अकेला रहना मनुष्य के लिए अच्छा नहीं ।

"अकेला रहना मनुष्य के लिए अच्छा नहीं । इसलिए मैं उसके लिए एक उपयुक्त सहयोगी बनाऊँगा।"
ईश्वर के द्वारा एक नारी का बनाया जाना पुरुष के प्रति उसके विशेष महत्त्व को दर्शाता है। सृष्टि की रुचिकर घटना में मनुष्य को छठवें दिन में बनाना सृष्टि की दिशा में श्रेष्ठतर है। असल में नारी सबसे बाद में बनाई जाती है लेकिन सृष्टि की पराकाष्ठा वह नहीं है, चूँकि वह मात्र नर की सहयोगी बनती है। वास्तविकता यह है कि वह सृष्टि के कार्यों को आगे बढ़ाने में विशेष योगदान देती है। यह भी हकीकत है कि उसी नारी के लिए पुरुष अपने माता- पिता को छोड़कर अपनी पत्नी के साथ रहता है।
 ईसा गैर यहूदी क्षेत्र में हैं। इसके ठीक पहले शुद्ध और अशुद्ध पर गरमागरम बहस छिड़ गई। ईसा के यहाँ आने का अर्थ है कि गैर यहूदी अशुद्ध नहीं हैं और ईश्वर के राज्य में उनकी भी जगह है। ईसा पर अपने देश में ही चारों ओर से आक्रमण हो रहे थे। फरीसियों और शास्त्रियों ने उसे पापी घोषित कर दिया । हेरोद ने उसे खतरे के रूप में देखा एवं नाजरेत के लोगों ने उसे तुच्छ समझा। इस प्रकार से यहूदियों की अस्वीकृति ने गैर यहूदियों के लिए एक सुनहला मौका दिया। यहाँ गैर यहूदी को कुत्ते की संज्ञा दी जाती है। ईसा कभी भी सम्भावनाओं के दरवाजे को बन्द नहीं करते हैं। यह बिलकुल सही है कि सुसमाचार सबसे पहले ईश्वर की चुनी हुई प्रजा इस्राएल को दिया जाना था उसके बाद दूसरों को। ये स्त्री गैर यहूदी होते हुए भी ईसा की मनोभावना को देखकर पूर्ण उम्मीद करती है और अन्ततः अपने विश्वास और उम्मीद में खरा उतरती है, उसकी प्रार्थना सुनी जाती है।

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