते थे।)

प्रेरित- चरित                                13, 14. 43-52

हमें गैर- यहूदियों के पास जाना हैं।”

पौलुस और बरनाबस पेरजे से आगे बढ़ कर पिसिदिया के अंताखिया पहुँचे। वे विश्राम के दिनं सभागृह जा कर बैठ गये। सभा के विसर्जन के बाद बहुत- से यहूदी और भक्त नव- दीक्षित पौलुस और बरनाबस के पीछे हो लिये। पौलुस और बरनाबस ने उनसे बात की और आग्रह किया कि वे ईश्वर की कृपा में दृढ़ बने रहें। अगले विश्राम दिवस नगर के प्रायः सब लोग ईश्वर का वचन सुनने के लिए इकट्ठे हो गये। यहूदी इतनी बड़ी भीड़ देख कर ईर्ष्या से जलने लगे और पौलुस की निन्दा करते हुए उनकी बातों का खण्डन करते रहे। पौलुस और बरनाबस ने निडर हो कर कहा, "यह आवश्यक था कि पहले आप लोगों को ईश्वर का वचन सुनाया जाये, परन्तु आप लोग इसे अस्वीकार करते हैं और अपने को अनन्त जीवन के योग्य नहीं समझते; इसलिए हम अब गैर- यहूदियों के पास जाते हैं। प्रभु ने हमें यह आदेश दिया है, 'मैंने तुम्हें राष्ट्रों की ज्योति बना दिया है, जिससे तुम्हारे द्वारा मुक्ति का संदेश पृथ्वी के सीमान्तों तक फैल जायें।” गैर- यहूदी यह सुन कर आनन्दित हो गये और ईश्वर के वचन की स्तुति करते रहे। जितने लोग अनन्त जीवन के लिए चुने गये थे, उन्होंने विश्वास किया और सारे प्रदेश में प्रभु का वचन फैल गया। किन्तु यहूदियों ने प्रतिष्ठित भक्त महिलाओं तथा नगर के नेताओं को उभाड़ा, पौलुस तथा बरनाबस के विरुद्ध उपद्रव खड़ा कर दिया और उन्हें अपने इलाके से निकाल दिया। पौलुस और बरनाबस उन्हें चेतावनी देने के लिए अपने पैरों की धूल झाड़ कर इकोनिया चले गये। शिष्य आनन्द और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण थे।  

यह प्रभु की वाणी है।

 

भजन स्तोत्र 99: 1-3.5

अनुवाक्य:- हम उसकी प्रजा, उसके चरागाह की भेड़ें हैं।

1. हे समस्त पृथ्वी! प्रभु की स्तुति करो। आनन्द के साथ प्रभु की सेवा करो। उल्लास के गीत गाते हुए उसके सामने उपस्थित हो जाओ।

2. यह जान लो कि वही ईश्वर है। उसी ने हम को बनाया है- हम उसी के हैं। हम उसकी प्रजा, उसके चरागाह की भेड़ें हैं।

3. उसका नाम धन्य कहो, क्योंकि वह भला है। उसका प्रेम चिरस्थायी है, उसकी सत्यप्रतिज्ञता युगानुयुग बनी रहती है।

 

दूसरा पाठ

(हमारे प्रभु येसु हमें जीवन की उस परिपूर्णता की ओर ले जाना चाहते हैं, जहाँ हमें धर्मग्रंथ के अनुसार, "फिर कभी न तो भूख लगेगी और न प्यास" क्योंकि मेमना हमें "संजीवन जल के स्रोतों के पास ले चलेगा।")

प्रकाशना- ग्रंथ                             7: 9.14-17

“मेमना उनका चरवाहा होगा और उन्हें संजीवन जल के स्त्रोतों के पास ले चलेगा।”

मैं- योहन ने सभी प्रजातियों, वंशों, राष्ट्रों और भाषाओं का एक ऐसा विशाल जनसमूह देखा, जिसकी गिनती कोई भी नहीं कर सकता। वे उजले वस्त्र पहने तथा हाथ में खजूर की डालियाँ लिये सिंहासन तथा मेमने के सामने खड़े थे। वयोवृद्धों में से एक ने मुझ से कहा, "ये वे लोग हैं, जो महासंकट में से निकल कर आये हैं। इन्होंने मेमने के रक्त में अपने वस्त्र धोकर उजले कर लिये हैं। इसलिए ये ईश्वर के सिंहासन के सामने खड़े रहते और रात- दिन उसके मंदिर में उसकी सेवा करते हैं। वह, जो सिंहासन पर विराजमान है, इनके साथ निवास करेगा। इन्हें फिर कभी न तो भूख लगेगी और न प्यास, इन्हें न तो धूप से कष्ट होगा और न किसी प्रकार के ताप से, क्योंकि सिंहासन के सामने विद्यमान मेमना इनका चरवाहा होगा और इन्हें संजीवन जल के स्रोतों के पास ले चलेगा और ईश्वर इनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा।"

यह प्रभु की वाणी है।

 

जयघोष        

अल्लेलूया, अल्लेलूया! प्रभु कहते हैं, "भला गड़ेरिया मैं हूँ। मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं।" अल्लेलूया!

 

सुसमाचार

(जिस प्रकार अच्छा गड़ेरिया अपनी भेड़ों की देख- रेख करता है उसी तरह येसु अपने अनुयायियों की रक्षा करते हैं। यदि हम उनकी आवाज पहचान कर उनका अनुसरण करेंगे, तो हम सदा के लिए सुरक्षित रहेंगे।)

सन्त योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार                10: 27-30

“मैं अपनी भेड़ों को अनन्त जीवन प्रदान करता हूँ।”

येसु ने कहा, "मेरी भेड़ें मेरी आवाज़ पहचानती हैं। मैं उन्हें जानता हूँ और वे मेरा अनुसरण करती हैं। मैं उन्हें अनन्त जीवन प्रदान करता हूँ। उनका कभी सर्वनाश नहीं होगा और कोई भी उन्हें मुझ से नहीं छीन सकेगा। मेरे पिता ने मुझे उन्हें दिया है, वह सब से महान् है। कोई भी उन्हें पिता से नहीं छीन सकता। मैं और पिता एक है।"

यह प्रभु का सुसमाचार है।

 

विश्वास घोषणा एवं धर्मसार

मैं सर्वशक्तिमान् पिता -

स्वर्ग और पृथ्वी, सब दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के सृष्टिकर्ता- एक ही ईश्वर में विश्वास करता (करती) हूँ। मैं ईश्वर के इकलौते पुत्र, एक ही प्रभु येसु ख्रीस्त में विश्वास करता (करती) हूँ, जो सभी युगों के पहले पिता से उत्पन्न है। वह ईश्वर से उत्पन्न ईश्वर, प्रकाश से उत्पन्न प्रकाश, सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वर है, वह बनाया हुआ नहीं, बल्कि उत्पन्न हुआ है, वह पिता के साथ एकतत्त्व है; उसी के द्वारा सब कुछ सृष्ट हुआ। वह हम मनुष्यों के लिए और हमारी मुक्ति के लिए स्वर्ग से उतरा और पवित्र आत्मा के द्वारा कुँवारी मरियम से देह धारणकर मनुष्य बना। उसने पोंतुस पिलातुस के समय दुःख भोगा, वह हमारे लिए क्रूस पर ठोंका गया, वह मर गया और दफ़नाया गया

और धर्मग्रंथ के अनुसार तीसरे दिन फिर से जी उठा। वह स्वर्ग में आरोहित हुआ और पिता के दाहिने विराजमान है। वह जीवितों और मृतकों का न्याय करने महिमा के साथ फिर आएगा और उसके राज्य का कभी अंत नहीं होगा। वह प्रभु और जीवनदाता है :  मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता (करती) हूँ, वह पिता और पुत्र से प्रसृत होता है। पिता और पुत्र के साथ उसकी आराधना और महिमा होती है, वह नबियों के मुख से बोला है। मैं एक, पवित्र, काथलिक तथा प्रेरितिक कलीसिया में विश्वास करता (करती) हूँ। मैं पापों की क्षमा के लिए एक ही बपतिस्मा स्वीकार करता (करती) हूँ और मृतकों के पुनरुत्थान तथा अनंत जीवन की बाट जोहता (जोहती) हूँ। आमेन।

 

विश्वासियों के निवेदन

पु० प्रिय भाई- बहनो, हम पिता ईश्वर से प्रार्थना करें कि वह लोगों को पुरोहिताई एवं धर्मसंघी का जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करे और ज्ञानवान तथा समर्पित चरवाहों को अपने रेवड़ की देख भाल करने के लिए चुने। हम अपनी अन्य आवश्यकताओं के लिए भी प्रार्थना करें और कहें:

सबः हे पिता हमारी प्रार्थना सुन।

1. कलीसिया के चरवाहे अपने जीवन और कार्य द्वारा अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करें और ख्रीस्त के रेवड़ की देख- रेख अच्छी तरह करें। ईश्वर उन्हें सांसारिक प्रलोभनों से बचाए रखे ताकि वे एक मन और एक हृदय से उसकी सेवा कर सकें। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

2. जो लोग सांसारिक प्रलोभनों में पड़कर खीस्त के रेवड़ से अलग हो गये हैं और दर- दर भटक रहे हैं। वे ईश्वर की कृपा प्राप्त कर येसु के पास वापस लौट आएँ। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

3. सभी किसानों को ईश्वर की अपार कृपा मिले। ईश्वर सही समय पर अच्छी वृष्टि भेजे, ताकि वे अपने खेतों में अच्छी फसल पैदा कर सकें। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

4. देश के नेतागण हर तरह के आपसी झगड़े को समाप्त करने में सक्षम हों और धनी देश गरीब देशों की सहायता करने में पूर्ण योगदान दे सकें। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

5. यहाँ उपस्थित हम लोगों में से कुछ लोग हताशा का जीवन जी रहे हैं। वे भले गड़ेरिये येसु की आवाज़ सुनें और उनके बताये मार्ग पर चलने का प्रयास करें, जिससे उनका जीवन आनंदमय बन जाए। इसके लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

(निजी प्रार्थनाएँ)

पु०: हे पिता, तू अपने रेवड़ की देख- भाल करने के लिए समर्पित चरवाहों को भेजता है। इसके लिए हम तुझे धन्यवाद देते हैं। तू उनकी रक्षा कर, उन्हें सब प्रकार की बुरी ताकतों से बचाए रख और सांसारिक प्रलोभनों से दूर रख। हम यह प्रार्थना करते हैं, प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

अर्पण -प्रार्थना

 हे प्रभु, तेरी कृपा से हम इस पास्का संस्कार में सदा आनंद मनाते रहें। प्रायश्चित का जो बलिदान हम निरंतर चढ़ाते हैं, वह हमारे लिए अनंत आनंद का स्रोत बन जाये। हम यह प्रार्थना करते हैं, अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा।  

 

पास्का की अवतरणिका 1

पास्का रहस्य

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा- सर्वदा और विशेष करके (इस रात में / इस दिन / इस अवसर पर) अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब खीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। ये ही हैं सच्चा मेमना, जिन्होंने संसार का पाप हर लिया है; इन्होंने मृत्यु सहकर हमारी मृत्यु नष्ट कर दी और पुनर्जीवित होकर हमें नवजीवन प्रदान किया है। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! ....

 

पास्का की अवतरणिका 2

खीस्त में नया जीवन

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब खीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। इन्हीं के द्वारा अनंत जीवन के लिए ज्योति की संतान उत्पन्न होते और विश्वासियों के लिए स्वर्गराज्य के प्रांगण खुल जाते हैं, क्योंकि इनकी मृत्यु द्वारा हम मृत्यु से मुक्त हुए हैं। और इनके पुनरुत्थान द्वारा हम पुनर्जीवित हुए हैं। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

पास्का की अवतरणिका 3

पुनर्जीवित ख्रीस्त सदा हमारे मध्यस्थ

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु , यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब खीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। ये हमारे लिए स्वयं को सदा बलि चढ़ाते हैं और निरंतर तेरे सम्मुख हमारे पक्ष में आग्रह करते हैं: ये ही हैं वह यज्ञ- बलि, जो अब फिर कभी नहीं मरते; वह मेमना, जो एक बार बलि चढ़ाये गये, परन्तु अब अनंत काल तक जीवित रहते हैं। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

पास्का की अवतरणिका 4

पास्का रहस्य द्वारा सम्पूर्ण सृष्टि का पुनर्निर्माण

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा- सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। क्योंकि पुरानी पद्धति नष्ट होने के साथ पतित विश्व का नवनिर्माण हुआ और ख्रीस्त में हमें जीवन की पूर्णता प्राप्त हुई है। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

पास्का की अवतरणिका 5

खीस्त: याजक और बलि

पु०: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा- सर्वदा और विशेष करके इस अवसर पर अधिक गौरव के साथ तेरा गुणगान करें, जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना बलि चढ़ाये गये हैं। अपना शरीर अर्पित करके इन्होंने प्राचीन बलिदानों को क्रूस के बलिदान में पूर्ण बनाया और स्वयं पुरोहित, वेदी और बलि का मेमना बनकर हमारी मुक्ति के लिए स्वयं को तुझे समर्पित किया। इसलिए, पास्का के आनंद से विभोर होकर हर देश और जाति के लोग तेरी प्रशंसा में उल्लसित होते और स्वर्गिक शक्तियाँ दूतों की सेनाओं के साथ मिलकर निरंतर तेरी महिमा का बखान करती हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना! धन्य हैं वे, जो प्रभु के नाम पर आते हैं। सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना!

 

कम्यूनियन अग्रस्तव  

भले गड़ेरिये खीस्त जी उठे हैं। उन्होंने अपने रेवड़ के लिए अपने प्राण अर्पित कर दिये। अल्लेलूया!

 

कम्यूनियन के बाद प्रार्थना

हे दयालु गड़ेरिये, जिस रेवड़ को तूने अपने पुत्र के मूल्यवान रक्त से मुक्त किया है, उसे सुरक्षित रख और अनंत चरागाह की ओर ले चल। उन्हीं हमारे प्रभु खीस्त के द्वारा।

 

समारोही आशीष

ईश्वर ने अपने इकलौते पुत्र के पुनरुत्थान द्वारा आप लोगों का उद्धार करके आपको दत्तक संतान बना लिया है, वही आपलोगों को आनंद का वरदान दे।

सब: आमेन।

मुक्तिदाता ख्रीस्त ने आपलोगों को चिरस्थायी स्वतंत्रता दी है, वही आपलोगों को अनंत जीवन का उत्तराधिकारी बनाये।

सब: आमेन।

आपलोग बपतिस्मा में विश्वास द्वारा ख्रीस्त के साथ जी उठे हैं, इसलिए इस पृथ्वी पर आदर्श जीवन बिताकर उनके राज्य में सदा- सर्वदा विराजें।

सब: आमेन। सर्वशक्तिमान् ईश्वर, पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा का आशीर्वाद आपलोगों पर उतरे और सदा बना रहे।

सब: आमेन।

 

 

1. Homily / Sermon

परिचय:

पास्का का चौथा रविवार, जिसे भला चरवाहा रविवार के रूप में जाना जाता है, "बुलाहट के लिए प्रार्थना का विश्व दिवस" भी है। इस दिन के लिए पवित्रशास्त्र के पाठ कलीसिया में ईश्वर के झुंड के चरवाहों की भूमिका से संबंधित हैं। प्रत्येक वर्ष इस रविवार को, हम भले चरवाहे के रूप में येसु की छवि पर चिंतन करते हैं जो निष्ठापूर्वक और कृपापूर्वक अपने झुंड की देखभाल करते हैं। एक पुरोहित ने हाल ही में मजाक में यह टिप्पणी की कि कुछ लोग सोचते हैं कि उनका पुरोहित रविवार को ही काम करता है! यह स्पष्ट रूप से असत्य है। वास्तव में ईश्वर एक पुरोहित को क्या जिम्मेदारियां देते हैं और ईश्वर उनसे पवित्र मिस्सा और उपदेश देने के अलावा क्या उम्मीद करते हैं? प्रश्न का उत्तर "पुरोहित" शीर्षक में है, जिसका अर्थ है चरवाहा। एक चरवाहा अपने झुंड की अगुवाई करता है, उन्हें खिलाता है, पोषण करता है, आराम देता है, सुधारता है, और उसकी रक्षा करता है—जिम्मेदारियाँ जो हर कलीसिया के अगुवे की होती हैं उन्हें निभाता है। सबसे पहले ईसाइयों ने येसु को अच्छे चरवाहे के प्राचीन यहूदी सपने की पूर्ति के रूप में देखा, जो अन्यजातियों को भी ईश्वर के झुंड के हिस्से के रूप में शामिल करना चाहता था। आज का पहला पाठ वर्णन करता है कि कैसे पौलुस और बरनाबस ने भले चरवाहे येसु की आवाज़ को सुनने और उसका अनुसरण करने का विकल्प चुना, और कैसे, अपने स्वामी की तरह, जब उन्होंने उद्धार के सुसमाचार को साझा करने का प्रयास किया, तो उन्हें झिड़क दिया गया और अस्वीकार कर दिया गया। इससे यह भी पता चलता है कि अन्यजातियों के लिए प्रारंभिक ईसाइयों की सहानुभूति यहूदी धर्म के साथ टूटने का कारण बनी। आज का अंतर भजन (भजन 100) हमें याद दिलाता है कि "...प्रभु ही ईश्वर है: उसने हमें बनाया, हम अपने हैं - उसके लोग, वह झुंड जिसकी वह देखभाल करता है।" प्रकाशना ग्रन्थ से लिया गया दूसरा पाठ, येसु को महिमामंडित मेमने और चरवाहे दोनों के रूप में दर्शाता है। संत योहन का दर्शन उनके पाठकों को इस आश्वासन के साथ प्रोत्साहित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति जिसने कभी मसीह का अनुसरण किया है और दूसरों को उसके पास ले गया है और जिसने अस्वीकृति और उत्पीड़न का सामना किया है, वह भी जीत के अनंत आनंद को जानेगा और अनंत जीवन में भाग लेगा। सुसमाचार हमें दिलासा और एक बड़ी चुनौती दोनों प्रदान करता है। दिलासा देने वाला संदेश यह है कि कोई भी पिता के हाथों से भेड़ों को नहीं छीन सकता। चुनौती यह है कि पुरोहितों को उन लोगों के लिए अच्छा चरवाहा होना चाहिए जिन्हें उनकी देखभाल के लिए सौंपा गया है। और उनका झुंड, सामान्य जन, अच्छी भेड़ें, आज्ञाकारी और अपने चरवाहों के लिए सहायक होना चाहिए।

 

पहला पाठ: प्रेरित चरित 13:14, 43-52:

पौलुस और बरनाबस एशिया माइनर (वर्तमान तुर्की) की अपनी पहली मिशनरी यात्रा पर थे। विश्राम के दिन, पौलुस और बरनाबस पिसिदिया के अन्ताकिया में सभागृह में गए, जहाँ उन्हें लोगों को उपदेश देने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने समझाया कि चूंकि मसीह को यहूदियों ने अस्वीकार कर दिया था, इसलिए ईसाई सभी राष्ट्रों को सुसमाचार प्रचार करने के लिए बाध्य थे, इस प्रकार ईसाई धर्म के सार्वभौमिक मिशन पर जोर दिया। दूसरे शब्दों में, चूँकि यहूदियों ने ईश्वर के वचन को अस्वीकार कर दिया था, इसलिए इसे अन्यजातियों को चढ़ाया जा रहा था। लेकिन अन्ताकिया में वे यहूदी जिन्होंने अन्यजातियों को प्रचार करने के विचार का विरोध किया, प्रेरितों को उनके क्षेत्र से निकालने के लिए पर्याप्त समर्थन एकत्र किया। फिर भी, पौलुस और बरनाबस उस सुसमाचार के प्रति वफ़ादार रहे जिसे येसु ने प्रकट किया था। वे "आनन्द और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए" और अन्यजातियों को प्रचार करना जारी रखा जिन्होंने उनका स्वागत प्रसन्नता से किया। कलीसिया का मिशन वास्तव में येसु द्वारा शुरू किए गए पापों से मुक्ति के कार्य की निरंतरता है। क्या सुसमाचार का बीज अभी भी पृथ्वी की छोर तक बोया जा रहा है? क्या गरीब, अंधे, बहरे, लंगड़े, भूखे, प्यासे, खोए हुए और कैदी अभी भी हमारी सेवा का प्राथमिक केंद्र बिंदु हैं?

 

दूसरा पाठ: प्रकाशना ग्रन्थ 7:9, 14-17:

प्रकाशना ग्रन्थ जो दर्शन येसु ने प्रचारक संत योहन को दिया था, जिसे न केवल पहली शताब्दी में बल्कि सभी शताब्दियों में सताए गए ईसाइयों को निर्देश देने और प्रोत्साहित करने के लिए लिखा जाना था। दर्शन मारे गए येसु और महिमामंडित मेमने और भले चरवाहे दोनों के रूप में प्रस्तुत करता है। बाद की भूमिका में, वह अपने झुंड की रक्षा करता है और जब वे उत्पीड़न का शिकार होते हैं तब उसे तरोताजा करता है। संत योहन के पास भले चरवाहे द्वारा बचाए गए “हर एक राष्ट्र, जाति, लोग और भाषा" सभी भेड़ों का एक दर्शन है, जो सार्वभौमिक कलीसिया का प्रतिनिधित्व करता है। मेमना उन लोगों का चरवाहा और आश्रय है, जो उसकी मदद से जीत हासिल करते हैं। वह उन्हें अच्छी तरह खिलाएगा और “उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा।” दृष्टि का सार यह है कि मसीह, देहधारी जीवित ईश्वर के पुत्र, जो अब मरे हुओं में से जी उठे हैं, महिमामंडित हैं, उनकी महिमामयी मानवता में स्वर्ग में मुख्य स्थान होगा और सभी तर्कसंगत प्राणी हमेशा के लिए उनकी स्तुति गाएंगे। संत योहन के दर्शन ने अपने पाठकों से वादा किया था कि येसु, फसह का मेम्ना, उनकी देखभाल करेगा, उन्हें आश्रय, सुरक्षा, और अनंत काल के जीवन देने वाले जल के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा।

 

सुसमाचार व्याख्या:

संदर्भ: यह दिसंबर, सर्दियों का समय था, शायद यहूदी हनुक्का उत्सव (समर्पण का पर्व) का समय था, जिसने 165 ईसा पूर्व में सीरियाई नेता एंटिओकस IV एपिफेन्स पर यहूदी कमांडर जूडस मैकाबियस की विजय का स्मरण किया था। येसु मंदिर में पूर्व की ओर चल रहे थे, जो रेगिस्तान से आने वाली ठंडी हवाओं से सुरक्षा प्रदान करता था। यहूदी उसके चारों ओर जमा हो गए थे। वे निश्चित नहीं थे कि वह प्रतिज्ञा किये गए मसीहा थे या नहीं क्योंकि उन दिनों ऐसे बहुत से भटकने वाले प्रचारक और चंगा करने वाले मौजूद थे। इसलिए, उन्होंने सीधे उससे पूछा कि क्या वह मसीह है। उन्हें समान रूप से सीधा जवाब देने के बजाय, येसु ने दावा किया कि वह भला चरवाहा है और उन्हें अपनी भूमिका के बारे में बताया।

पुराने नियम में चरवाहे: पुराने नियम में, चरवाहे की छवि अक्सर ईश्वर के साथ-साथ लोगों के नेताओं पर भी लागू होती है। निर्गमन ग्रन्थ एक चरवाहे के रूप में कई बार यहोवा का प्रतिनिधित्व करती है। भविष्यवक्ताओं इसायाह और एज़ेकिएल ने यहोवा की देखभाल और अपने लोगों की सुरक्षा की तुलना एक चरवाहे से की। "वह गड़ेरिये की तरह अपना रेवड़ चराता है। वह मेमने को उठा कर अपनी छाती से लगा लेता और दूध पिलाने वाली भेडें धीरे-धीरे ले चलता है।" (इसायाह 40:11)। एज़ेकिएल एक प्रेममय चरवाहे के रूप में ईश्वर का प्रतिनिधित्व करता है जो खोई हुई भेड़ की खोज करता है। दाऊद का भजन 23, भला चरवाहा के रूप में ईश्वर का प्रसिद्ध चित्र है: "प्रभु मेरा चरवाहा है, मुझे किसी बात की कमी नहीं। वह मुझे हरे मैदानों में बैठाता और शान्त जल के पास ले जा कर मुझ में नवजीवन का संचार करता है। अपने नाम के अनुरूप वह मुझे धर्ममार्ग पर ले चलता है।" भविष्यवक्ताओं ने अक्सर अपने समय के स्वार्थी और कपटी चरवाहों (या नेताओं) को डांटने के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया। यिरमियाह 23:1: "धिक्कार उन चरवाहों को जो मेरे चरागाह की भेड़ों को नष्ट और तितर-बितर हो जाने देते हैं!" एज़ेकिएल 34:2: “धिक्कार इस्राएल के चरवाहों को! वे केवल अपनी देखभाल करते हैं। क्या चरवाहों को झुुण्ड की देखवाल नहीं करनी चाहिए।”

नए विधान में भला चरवाहा: अपने झुंड के भले चरवाहे के रूप में अपना परिचय देते हुए, येसु आज के सुसमाचार में तीन दावे करते है।

1) वह जानता है कि उसकी भेड़ें उसकी आवाज सुनती हैं: जैसे फिलीस्तीनी चरवाहे अपने झुंड की प्रत्येक भेड़ को नाम से जानते थे, और भेड़ें अपने चरवाहे और उसकी आवाज को जानती थीं, उसी तरह येसु हम में से हर एक को, हमारी जरूरतों को, हमारी खूबियों और हमारे दोष को जानता है। वह हमें वैसे ही प्यार करता है जैसे हम हैं, हमारी सारी कमियों के साथ वह हमें अपनाता है और वह उम्मीद करता है कि हम उसके शब्दों को रखते हुए उसका प्यार लौटाएंगे। वह हर सभा में, बाइबल के माध्यम से, हमारे पुरोहितों के माध्यम से, हमारे माता-पिता के माध्यम से, हमारे दोस्तों के माध्यम से, और हमारे जीवन की घटनाओं के माध्यम से हमसे बात करता है।

2) वह हमें, उसकी भेड़ों को अपनी भेड़शाला में ग्रहण करके और हमें बपतिस्मा के माध्यम से विश्वास देकर अनन्त जीवन देता है, और फिर वह उस विश्वास को पुष्टि में मजबूत करता है। वह पवित्र युख्रीस्त में और पवित्र बाइबल के दिव्य शब्दों में हमारी आत्माओं के लिए भोजन की आपूर्ति करता है। वह हमारे समाज को वैवाहिक संस्कारों और पुरोहिताई के द्वारा पवित्र बनाता है।

3) वह अपनी भेड़ों को अपने सर्वशक्तिमान पिता के प्रेममय हाथों में रखकर उनकी रक्षा करता है। उसके बिना हमारा मार्गदर्शन करने और हमारी रक्षा करने के लिए, हम इस दुनिया के आध्यात्मिक भेड़ियों के लिए आसान शिकार हैं, जिसमें शैतान और उसके सेवक भी शामिल हैं। संत योहन के सुसमाचार के दसवें अध्याय में, येसु भले चरवाहे की भूमिकाओं में दो और भूमिकाएँ जोड़ता है। वह भटके हुए मेमनों की तलाश में जाता है और बीमारों को चंगा करता है। येसु हमारी आत्मा के घावों को मेल मिलाप के संस्कार के माध्यम से ठीक करते हैं और हमें बीमारी और बुढ़ापे में बीमारों के अभिषेक के संस्कार के साथ मजबूत करते हैं।

येसु अपनी भेड़ों के लिए अपने प्राण अर्पित करता है: जैसे प्राचीन दिनों के चरवाहों ने अपनी भेड़ों को जंगली जानवरों और चोरों से अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया, उसी तरह येसु सभी लोगों के पापों के प्रायश्चित में मर गए। आज के सुसमाचार के माध्यम से, येसु सहायक पौरोहित्य के केंद्रीय पहलुओं में से एक को सिखाते हैं: एक चरवाहे के रूप में याजक। इसका अर्थ है कि एक पुरोहित वह है जो अपने अभिषेक से, दूसरों के लिए रहता है। शीर्षक, "पिता", शीर्षक की तरह, "चरवाहा", सबसे पवित्र मिशन से लेकर सबसे तुच्छ कामों तक, हर चीज में दूसरों के लिए प्रेमपूर्ण सेवा के संबंध को व्यक्त करता है।

 

बुलाहट के लिए प्रार्थना का विश्व दिवस।

आज "बुलाहट के लिए विश्व प्रार्थना दिवस" भी है। यह एक ऐसा दिन है जब ईसाइयों को ईश्वर के आह्वान के अर्थ पर चिंतन करने और प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया जाता है कि वे एक विशेष तरीके से कलीसिया की सेवा करने के लिए अपना जीवन समर्पित करने के आह्वान का जवाब दे सकें। कलीसिया आज के सुसमाचार में हमारे सामने भला चरवाहा येसु का चित्र प्रस्तुत करती है ताकि हम पौरोहित्य, डायकोनेट और पवित्र जीवन के धार्मिक बुलाहट के अर्थ पर विचार कर सकें। पिछले रविवार को हमने अपने प्रभु के आदेश और पेत्रुस को दी गई आज्ञा "मेरे मेमनों को चराओ," पर विचार किया। इस तरह उसने पेत्रुस को एक चरवाहा, एक पुरोहित बनाया। हमारे प्रभु ने पेत्रुस और उसके सहकर्मियों: प्रेरितों और शिष्यों, और उनके उत्तराधिकारियों: पोप, बिशप, पुरोहित, डीकन, कैटेचिस्ट, और समर्पित लोगों के माध्यम से अपने लोगों की चरवाही करने का अपना काम जारी रखा है। पहली बात जो हमें याद रखने की जरूरत है वह यह है कि यहां हर एक व्यक्ति की अपनी बुलाहट है! यहां प्रत्येक व्यक्ति, जीवन में किसी की भी स्थिति, और शेष समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए अपने विशेष उपहार देने के लिए पवित्र आत्मा के माध्यम से ईश्वर द्वारा बुलाया गया है। इसलिए, "बुलाहट रविवार" केवल कुछ चुनिंदा धार्मिक बुलाहटों के लिए नहीं है, यह यहां हम सभी के लिए है। एक ओर, प्रत्येक को इस बात पर चिंतन करने की आवश्यकता है कि किसी की विशेष बुलाहट क्या है और पूरे पल्ली समुदाय की भलाई के लिए कोई इसका जवाब कैसे दे सकता है। दूसरे, किसी को दूसरों की मदद करने की ज़रूरत है, और उनके लिए बाधा नहीं बनना चाहिए क्योंकि वे उस विशेष बुलाहट और अनुग्रह का जवाब देते हैं जो ईश्वर अपनी आत्मा के माध्यम से दे रहे हैं। अगर हम सभी उस बुलाहट का सक्रिय रूप से जवाब देंगे, तो हम कितने अद्भुत समुदाय होंगे! क्योंकि, “हम उसकी प्रजा, उसके झुण्ड की भेड़ें हैं।”

 

जीवन संदेश:

आइए हम अच्छे चरवाहे और अच्छी भेड़, अच्छे नेता और अच्छे अनुयायी बनें।

1) आइए हम अच्छे चरवाहे बनें: हर कोई जिसे दूसरों की देखभाल सौंपी जाती है, वह एक चरवाहा होता है। इसलिए, पुरोहित, माता-पिता, शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, सरकारी अधिकारी आदि सभी चरवाहे हैं। हमें सौंपे गए लोगों से प्यार करने, उनके लिए प्रार्थना करने, उनके कल्याण के लिए अपना समय और प्रतिभा खर्च करने और उन्हें शारीरिक और आध्यात्मिक खतरों से बचाने के द्वारा हम अच्छे चरवाहे बन जाते हैं। माता-पिता को अपने कर्तव्यों के प्रति विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए, इस प्रकार अपने बच्चों को पति और पत्नी और माता-पिता के रूप में अपने ईसाई जीवन जीने के तरीके के माध्यम से एक अच्छा उदाहरण देना चाहिए।

2) आइए हम भले चरवाहे येसु के झुंड में अच्छी भेड़ बनें: हमारा स्थानीय पल्ली हमारी भेड़शाला है, और हमारे पुरोहित हमारे चरवाहे हैं। येसु महायाजक हैं, बिशप प्रेरितों के उत्तराधिकारी हैं, पुरोहित, उनके डीकनों की सहायता से, उनके सहायक हैं और पल्लीवासी भेड़ हैं। इसलिए, पल्ली की अच्छी भेड़ के रूप में, पल्लीवासियों से अपेक्षा की जाती है:-

क) अपने चरवाहों की आवाज उनके घरों, धर्मशिक्षा कक्षाओं, परामर्श और सलाह के माध्यम से सुनें और उनका पालन करें;

बी) हमारे पुरोहित पवित्र मिस्सा में नियमित भागीदारी, संस्कारों की बारंबारता, और प्रार्थना सेवाओं, नवीनीकरण कार्यक्रमों और मिशनों में भाग लेने के द्वारा प्रदान किए गए आध्यात्मिक भोजन प्राप्त करते हैं;

ग) हमारे पुरोहितों को पल्ली के कल्याण के लिए सकारात्मक सुझाव देकर, उन्हें उनके कर्तव्यों में प्रोत्साहित करके, प्यार से उन्हें रचनात्मक आलोचना की पेशकश करते हुए, जब वे दुर्व्यवहार करते हैं या अपने कर्तव्यों में असफल होते हैं, हमेशा उनके लिए प्रार्थना करके और जरूरत पड़ने पर उन्हें क्षमा करते हुए उनके साथ सहयोग करते हैं।

d) विभिन्न परिषदों, मंत्रालयों और पल्ली संघों की गतिविधियों में हमारे साथी पल्लीवासियों के साथ सहयोग करें।

3) आइए हम उन सभी बुलाहटों के लिए उदार प्रतिक्रियाओं के लिए प्रार्थना करें जो ईश्वर पुरुषों को पौरोहित्य, डिकनेट, मिशन क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिए प्रदान करता है, और सभी बुलाहट ईश्वर पुरुषों और महिलाओं दोनों को पवित्र जीवन में प्रवेश करने की पेशकश करते हैं, ताकि हम और अधिक अच्छे हो सकें। आइए हम याद रखें कि बुलाहटों को बढ़ावा देने का कर्तव्य पूरे विश्वास करने वाले समुदाय की चिंता है, और हम मुख्य रूप से अनुकरणीय ईसाई जीवन जीने के द्वारा उस जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं। माता-पिता ठोस ईसाई मूल्यों के आधार पर घरों में ईश्वर-केंद्रित वातावरण बनाकर बुलाहट को बढ़ावा देते हैं। उन्हें अपने बच्चों के साथ पारिवारिक प्रार्थना के दौरान बुलाहट के लिए प्रार्थना करनी चाहिए और ईश्वर के इन सेवकों की आलोचना करने के बजाय अपने पुरोहितों, मिशनरियों और धार्मिक लोगों के बारे में उत्साहजनक शब्द बोलना चाहिए। परिवार में ऐसा माहौल निश्चित रूप से ऐसे परिवारों की बुलाहट को बढ़ावा देगा। सेमिनरियों की वित्तीय सहायता भी बुलाहटों को बढ़ावा देने में एक सकारात्मक योगदान है।

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