पवित्र सप्ताह : सोमवार

पवित्र सप्ताह: सोमवार

जय येसु की। ख्रीस्त में प्यारे भाइयों और बहनों। आज पवित्र सप्ताह का सोमवार है। आज के पहले पाठ में नबी इसयाह का ग्रन्थ हमें Suffering Servant याने दुखित सेवक जो Babylon में निर्वासित जीवन जी रहा था। प्रभु येसु ख्रीस्त के जन्म के करीब 600 वर्ष पूर्व Babylon के राजा नेबुकतनेज़र येरूसालेम में प्रवेश किया, मंदिर और शहर का सर्वनाश किया और यहूदी समाज के लोगों को निर्वासन में ले लिया। इस्रायेल के इतिहास में इस महत्वपूर्ण घड़ी में ईश्वर अपने सेवक इसयाह को लोगों के बीच में रहने का, उन्हें सांत्वना और ढ़ाढस देने को अवसर देता है।

ईश्वर के इस दुःखित सेवक का दो मूल गुण है: नम्रत्रा और आज्ञाकारिता। वह सेवक ईश्वर का ज्ञानी है । वह ईश्वर की सभी योजनाओं का पूरा करने में तत्पर है। जब हम पवित्र बाईबल को पढ़ते हैं और गृहराई से जरूर हम अनुभव करेगे कि इस सेवक के बारे में जो कही गई सभी बाते प्रभु येसु मसीह में पूरी हो जाती है। शायद यही कारण है कि माता कलीसिया पवित्र सप्ताह के दौरान इन पाठों को निधारित करता है। हम यह भी महसूस करते हैं कि मुक्ति का संदेश न केवल इस्राएलियों के लिए परन्तु सभी राष्ट्रों के लिए है। येसु मसीह न केवल यहूदी लोगों का मसीह है परन्तु सभी राष्ट्रों का है। वास्तव में यहूदियों ने येसु का अस्वीकार कर दिया था जबकि गैर- यहूदियों ने उन्हें अपना एकमात्र उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया है।

आज के सुसमाचार में हम उस घटना के बारे में पढ़ते है जो पास्का त्यौहार के छह दिन पहले प्रभु के जीवन में घटी थी। यह घटना क्या है? किस प्रकार यह घटना प्रभु के दु: खभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान को मनाने के लिए किस प्रकार तैयार करता है?

बेथानिया के लाज़रूस और उसकी बहनें मरथा और मरिया, प्रभु को भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं। मरथा, येसु और लाज़रूस की सेवा सत्कार में व्यस्थित थी जबकि मरिया भोजनकक्ष से प्रवेश करती है। पास्का भोज के कुछ दिन पहले बेथानिया के लाज़रूस के घर का भोजन उस भोजन को संकेत है जो स्वयं प्रभु येसु अपने शिष्यों के संग येरूसालेम में मनाये थे। जैसे मरिया अंदर आती है वह अपने हाथों में बहुमूल्य आधा सेर जरामांसी का बहुमूल्य देल लेके आती है प्रभु के चरणों का विलेपन करती है। और अपने केशें से उनके चरणों को पौंछती है। संत योहन लिखते है कि इसकी सुगन्ध से सारा घर महक गया। शायद सब उस महक की खुशी में थे। परन्तु यूदस इस्कारियोथी की प्रतिक्रिया कुछ अजीब था। और उसकी असली पहचान का इसे पता चलता है। उसके शुद्ध गरिबों के पूर्ति इसूक प्यार और चिन्ता को नहीं परन्तु पैसे के लालच का प्रकट करती है। अपने गुरूवर के प्रति कोई भक्ति नहीं है। पापी स्त्री के लिए कर्ज सम्मान कहीं है जो अपने पापों के लिए प्रायश्चित कर रही है।

प्रभु येसु यह भविष्यवाणी करते है कि यह स्त्री प्रभु के शरीर को दफनाने की क्रिया की तैयारी में कर रही है। बाद में पता चलता है कि Good Friday के दिन जब येसु की मृत्यु हुई तब बहुत देर चुकी थी कि दफन की तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं थी। इसलिए मरिया अभी से प्रभु येसु के पैरों का अभिषेक कर रही है।

प्रभु येसु का भोजन और मरिया का शिष्यता की क्रिया ये दोनों घटनाये हमें एक ठोस संदेश दे रही है कि संयोग से कुछ नहीं होता है। ईश्वर के पास हम सभी के लिए एक निश्चित योजना है। ईश्वर ने ही अपने इकलौते पुत्र येसु को लिए अपनी योजना तैयार की है। यूदस इसकारीयोती बहुत चिंतीत था कि पापी स्त्री प्रभु येसु के पाँव अभिषेक करने के लिए मंहगे इत्र का उपयोग किया। इस का दाम 300 दीनार। एक दीनार एक दिन की मजदूरी थी। अगर एक आदमी मजदूरी 500 रूपये कमाता है। एक साल में एक व्यक्ति 1,62,500 कमा सकता है। इतना पैसा खर्चा करके अगर कोई इत्र खरीदे तो दुनियावाले जरूर कहेगे। लेकिन मरिया ने प्रभु येसु को इतना प्यार किया कि प्यार की तुलना में पैसा कुछ नहीं था। शायद यह समय है कि हम अपने आपसे एक प्रश्न पूछ सकते हैं।

1. क्या मैं भी अपने प्रभु ईश्वर के लिए तन, मन और धन से प्यार करने के लिए तैयार हूँ?

2. यदि हम मानते है कि ईश्वर हर एक व्यक्ति में निवास करता है तो वह निश्चित रूप से हमारे सामने आने वाले हर गरीब में भी रहता है। किसी जरूरमंद व्यक्ति को एक छोटी सी सहायता देना स्वयं प्रभु येसु की सेवा करने की बराबर है। प्रभु ने खुद कहा था कि गरीब हमारे साथ हमेशा है। अगर ये सच से तो यह भी सच होना चाहिए कि हर गरीब में प्रभु येसु मौजूद है।

 

तो आईये हम तीन मुख्य बिन्धुओं पर मनन- चिंतन करेंगे।

 

1. चाहे पारिवारिक जीवन हो या धार्मिक जीवन, विनम्रता और आज्ञाकारिता हमेशा ईश्वर की आशिष और कृपा का साधन बन जाता हैं।

2. प्रभु के करीब आने और अपने पापों के लिए पश्चाताप करने के लिए नये तरीके खोजने होगें।

3. जो भी प्यार हम गरीबों और जरूरतमंदों के लिए रखते है वह प्यार हम प्रभु येसु के लिए ही रखते हैं।

 

तो आईये हम प्रर्थाना करे कि ईश्वर हमें हमेशा अपने करीब रखें खासकर के इस पवित्र सप्ताह के दौरान ताकी हम प्रभु येसु के दु: खभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान के रहस्य के गहराई से भाग ले। आमेन।

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