पवित्र सप्ताह का पुण्य गुरुवार 14 April  2022

पुण्य गुरुवार 14 April  2022

 

प्रवेश भजन

हमें अपने प्रभु येसु ख्रीस्त के क्रूस पर गौरव करना चाहिए। उन्हीं में हमारा कल्याण, जीवन और पुनरुत्थान है, उन्हीं के द्वारा हमारा उद्धार और मुक्ति हुई है।

 

पश्चाताप- विधि

यूखरिस्तीय समारोह जिसमें हम भाग लेते हैं यह बीती रीति रिवाज से ऊपर उठकर एक सत्य है जिसे हमारे जीवन्त जीवन में दिखाई देना चाहिए। इस संस्कार के द्वारा हम उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए निमंत्रित किए जाते हैं जैसे प्रभु कहते हैं “तुम मुझे गुरू और प्रभु कहते हो और ठीक ही कहते हो क्योंकि मैं वही हूँ। इसलिए यदि मैं तुम्हारे प्रभु और गुरू ने तुम्हारे पैर धोये हैं, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पैर धोने चाहिए।" इस पैर धोने का मतलब बहुत ही गहरा है। वे अंतिम ब्यालू में अपने प्रियजनों के साथ थे और उनके लिए कुछ छोड़ कर जाना चाहते थे और अपने दु: खभोग के द्वारा वे ईश्वर के सर्वोत्तम प्रेम को यादगारी के रूप में छोड़कर जाते हैं। येसु ने इस कार्य के द्वारा एक नई आज्ञा हमें दी “जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया है, उसी प्रकार तुम भी एक दूसरे को प्यार करो। यदि हम अपने भाई- बहनों को प्यार नहीं कर सकते हैं तो आज का समारोह हमारे लिए विरोधाभाषी है। इसका प्रमाण येसु ने न केवल अपनों को दिखाया बल्कि अपने विरोधियों को भी दिखलाया। येसु ने यूदस को भी पश्चात्ताप का निमंत्रण दिया। पर यूदस ने नहीं स्वीकारा। पेत्रुस और अन्य प्रेरितों ने अपना पाप स्वीकार किया और वे क्षमा किए गये। पर पाप क्षमा वहीं मिलती है जब हम अपने पापों को स्वीकारते हैं। शायद यही क्षमाशीलता की शिक्षा आज हमें दी जाती है। पैसा देना दया का बड़ा कार्य नहीं, वरन् दूसरों को क्षमा करना है जो हमें दुःख पहुँचाते हैं। हम सभी ईश्व र से क्षमा पाना चाहते हैं ठीक उसी प्रकार हमें भी दूसरों को क्षमा करना चाहिए। और यही वास्तविक पैर धोना कहा जा सकता है। (जीवन झरना, क्लरेशियन बाईबिल डायरी)

 

संगृहीत प्रार्थना (निवेदन)

हे ईश्वर, हम उस ब्यालु के लिए इकट्ठे हुए हैं जिसमें तेरे पुत्र अपने प्राण निछावर करने के पूर्व कलीसिया के लिए एक नया और शाश्वत बलिदान दे गये। हमें यह कृपा दे कि इस महान् संस्कार में बारम्बार भाग लेने से हम लोगों में प्रेम और जीवन उमड़ उठे। उन्हीं हमारे प्रभु और तेरे पुत्र येसु ख्रीस्त के द्वारा, जो ईश्वर होकर तेरे तथा पवित्र आत्मा के साथ युगानुयुग जीते और राज्य करते हैं। आमेन।

 

पहला पाठ

(यहूदी लोग हर साल पास्का पर्व के अवसर पर पास्का का मेमना खाते थे। हम हर पवित्र मिस्सा में कहते है , 'हे ईश्वर के मेमने! तू संसार के पाप हर लेता है- हम पर दया कर।' इस प्रकार हम अपना विश्वास प्रकट करते हैं कि पास्का का वास्तविक मेमना कौन है- यह तो येसु मसीह ही है।)

निर्गमन ग्रन्थ    12 : 1-8.11-14

पास्का के भोज के विषय में आदेश।”

प्रभु ने मिस्र देश में मूसा और हारून से कहा- यह तुम्हारे लिए आदिमास होगा; तुम उसे वर्ष का पहला महीना मान लो। इस्राएल के सारे समुदाय को यह आदेश दो- इस महीने के दसवें दिन हर एक परिवार एक- एक मेमना तैयार रखेगा। यदि मेमना खाने के लिए किसी परिवार में कम लोग हों, तो जरूरत के अनुसार पास वाले घर से लोगों को बुलाओ। खाने वालों की संख्या निश्चित करने में हर एक की खाने की रुचि का ध्यान रखो। उस मेमने में कोई दोष न हो; वह नर हो और एक साल का। वह भेड़ा हो अथवा बकरा। महीने के दसवें दिन तक उसे रख लो; शाम को सब इस्राएली उसको कतल करेंगे। जिन घरों में मेमना खाया जायेगा, दरवाजों की चौखट पर उसका लोहू पोत दिया जाये। उसी रात को बेखमीर रोटी और कड़वे साग के साथ मेमने का भूना हुआ माँस खाया जायेगा। तुम लोग चप्पल पहन कर, कमर कस कर तथा हाथ में डंडा लिये खाओगे। तुम जल्दी जल्दी खाओगे, क्योंकि यह प्रभु का 'पास्का' है। उसी रात मैं, प्रभु, मिस्र देश का परिभ्रमण करूँगा, मिस्र देश में मनुष्यों और जानवरों के सभी पहलौठे बच्चों को मार डालूँगा, और मिस्र के सभी देवताओं को भी दण्ड दूँगा। तुम लोहू पोत कर दिखा दोगे। कि तुम किन घरों में रहते हो; वह लोहू देख कर मैं तुम लोगों को छोड़ दूँगा। इस तरह, जब मैं मिस्र देश को दण्ड दूँगा, तुम विपत्ति से बच जाओगे। तुम उस दिन का स्मरण रखोगे और उसे प्रभु के आदर में पर्व के रूप में मनाओगे। तुम उसे सभी पीढ़ियों के लिए अनन्तकाल तक पर्व घोषित करोगे।  

यह प्रभु की वाणी है।

 

भजन स्तोत्र 115: 12-13.15-18

अनुवाक्य:- यह आशिष का प्याला है; इसके द्वारा हम मसीह के रक्त के सहभागी बन जाते हैं।

1. प्रभु के सब उपकारों के लिए मैं उसे क्या दे सकता हूँ? मैं मुक्ति का प्याला उठा कर प्रभु का नाम लूँगा।

2. अपने भक्तों की मृत्यु से प्रभु को भी दुःख होता है। हे प्रभु! मैं तेरा सेवक हूँ, तूने मेरे बंधन खोल दिये।

3. मैं प्रभु का नाम लेते हुए धन्यवाद का बलिदान चढ़ाऊँगा। मैं प्रभु की सारी प्रजा के सामने प्रभु के लिए अपनी मन्नतें पूरी करूँगा।

 

दूसरा पाठ

(हर एक पवित्र मिस्सा में हम अन्तिम ब्यारी तथा क्रूस के बलिदान, दोनों की यादगारी मनाते हैं। दोनों अवसरों पर येसु ने हमें अपूर्व रूप से अपना प्रेम दिखाया है।)

कुरिंथियों के नाम संत पौलुस का पहला पत्र             11: 23-26

 “जब- जब आप यह खाते अथवा पीते हैं, प्रभु की मृत्यु घोषित करते हैं।”

भाइयो! मैंने प्रभु से सुना और आप लोगों को भी यही बता दिया है कि जिस रात को प्रभु येसु पकड़वाये गये, उन्होंने रोटी ले कर धन्यवाद की प्रार्थना पढ़ी और उसे तोड़ कर कहा- "यह मेरा शरीर है, यह तुम्हारे लिए है। यही मेरी स्मृति में किया करो।" इसी प्रकार व्यारी के बाद उन्होंने प्याला ले कर कहा- "यह प्याला मेरे रक्त का नूतन विधान है। जब- जब तुम उसमें से पियो, तो यही मेरी स्मृति में किया करो।" इसलिए जब- जब आप लोग यह रोटी खाते और यह प्याला पीते हैं, आप प्रभु के आने तक उनकी मृत्यु की घोषणा करते हैं।

यह प्रभु की वाणी है।

 

जयघोष        योहन 13:34

प्रभु कहते हैं- मैं तुम लोगों को एक नयी आज्ञा देता हूँ जैसे मैंने तुम्हें प्यार किया, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को प्यार करो।

 

सुसमाचार

(आज के सुसमाचार में प्रभु येसु हमें यह शिक्षा देते हैं कि कोमुन्यो और भ्रातृप्रेम का अटूट सम्बन्ध है। जब- जब हम दूसरों की सेवा करते हैं, तब उन्हीं के सच्चे शिष्य होने का प्रमाण देते हैं, जिन्हें हम पवित्र कोमुन्यो में ग्रहण करते हैं।)

सन्त योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार       13: 1-15

"उन्होंने अपने प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण दिया।"

वह पास्का पर्व का पूर्वदिन था। येसु जानते थे कि मेरी घड़ी आ गयी है और मुझे यह संसार छोड़ कर पिता के पास जाना है। वह अपने शिष्यों को , जो इस संसार में थे, प्यार करते आये थे और अब अपने प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण देने वाले थे। शैतान ब्यारी के समय तक सिमोन इसकारियोती के पुत्र यूदस के मन में येसु को पकड़वाने का विचार उत्पन्न कर चुका था। येसु जानते थे कि पिता ने मेरे हाथों में सब कुछ दे दिया है, मैं ईश्वर के यहाँ से आया हूँ और ईश्वर के पास जा रहा हूँ। उन्होंने भोजन पर से उठ कर अपने कपड़े उतारे और कमर में अँगोछा बाँध लिया। तब वह परात में पानी भर कर अपने शिष्यों के पैर धोने और कमर में बंधे अंगोछे से पोंछने लगे। जब वह सिमोन पेत्रुस के पास पहुँचे, तो पेत्रुस ने उनसे कहा, "प्रभु! आप मेरे पैर धोते हैं?" येसु ने उसे उत्तर दिया, "तुम अभी नहीं समझते कि मैं क्या कर रहा हूँ- बाद में समझोगे।” पेत्रुस ने कहा, "मैं आप को अपने पैर कभी नहीं धोने दूंगा।” येसु ने उसे उत्तर दिया, "यदि मैं तुम्हारे पैर न धोऊँ, तो तुम्हारा मेरे साथ कोई संबंध नहीं रह जायेगा।" इस पर सिमोन पेत्रुस ने उनसे कहा, "प्रभु! तब तो मेरे पैर ही नहीं, मेरे हाथ और सिर भी धोइये।” येसु ने उत्तर दिया, "जो स्नान कर चुका है, उसे पैर के सिवा और कुछ भी धोने की जरूरत नहीं। वह पूर्ण रूप से शुद्ध है। तुम लोग शुद्ध हो, परन्तु सब के सब नहीं।" वह जानते थे कि कौन मेरे साथ विश्वासघात करेगा। इसीलिए उन्होंने कहा तुम सब के सब शुद्ध नहीं हो। उनके पैर धोने के बाद वह अपने कपड़े पहन कर फिर बैठ गये और उनसे बोले, "क्या तुम लोग समझते हो कि मैंने तुम्हारे साथ क्या किया है? तुम मुझे गुरु और प्रभु कहते हो, और ठीक ही कहते हो, क्योंकि मैं वही हूँ। इसलिए यदि मैंने प्रभु और होकर तुम्हारे पैर धोये हैं, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पैर धोने चाहिए। मैंने तुम्हे उदाहरण दिया है, जिससे जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया है, वैसा ही तुम भी किया करो।”

यह प्रभु का सुसमाचार है।

 

विश्वासियों के निवेदन

पु० प्रिय भाई- बहनो, येसु ख्रीस्त ने अंतिम ब्यारी के समय अपने पवित्र प्रेम को साक्षात् रूप से प्रकट किया। ईश्वर के प्रेम पर विश्वास करते हुए हम अपनी सब आवश्यकताओं के लिए प्रार्थना करें और कहें:

सब: हे पिता, हमारी प्रार्थना सुन।

1. संत पिता, सभी धर्माध्यक्ष एवं पुरोहितगण अपने जीवन तथा कार्यों द्वारा येसु के प्रेम, सेवा एवं विनम्रता का साक्ष्य दे सकें, इसके लिए हम पिता ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

2. समस्त संसार के ख्रीस्तीय विश्वासी पास्का के रहस्य को समझें और यूखरिस्तीय समारोह में येसु ख्रीस्त के असीम प्रेम का अनुभव कर सकें। इसके लिए हम पिता ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

3. हमारा सार्वभौमिक परिवार शांतिपूर्वक जीवन यापन करे, एक दूसरे के हित के बारे में सोचे, हर सदस्य की प्रतिष्ठा की रक्षा करे और सबों को न्याय मिले। इसके लिए हम पिता ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

4. सभी राष्ट्रों के नेता अपने देश की सम्पत्ति को गरीब देशों के साथ बाँटें और सभी लोग एक दूसरे के लिए सुरक्षित वातावरण निर्मित करें। इसके लिए हम पिता ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

5. यहाँ एकत्रित समुदाय के हम सभी सदस्य सु खीस्त ने हमारे लिए जो किया उसे समझें और अपने जीवन को परिवर्तित कर एक विशुद्ध जीवन जी सकें। इसके लिए हम पिता ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

(निजी प्रार्थनाएँ)

पु०: हे सर्वशक्तिमान् ईश्वर, अपने पुत्र येसु ख्रीस्त को हमारे पास भेजने के लिए हम तुझे धन्यवाद देते हैं क्योंकि वही हमारा मार्ग, सत्य और जीवन हैं। हमें इस यूखरिस्तीय समारोह में भाग लेने के योग्य बना ताकि हम येसु ख्रीस्त के प्रेम और संपूर्ण त्याग को अपने जीवन में बरकरार रखें। हमें ऐसी कृपा प्रदान कर कि मानव के प्रति तेरे अगाध प्रेम को समझ कर हम इसके अनुरूप जीवन बिता सकें। हम यह प्रार्थना करते हैं उन्हीं प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

अर्पण -प्रार्थना

 हे प्रभु, जितनी बार यह बलि संस्कार के रूप में चढ़ाया जाता है, हमारी मुक्ति का कार्य संपन्न होता है। इसलिए हमें इस रहस्य में योग्य रीति से भाग लेने की कृपा दे, हमारे प्रभु खीस्त के द्वारा। आमेन।

 

अवतरणिका: प्रभु का रूपांतरण

पु०: प्रभु आपलोगों के साथ हो। सब: और आपकी आत्मा के साथ।

पु०: प्रभु में मन लगाइए। सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पु०: सब हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें। सब: यह उचित और न्यायसंगत है।

हे प्रभु, पवित्र पिता, सर्वशक्तिमान् और शाश्वत ईश्वर, यह वास्तव में उचित और न्यायसंगत है, हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। ये ही हैं यथार्थ और शाश्वत पुरोहित। इन्होंने चिरस्थायी बलिदान की स्थापना की और सर्वप्रथम स्वयं को तुझे मुक्तिदायक बलि- स्वरूप चढ़ाया और आदेश दिया कि हम इनकी स्मृति में इसे अर्पित करें। हमारे लिए अर्पित इनका शरीर ग्रहण करके हम बलिष्ठ होते और हमारे लिए प्रवाहित इनका रक्त पान कर हम विशुद्ध होते हैं। इसलिए, दूतों और महादूतों, सिंहासन और साम्राज्य, स्वर्गिक सेनाओं और शक्तियों के साथ मिलकर हम अनंत काल तक तेरा महिमागान करते हैं:

पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! ...

 

प्रसाद- भजन

प्रभु का कहना है, "यह मेरा शरीर है जो तुम्हारे लिए दिया जाता है। यह कटोरा मेरे लहू से स्थापित नया व्यवस्थान है। जब कभी तुम इसे ग्रहण करोगे, मेरी स्मृति में यह किया करो।"

 

कम्यूनियन के बाद प्रार्थना

हे सर्वशक्तिमान ईश्वर, इस लोक में हम तेरे पुत्र ब्यालू में भाग लेने से नवस्फूर्ति प्राप्त करते हैं; हम स्वर्ग में उनके दिए भोज से अनन्तकाल तक तृप्त होते रहें, -उन्हीं हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन।

 

 

  1. Homily / Sermon by फादर रायन एसवीडी

 

पवित्र सप्ताह गुरुवार: 14 अप्रैल

प्रभु भोज की पवित्र मिस्सा

निर्गमन 12:1-8, 11-14/भजन 116:12-13, 15-18/1 कुरिन्थि 11:23-26/योहन 13:1-15

 

ख्रीस्त में प्रिय बहनों और भाइयों,

आज पवित्र सप्ताह का पवित्र गुरुवार है। परंपरागत रूप से, क्रिस्म पवित्र मिस्सा इस दिन की सुबह धर्मप्रांत के प्रत्येक कैथेड्रल चर्च में पवित्र पुरोहिताई की स्थापना को मनाने के लिए अर्पित की जाती है। यह मिस्सा दर्शाती है कि पुरोहितों में भाईचारे का आपसी बंधन है और यही बंधन बिशप और पुरोहितों के बीच मौजूद है। चर्च के विभिन्न संस्कारों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पवित्र तेलों को भी पवित्र क्रिस्म मिस्सा के दौरान आशीष दी जाती है। लेकिन कई मिशन देशों में धर्मप्रांत की भौगोलिक विशालता और संबंधित असुविधाओं के कारण इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता है और इसलिए बिशप अपनी सुविधा के अनुसार पवित्र सप्ताह के दौरान या उससे ठीक पहले भी पवित्र क्रिस्म मिस्सा का आयोजन करते हैं।

शाम को अर्पित की जाने वाली पवित्र मिस्सा को प्रभु भोज की पवित्र मिस्सा भी कहा जाता है। एक उत्साही यहूदी होने के बावजूद, ईश्वर का पुत्र, येसु मसीह मेजों को उलट देता है क्योंकि वह पास्का भोज को एक नया मोड़ और एक नया अर्थ देता है जब वह बेखमीरी रोटी, कड़वी जड़ी-बूटियों और दाखरस को अपने शरीर और लहू के रूप में बदल देता है। संपूर्ण अंतिम भोज येसु के लिए एक भावनात्मक क्षण था, मेज पर बैठे येसु के शिष्यों के लिए एक रहस्य और पिछले दो हजार वर्षों से, यह सभी विश्वासियों के लिए भावनात्मक रूप से रहस्यमय क्षण बन गया है और अन्य धर्मों के विश्वासियों के लिए एक बड़ा प्रश्न चिह्न बन गया है:- "कि कोई अपने शरीर और रक्त को भोजन और पेय के रूप में कैसे पेश कर सकता है?"

आइए अब हम निर्गमन की पुस्तक के पहले पाठ के आधार पर अपने चिंतन की शुरुआत करें। यहूदी कई पीढ़ियों से पास्का पर्व मनाते आ रहे थे। यह मुक्ति का दिन था। वास्तव में, पहला पास्का उस मुक्ति का प्रत्याशित उत्सव था। ईश्वर ने स्वयं निर्धारित किया कि पास्का पर्व इस तरह मनाया जाए। बलि किये हुए निर्दोष मेमने का मांस विशेष तरीके से पकाया जाएगा, रात को खाने के लिए प्रतिभागियों की सूची रहेगी और एक विशेष वेशभूषा को आवश्यक रूप से पहना जाएगा। भोजन करने वाले चप्पल पहन कर, कमर कस कर तथा हाथ में डण्डा लिये जल्दी-जल्दी खाएंगे, क्योंकि यह प्रभु का पास्का है। ये बाते दर्शाती हैं कि पास्का के भोज में भाग लेने वाले यात्री थे। वे सभी लोग चल रहे थे। वे सभी संक्रमण काल ​​के लोग थे। वे गुलामी से आजादी की ओर बढ़ रहे थे। वे एक ऐसे देश से चले गए जो उनका नहीं था और एक ऐसे प्रतिज्ञात देश में चले गए जिसके लिए ईश्वर ने युगों पहले कुलपिता इब्राहीम से वादा किया था। इस त्योहार को प्रभु येसु ने अपने में कैसे परिवर्तित कर दिया- इसका वर्णन आज के दूसरे पाठ कुरिन्थियों के नाम संत पौलुस के पहले पत्र में किया गया है।

संत पौलुस सबसे पहले यह बताते है की किस प्रकार प्रभु येसु ने पवित्र परम प्रसाद संस्कार की। यहूदी परिवार के हर मुखिया की तरह येसु ने भी रोटी ली और ईश्वर को धन्यवाद दिया और उसे तोड़ा और अपने शिष्यों के साथ बांटी। लेकिन रोटी को साझा करने से पहले उन्होंने जो शब्द कहे, वे येसु द्वारा लाए गए नवीनीकरण को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने मनुष्यों के पापों की क्षमा और मानवता के उद्धार के लिए रोटी को अपने शरीर में और दाखरस को अपने लहू में बदल दिया। इस प्रकार पवित्र यूख्रिस्त जिसे हम विगत 2000 वर्षों से मनाते आ रहे है हमारे लिए एक मुक्तिदायक भोजन बन गया है। हर बार जब हम इसे मनाते हैं, हम प्रभु येसु की मृत्यु की घोषणा करते हैं क्योंकि उन्होंने बार-बार कहा: "यह मेरी स्मृति में किया करो"। हां! उनकी याद जिंदा है!

प्रचारक संत योहन ने नए पास्का के पूरे उपाख्यान को महान और सर्वोच्च प्रेम का कार्य कहा है। इसके माध्यम से, येसु ने दिखाया कि मानवता के लिए उनका प्रेम कितना परिपूर्ण था। हमें यह भी बताया जाता है कि येसु इस क्षण की प्रतीक्षा कर रहे थे। वह कितनी बार भीड़ से बच निकले और उनसे दूर चले गए क्योंकि अभी उनका समय नहीं आया था? यहूदी अधिकारियों ने कितनी बार येसु के खिलाफ साजिश रची, लेकिन कभी उनके करीब नहीं आ सके क्योंकि उनका समय अभी तक नहीं आया था? हाँ, अब समय आ गया है और येसु अपने चुने हुओं के साथ भोजन की मेज पर है। मेज पर हर कोई मिश्रित भावनाओं और एहसास के साथ बैठा है!

भोजन के समय येसु ने एक और परिवर्तन लाये जब उसने अपने बाहरी वस्त्र उतारे, एक तौलिया लिया, उसे अपनी कमर के चारों ओर लपेटा और शिष्यों के पैर धोना शुरू किया और उनके पैरों को पोंछ दिया। येसु के समय में यहूदी परिवारों में पारंपरिक रूप से पैर किसने धोए थे? पैर धोना गुलामों का काम था। एक दास का कार्य करने के द्वारा, येसु ने निःसंदेह प्रदर्शित किया कि अधिकार सेवा के लिए है। गुरु स्वयं प्रथम सेवक होते हैं। "मानव पुत्र भी अपनी सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने और बहुतों के उद्धार के लिए अपने प्राण देने आया है।" (मारकुस 10:45)। परिणति का संदेश सुसमाचार पढ़ने के अंत की ओर आता है। संत योहन 13:13-15 में येसु कहते हैं, "तुम मुझे गुरु और प्रभु कहते हो और ठीक ही कहते हो, क्योंकि मैं वही हूँ। इसलिये यदि मैं- तुम्हारे प्रभु और गुरु- ने तुम्हारे पैर धोये है तो तुम्हें भी एक दूसरे के पैर धोने चाहिये। मैंने तुम्हें उदाहरण दिया है, जिससे जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया वैसा ही तुम भी किया करो।" हाँ, एक दूसरे के पांव धोते रहना चाहिए! यह अधिक विनम्रता की मांग करता है! यूख्रिस्त का उत्सव एक दूसरे के पैर धोने के साथ-साथ चलना चाहिए।

फिर येसु एक नई आज्ञा, प्रेम की आज्ञा देते हैं, "जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही एक दूसरे से प्रेम रखो"। एक दूसरे के लिए हमारे मन में जो प्रेम है वह येसु के प्रेम के अनुरूप होना चाहिए। और प्रेम की सबसे बड़ी निशानी जो उन्होंने मानव को सिखलाई, वह है उनके शरीर और रक्त का उपहार। भोजन में भाग लेने वाले सभी लोगों को न केवल लंबवत बल्कि क्षैतिज रूप से भी अपने प्यार का इजहार करना होगा और यहीं पर पैरों को धोना ठोस रूप से समझ में आता है।

अपने प्रतिबिंबों का समापन करने के लिए, आइए हम अपने प्रतिबिंबों के लिए कुछ बिंदुओं को घर ले जाएं:

(i) आज हमारे सभी पुरोहितों के लिए प्रार्थना करने का दिन है। ईश्वर ने उन्हें बुलाया और उन्होंने प्रभु को 'हां' कहा। हमारे सभी पुरोहितों को हमारी प्रार्थना और समर्थन की आवश्यकता होती है, खासकर जब वे विभिन्न परिस्थितियों के कारण परेशानी में होते हैं।

(ii) आइए हम येसु से नम्रता का गुण सीखें। चाहे हम पारिवारिक जीवन जीते हों या पुरोहित और पवित्र जीवन शैली, विनम्रता लोगों का दिल जीत लेती है।

(iii) आइए हम यूख्रिस्त से प्रेम करना सीखें और इसे अपने जीवन का केंद्र बनाएं। आमेन!

 

 

 

 

 

  1. Homily / Sermon by

अंतिम ब्यालू

 

आज की धर्मविधि हमें प्रभु येसु की अंतिम भोज (अंतिम ब्यालू) की याद दिलाता है। प्रभु-भोज का उत्सव हमारे मन में सेवा, पवित्र युख्रिस्त की स्थापना और पुरोहिताई की स्थापना का स्मरण कराता है। आज रात येसु भोजन के रूप में हमें अपने शरीर देना चाहते है और फिर हमारे पैर धोना चाहते हैं और इस तरह एक सबक के रूप में हमें शिक्षा देना चाहते हैं कि एक ईसाई के रूप में हमारा स्थान कहाँ है। "मैं तुम लोगों को एक नयी आज्ञा देता हूँ- तुम एक दूसरे को प्यार करो। जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया, उसी प्रकार तुम एक दूसरे को प्यार करो।” (सन्त योहन 13:34)। येसु ने अपने चेलों से कहा, “ले लो और खाओ, यह मेरा शरीर है।” (मत्ती 26:26)। येसु अपने शिष्यों से कह रहे थे कि भोजन के रूप में अपने पूरे जीवन जीने के तरीके को अपने अंदर ले लें। उन्होंने एक नई शुरुआत का संकेत दिया। यह उनके जीवन की यात्रा के लिए भोजन था। समान रूप से येसु कह रहे हैं: यह मैं हूं, इस तरह से मैंने जीया है, मुझे अपने भीतर ले लो और अपने मन और दिल को मेरी जीवन शैली के अनुरूप बनाओ। येसु अपने संपूर्ण जीवन को संक्षेप में बता रहे है, जो दूसरों को "दिया" गया है, वह दूसरों की "सेवा में" जीया है। उन्होंने खुद को "रोटी की तरह" देखा, जिसमें लोग उन्हें खिलाते थे, उसकी बात सुनकर, उस पर ध्यान देकर उसका पोषण करते थे। रोटी एक प्रतीक थी जो कुछ अधिक समृद्ध, उसके संपूर्ण व्यक्तित्व, चरित्र और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को ले जाती थी। रोटी खाना येसु के जीवन और मन को खुले तौर पर स्वीकार करने का एक तरीका है। ईश्वर ने स्वयं को कम किया ... ताकि हम ज्यादा बन सकें।

अंतिम भोज के संदर्भ में, संत योहन ने येसु के एक कार्य को दर्शाया। यह क्रिया एक प्याला और तौलिया के साथ यूख्रिस्त के अर्थ को रेखांकित करती है। येसु दूसरों के सामने घुटनों के बल बैठते है, और वे एक सेवक की तरह काम कर रहे है। उन्होंने अपने शिष्यों के पैर धोकर सेवाभाव का महत्त्व समझाया। यहीं पर हम मसीह की सच्ची छवि देखते हैं। पैर धोने के दृश्य में, हम पेत्रुस की प्रतिक्रिया में एक दोहरा जोरदार नकारात्मक पहलु देखते हैं जो उनकी आपत्ति का संकेत देता है। पेत्रुस येसु को अपना पैर धोने से मना करता है। लेकिन येसु उससे कहते हैं- "यदि मैं तुम्हारे पैर नहीं धोऊँगा, तो तुम्हारा मेरे साथ कोई सम्बन्ध नहीं रह जायेगा।" (योहन 13:8)। यह येसु के लिए अंतरंगता और एकता की एक गहन भेंट बन जाती है। प्रेम और सेवा में येसु के जीवन को जारी रखना उसके साथ हमारी सहभागिता की मांग करता है। कथा का समापन अभिव्यक्ति के साथ होता है: पारस्परिक प्रेम शिष्यत्व है। यह प्यार है। येसु के कार्य प्रेममयी दया, कोमलता और करुणा की बात करते हैं। यह "मांस के दिल" वाले ईश्वर की बात करता है। यह प्यार है जो पैर धोता है; यह एक शरीर की बात करता है जो हमारे लिए दिया गया है। यह किसी ऐसे व्यक्ति की बात करता है जो सच्चा और विश्वासयोग्य है। येसु हमारे लिए ईश्वर के प्रेम की निरंतर निष्ठा को व्यक्त करते हैं, एक ऐसा प्रेम जिस पर हम निर्भर रह सकते हैं, और एक ऐसा प्रेम जिस पर भरोसा किया जा सकता है। येसु के प्रेम के इन भावों का अनुभव करने के बाद, हमें उसके स्मरण में ऐसा करना चाहिए; हमें प्रेम की इस अभिव्यक्ति को दैनिक क्रिया में करना है। इसलिए, प्रेम की इस अभिव्यक्ति को जारी रखना हम में से प्रत्येक का कार्य है। येसु ने प्रेरितों से कहते हुए पुरोहिताई की स्थापना की: “मेरी स्मृति में ऐसा किया करो।” इस प्रतिज्ञा में, अकेले येसु हमेशा और हर जगह यूख्रिस्त का स्रोत है। बदले में प्रेरित विश्वास के इस महान रहस्य के सेवक बन जाते हैं, जिसे दुनिया के अंत तक सहना तय है। पुरोहिताई की स्थापना में येसु अपने दयालु और उपचारात्मक प्रेम के हर समय और स्थान के माध्यम से पवित्र गुणन को जारी रखना चाहते हैं। पुरोहिताई द्वारा एक शिक्षक, पिता और मार्गदर्शक के रूप में हमारे जीवन में बिना हम पर हावी हुए उपस्थित होने का ईश्वर का तरीका है। प्रत्येक युग में, येसु मनुष्यों में से कुछ को चुनते हैं, जिन्हें हम आज याजक कहते हैं। हम याजकों के जीवन और कार्यों के माध्यम से येसु के प्रेम के प्रत्यक्ष लक्षण देखते हैं। वे हमारे जन्म से मृत्यु तक हमारे साथ हैं, ईश्वर को हमारे करीब लाते हैं। यह निरंतरता में प्यार है। आइए प्रार्थना करें और हमारे पुरोहितों का समर्थन करें।

 

 

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