परीक्षा का समय 

पुराने व्यवस्थान में नूह के समय एक नई व्यवस्था दी गई है कि आने वाले दिनों में कभी भी बारिश से यह सृष्टि नष्ट नहीं होगी। ईश्वर ने आकाश में इन्द्रधनुष रखकर सदा ही याद करने की बात की है। नूह के समय जो जलप्रलय हुआ वह येसु के आने के बाद लोगों का सामूहिक बपतिस्मा की याद दिलाता है। नूह एवं उनके परिवार को नया जीवन मिला और वही जीवन अब हमलोगों में विद्यमान है। येसु के आने से और अधिक हमें कृपा, आशिष तथा बल मिला है। हम इसके लिए पिता ईश्वर को धन्यवाद दें। 
येसु में मानवीय स्वभाव है और ईश्वरीय स्वभाव भी। अतः इस संसार में मानव को किस भाँति संघर्षों से गुजरना पड़ता है निर्जन प्रदेश में वे गहराई से अनुभव करते हैं। धन- दौलत की भूख, रोटी का अभाव जैसे सशक्त भाव रोज दिन आते हैं। मानव उसमें फँस जाता है। ईसा तो ईश्वरीय शक्ति की बदौलत बच निकलते हैं। हम भी अगर उससे जुड़े रहेंगे तो विजयी अवश्य होंगे। संसार में मान- सम्मान पाना, नाम कमाना अच्छा लगता है पर क्या यही सब कुछ है? मानव यहीं पर गलती कर बैठता है। वह आगे की बात नहीं समझ पाता। येसु उससे ऊपर उठते हैं। हमें उदाहरण देते हैं। हमें येसु का साथ चाहिए, तो हम भी हर बात तथा काम में इसी दुनिया में आगे रहेंगे। परीक्षा के आखिरी क्षण में येसु को ललकारा जाता है कि अगर वह झुक कर प्रणाम करे, तो सारा जहान उसे दिया जायेगा। बड़ा ही लुभावना ऑफर है, परन्तु येसु उसे नकारते हुए कहते हैं कि ईश्वर की ही आराधना करना है और उसी की सेवा करना। मानव धन, प्रकृति, जानवरों और शक्तियों की पूजा करता है। तथा सर्वोच्च स्थान इन चीजों को देता है। हम बाह्य चीजों, शक्तियों पर सहज ही विश्वास करने लगते हैं। येसु हमें प्रेरणा दे ताकि उसे छोड़ हम किसी अन्य पर भरोसा न रखें। तब केवल दूतगण हमारी सहायता के लिए आगे आएँगे।

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