विश्व जल दिवस पर सन्त पापा फ्राँसिस का सन्देश

एक महिला पानी भरते हुए

विश्व जल दिवस के अवसर पर संत पापा ने कहा कि जल की आपूर्ति मानव का मूलभूत अधिकार है जिसका सम्मान अनिवार्य है।

विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में, सन्त पापा फ्राँसिस ने, विश्व कृषि एवं खाद्य संगठन के महानिर्देशक को एक सन्देश प्रेषित कर उनसे आग्रह किया है कि सबके लिये जल-संसाधान को उपलभ्य बनाने हेतु काम किया जाये।  

सन्त पापा ने कहा कि 2030 के धारणीय विकास कार्यक्रम के तहत विश्व जल दिवस मनाया जा रहा है जिसका विषय है, "किसी को पीछे मत छोड़ो"। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र और मानव अस्तित्व के संतुलन के लिए पानी एक आवश्यक कोष है, और इसके प्रबन्धन और देखभाल के लिए यह देखना आवश्यक है कि इसे दूषित या खोया न जाये।

"किसी को पीछे मत छोड़ो"

उन्होंने ध्यान आकर्षित कराया कि धरती की शुष्कता नए क्षेत्रों में फ़ैलती जा रही है और अधिक से अधिक खपत के लिए उपयुक्त जल स्रोतों की कमी हो रही है। अस्तु, "किसी को भी पीछे न छोड़ा जाये" का अर्थ है अन्याय के अन्त हेतु कृतसंकल्प होना। उन्होंने कहा कि जल की आपूर्ति मानव का मूलभूत अधिकार है जिसका सम्मान अनिवार्य है इसलिये कि यह जीवन एवं मानव प्रतिष्ठा का सवाल है।

विश्व कृषि एवं खाद्य संगठन के महानिर्देशक को प्रेषित सन्देश में उन्होंने कहा, "हमारे बहुत से भाई बहनों को पीड़ित करनेवाले जल के अभाव को मिटाने के लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है और ऐसा तब ही सम्भव हो सकता है जब, जनकल्याण को ध्यान में रखकर, वाद-विवादों एवं पहलों में व्यक्तियों को केन्द्र माना जाये।"

जागरुकता की आवश्यकता

सन्त पापा ने कहा कि अन्याय को समाप्त करने के लिये ठोस कदम उठाये जाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "किसी को पीछे न छोड़ें" का अर्थ है ठोस तथ्यों के साथ प्रतिक्रिया करने की आवश्यकता पर जागरूक होना; न केवल जल संरचनाओं के रखरखाव या सुधार हेतु बल्कि भविष्य में निवेश करने तथा पानी के उपयोग और उसकी देखभाल के लिए नई पीढ़ियों को शिक्षित करने के द्वारा भी।" जागरूकता का यह कार्य, उन्होंने कहा, "ऐसे विश्व में एक प्राथमिकता है जिसमें सब कुछ को फेंक दिया जाता और सबकुछ का तिरस्कृत कर दिया जाता है। ऐसे विश्व में जो, कई मामलों में, हमारे पास मौजूद संसाधनों के महत्व का अनुमान भी नहीं लगाता है।"

अनमोल जल संसाधन की रक्षा हेतु उन्होंने शिक्षा को अत्यधिक महत्वपूर्ण निरूपित किया और कहा कि शिक्षा की चुनौती इस अनमोल संसाधन के प्रति नया दृष्टिकोण उत्पन्न करेगी तथा उन पीढ़ियों का निर्माण करेगी जो धरती द्वारा प्रदत्त अनमोल जल संसाधन के महत्व को पहचानने में सक्षम बन सकेगी। उन्होंने कहा कि हम सब भविष्य के निर्माता हैं इसलिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर हम जल को केवल मार्केट के कानूनों द्वारा नियंत्रित संसाधन न बनायें।

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