पवित्र सप्ताह: मंगलवार

पवित्र सप्ताह: मंगलवार

 

जय येसु की। ख्रीस्त में प्यारे भाइयों और बहनों।

आज पवित्र सप्ताह का मंगलवार है। पवित्र बाइबल के विद्धवानों का मानना है कि आज से 2000 वर्ष के पहले आज के दिन येरूसालेम के मंदिर में थे। वहाँ बैठे थे जहाँ लोग आकर अपना- अपना दान देते हैं। यह इस अवसर पर है कि येसु इस गरीब विधवा की भेंट पर ध्यान दिया जिसने येसु मसीह स्वयं को क्रूस पर चढ़ाये जाने को पूर्वभास दिया। गरीब विधवा ने अपना सब कुछ दे दिया। जबकि येसु बिना किसी तकलिफ Good Friday के दिन अपने आप को कुर्बनी करेगा। प्रभु येस और गरीब विधवा दोनों ने ईश्वर कर अपना भरोसा व्यक्त किया और अपने जीवन में ईश्वर की इच्छा को पूरा किया।

आइये भाइयो और बहनों, अभी हम आज के ईश्वचन पर मनन- चिंतन करेंगे। आज के पहले पाठ में हमें चार मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डालेगे। सब से पहले मुद्दा यह है कि इसायाह नबी के बुलाहट के बारे में हमने सुना। वह सेवक जिस के हम Suffering Servant याने दुःखक्ति व्यक्ति कहते हैं। दूसरा बिन्दु वह है कि ईश्वर दुखित सेवक के द्वारा ईश्वर की महीमा होगो जैसे हमने कल सुना था जैसे आज भी हम समझ सकते हैं कि यह दुखित सेवक नहीं इसायाह हो सकता है या प्रभु येसु। इब्रानियों के नाम लिखे पत्र 1: 3 में हम पढ़ते हैं "वह पुत्र अपने पिता की महिमा का प्रतिबिम्ब और उसके तत्व का प्रतिरूप है। वह पुत्र अपने शक्तिशाली शब्द द्वारा समस्त सृष्टि को बनाये रखता है। उसने हमारे पापों को प्रायश्चित किया और अब वह सर्वशक्तिमान ईश्वर के दाहिने विराजमान है।

आज के संदर्भ में वास्तव में बपतिस्मा प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर के लिए जीना जरूरी है और अपने जीवन में ईश्वर की महिमा प्रकट करना आवश्यक है। जैसे संत पौलुस रोमियों के लिखे पत्र 14 : 7- 8 में कहते है "हम में कोई न तो अपने लिए जीता है और न अपने लिए मरता है। यदि हम जीते रहते हैं तो प्रभु के लिए जीते हैं और यदि मरते हैं तो प्रभु के लिए परते हैं। इस प्रकार हम चाहे जीते रहें या मर जाये, हम प्रभु के ही हैं। फिर से संत पौलुस गलातियों के पत्र 2:20 में कहते हैं: “अब जीवित नहीं रहा बल्कि मसीह मुझ में जीवित है।"

हमारे मनन- चिंतन के तीसरा बिन्दु है: नबी का यह लगता है कि उसने व्यर्थ परिश्रम किया है और उसने अपने आपको व्यर्थ में समाप्त कर लिया है। जी हाँ प्यारे भाइयों और बहनों, हम सब, अपने जीवन में कई बार निराशा महसूस करते हैं। जरूर हम सब आंतिरक और व्यवारिक परिस्थियों के कारण धार्मिक, आर्थिक और राजनितिक सदर्ग के कारण मुश्किलों का सामना करते हैं। यह देखकर खुशी होती है कि नबी यह स्वीकार करता है कि जब वह साहसपूर्वक सभी कठिनाइयों को सामना करेगा तो ईश्वर उसे पूर्वसाकृत करेंगा और उसका सम्मान करेगा। यदि नबी को लगता है कि वह कुछ न अपना कर्तव्य का बखूबी निभा रहा है और कुए में मेंडकी तरह काफी खुशी का अनुभव कर रहा है तो ईश्वर नबी को यह याद दिलाते हैं कि यह पर्याप्त नहीं है कि एक नबी अपने ही लोगों को बहाल करें और याकूब और इस्राएल के बचे हुए लोगों को वापस लायें। परन्तु एक नबी को राष्ट्रों की दीपक बनना है कि ईश्वर का उद्धार पृथ्वी के कोने- कोने तक पहुँच सके। इस प्रकार, ईश्वर यह स्थापित करते है कि ईश्वर न सिर्फ इस्त्रायेलियों का है परन्तु सारा ब्रह्मांड का है। प्रभु येसु भी न सिर्फ इस्राएलियोंके लिए परन्तु सारी दुनिया के लिए मरे। इसलिए तो प्रभु संत मत्ती के अनुसार सुसमाचार में 28 : 16-20 अपने शिष्यों को बताते हैं कि वे पृथ्वी के कोने- कोने में जाकर सुसमाचार को प्रचार प्रसार करें। आज के सुसमाचार का पाठ अपने शिष्यों की संगति में प्रभु येसु के अंतिम भोजन की तस्वीर का चित्रित करता है। वह Maundy Thursday को होने वालो बड़ा त्यौहार का संकेत है ।

परन्तु आज हम उस घटना पर मनन- चिंतन करेंगे जिसे येसु भोजन के दौरान खुलासा करते हैं। प्रभु येसु बताते हैं कि बारह में से एक उन्हें धोखा देगा। यह सुनकर पैत्रुस परेशान हो जाता है। वह योहन जिन्हें प्रभु प्यार करते है उसे संकेत देकर कहते हैं कि वह प्रभु से पूछताछ करे कि वह दुर्गभागयपूर्ण काम करने वाला कौन है? प्रभु वह उस व्यक्ति का नाम तो प्रकट नहीं करते परन्तु प्रकट करते हैं कि जिसे में रोटी का टुकडा थाली में डुबाकर दूंगा, वह है।

येसु ख्रीस्त में मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, यह महसूस करना बहुत चौकाने वाला है कि येसु के शरीर को रोटी के टुकडे के रूप में थाली में, प्रभु के रक्त डूबाकर स्वयं प्रभु के हाथों से ग्रहण करता है। यूदस वह वास्तव में शैतान को ही ग्रहण करता है। जब वह ग्रहण करके बाहर निकलता है तो रात हो चुकी थी। रात में अंधेरा छा रहा था जो शैतान के शासन का संकेत था। प्रभु के शरीर और रक्त को ग्रहण करने वाला अक्षर योग्य रीति से नहीं किया हो तो वह उस बहुमूल्य शरीर और रक्त को शैतान के रूप में सक्षम है। दुनिया की दृष्टी में प्रभु येसु का दु: खभोग और मृत्यु हार का क्षण लग सकता है परन्तु ईश्वर की नजर में महीमा का क्षण है। हम में से हर एक व्यक्ति अपने कष्टों और पीड़ाओं को महिमा का क्षण में बदल सकते है अगर वह प्रभु येसु के समान मौन रूप से ईश्वर का अर्पित करे और हर एक घटना को ईश्वर की इच्छा समझें।

ख्रीस्त में प्यारे भाइयों और बहनों, आज का हमारा मनन- चिंतन अधूरा रह जायेगा अगर हम आज के सुसमाचार के पाठ में संत पैत्रुस की भूमिका के बारे में नहीं सोचेंगे तो सबसे पैत्रुस यह जानना चाहते थे कि अपने गुरूवर येसु को कौन पकड़वा देगा और पेत्रुस का वादा कि वह प्रभु के लिए अपना जीवन कुर्बान करेगा। इस बात को सुनकर प्रभु येसु प्रकट करते हैं कि गुरुवार के दिन स्वयं पैत्रस प्रभु को अपने गुरूवर को एक बार नहीं तीन बार अस्वीकार करेगा।

Maundy Thursday के बदले आज ही माता कलीसिया इस पाठ को आज ही सुनाती है ताकि हम आज ही सुनें और यूदस और सीमोन पैत्रसु के इन्कार के विश्वासघात बारे में मनन- चिंतन करें। क्योंकि गुरूवार के दिन अन्य विषय पर हम ध्यान मनन करेंगे।

शायद यह सोचना गलत नहीं होगा कि प्रभु येसु चिंता प्रकट करते है पैत्रुस और यूदस इस्कारियोती के विषय में कि वे अपने विचारधारा का बदले। लेकिन वह संभव नहीं था। पवित्र ग्रन्थ में जो लिया था वह पूरा होना भी निश्चय था। हम भी येसु के इन दो शिष्यों के समान प्रभु येसु के साथ कभी विशवासघात करते हैं कभी अस्वीकार करते हैं।

हमें बड़े विशवास के साथ प्रार्थना करना जरूरी है कि हम सर्तक रहें और हर समय प्रार्थना करते रहें ताकि हम प्रलोभन से बचे रहें और प्रभु के साथ येरूसालेम जायें, प्रभु के साथ मरें और जी उठें।

पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमेन।

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