अच्छे दिन 

कहा जाता है 'अपना दिन आयेगा' या 'अच्छे दिन आयेंगे'। दीन - दुखियों और विपत्तियों को देख कर तो नहीं लगता कि 'अपना दिन आयेगा' या 'अच्छे दिन आयेंगे' । समय के काल- चक्र में कभी दु: ख के काले बादल छाये रहते हैं तो कभी खुशियों की भेंट। जिन्दगी अपनी रफ़्तार से अपनी दिशा और राह चुनती हैं इस विकट राह पर चलने वाले कुछेक लोग मिलते हैं जो खुद से ज्यादा ईश्वरीय अनुकम्पा और साहचर्य पर भरोसा रखते हैं। इस तरह के लोगों को येसु धन्य कह कर सराहते हैं। क्योंकि उनकी नींव येसु की शिक्षा पर टिकी हुई रहती हैं लेकिन येसु उन लोगों को धिक्कारते हैं जो अपनी शक्ति, बुद्धि और सम्पत्रता में भी नीरे मनुष्य पर भरोसा रखते हैं।
अच्छे दिन आये या न आये, परन्तु ईश्वर का सानिध्य और उसका प्यार अपने भक्तों पर सदा बना रहता हैं क्योंकि ईश्वर प्रेम और करुणा से परिपूर्ण हैं कंगाल लाज़रुस के बुरे दिन खत्म हुए और अच्छे दिन आये। उसके मरने के बाद उसे पिता इब्राहीम की गोद में रख दिया गया और उसे वहाँ सांत्वना मिली जब कि उस अमीर को मरने के बाद यंत्रणा मिली।
हमारे घरों में ढेर सारी किताबें हैं जो हमारा मार्ग दर्शन करती हैं। क्या हमने कभी इन किताबों की ओर ध्यान दिया? प्रति दिन हमारे माता- पिता, बड़े जन और शिक्षकवृन्द हमारे जीवन को प्रसस्त करना चाहते हैं। कितनी बार हमने उनकी बातों पर गौर फरमाया है? आज ईश्वर इन सभी माध्यमों से हमसे कुछ कहना चाहते हैं। क्या ईश्वर की आज्ञाएँ, नबियों की भविष्यवाणियाँ और संहिता की बातें इन सबमें दिखाई और सुनाई नहीं देती हैं? क्या मरने के बाद अगर कोई आदमी आकर हमसे कहे, तो क्या हम विश्वास करेंगे?

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