प्रेरित संत योहन

Saint John The Apostle

जबेदी के पुत्र एवं साइमन पेत्रुस के छोटे भाई प्रेरित संत योहन के प्रियतम शिष्य थे | माँ का नाम सलोमी था संभवत वे कुँवारी माँ मरिया की बहिन थीं (मत्ती 27:57, मरकुस 15:40 तथा योहन 19:15 की आपस में तुलना करने से विदित होता है |) इस प्रकार योहन प्रभुवर ख्रीस्त के भाई (सगे नहीं) थे | येसु ने उनका नाम “गर्जन का पुत्र” रखा था | प्रेरितों में सबसे पहले यही येसु के पास आये थे और कलवारी पर अंतिम समय क्रूस के नीचे भी अकेले यही खड़े थे | एसी ने माँ मरिया को उन्हें सौंपते हुए कहा था, “यह तेरी माँ है|” और योहन मरिया को अपने साथ ले आए थे |

बेथसाइद में जबेदी का अच्छा खासा व्यापर था | येरुसालेम के बाजार में उनकी मछलियों की अच्छी माँग थी | योहन एक उत्साही युवक थे | समुद्र पर रहना उन्हें पसंद नहीं था | अतः वे व्यापार के सिलसिले में बाहर अधिक रहते थे | यही कारण है कि उन्हें बाहरी दुनिया का बड़ा ज्ञान था | शायद व्यापार ही येरुसालेम की यहूदी महासभा के महायाजकों तथा अन्य अधिकारियों से भी परिचय हुआ होगा | जब सिपाही येसु को गिरफ्तार करके भीतर महायाजक के पास ले गये और पेत्रुस भीतर जाना चाहते थे तो द्वारपालों ने उन्हें रोक लिया उस समय योहन ही स्वर्पालों से कहकर उसे भीतर ले गये क्योंकि वे महायाजक के परिचित थे | (योहन 18:15-16)

अंतिम भोज के समय, जिसकी तैयारी पेत्रुस एवं योहन ने ही की थी, जब येसु ने बताया कि एक उन्हें आज रात पकड़वा देगा तो सभी बड़े उदास हो गए | परन्तु योहन तो अपने प्रभुवर से करीब-करीब लिपट ही गए | वे उन्हें एक क्षण भी दूर नहीं करना चाहते थे | एक भावी आशंका से विचलित हो उठे थे | वे येसु की छाती के पास ही लेटे थे और पेत्रुस के इशारे पर उन्होंने येसु की छति पर झुककर पूछा था, “प्रभु, वह कौन है ?” योहन के सिवाय कोई भी प्रेरित ख्रीस्त के इतने करीब नहीं रहा |

योहन का सबसे महान कार्य ख्रीस्त के द्वारा स्वयं ईश्वर की प्रकाशन का एक निष्ठावान साक्षी बनना, “हमारा विषय वह शब्द है, जो आदि से विधमान था, हमने उसे सूना है | हमने उसे अपनी आँखों से देखा है | हमने उसका अवलोकन किया और अपने हाथों से उसका स्पर्श किया है | वह शब्द जीवन है और यह जीवन प्रकट किया गया है | यह शाश्वत जीवन्, जो पिता के यहाँ था और हम पर प्रकट किया गया है | हमने इसे देखा है, हम इसके विषय में साक्ष्य देते हैं और तुम्हें इसका सन्देश सुनाते हैं | हमने जो कुछ देखा और सुना वही तुम लोगों को बताते हैं जिससे तुम हमारे पिता और उसके पुत्र ईसा मसीह के जीवन के सहभागी बन जाओ |”

अन्य प्रेरितों के समान प्रेरित योहन ने सुसमाचार के प्रचार में संक्रिय भाग लिया | अपने मन परिवर्तन के बाद जब संत पॉल दूसरी बार येरुसालेम आये तो उन्होंने पेत्रुस, याकुब और योहन को ही येरुसालेम की कलीसिया की तीन प्रमुख हस्तियाँ माना था | येरुसालेम के मंदिर के “सुन्दर” फाटक पर बैठे उस लँगड़े ने आँख उठाकर पेत्रुस तथा योहन की ओर देखा था जिसका हाथ पकड़कर पेत्रुस ने कहा था, “येसु के नाम पर उठो और चलो |”

सन 50 तक योहन येरुसालेम में ही रहे बाद में पेत्रुस ने उन्हें एफेसस का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया | रोमी सम्राट दोमिशियन के शाशन काल में कलीसिया पर बड़े अत्याचार हुए | योहन को पकड़ कर पतमोस द्वीप में कैद कर दिया | यहीं उन्होंने अपने “प्रकाशना ग्रंथ” की रचना की | पतमोस में वे सन 81 से 96 तक रहे | सम्राट की मृत्यु के बाद उन्होंने पुनः एफेसस के धर्माध्यक्ष का कार्यभार संभाला | और इसी समय उन्होंने सुसमाचार की रचना की | रोमी सम्राट ट्रेजन के शासनकाल में लगभग सन 100 में योहन की मृत्यु हुई | बारह प्रेरितों में वे ही एक ऐसे रहे जो लोहुगावाह न होकर प्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त हुए |

संत स्तेफन के पर्व से दुसरे दिन अर्थात् 27 दिसम्बर को प्रेरित योहन का पर्व मनाया जाता है |

चार्ल्स सिंगोरिया

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