विश्वास का संबंध, हमें एकता में बांधता है

रोमानियाई ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के स्थायी सिनॉड के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा रोमानियाई ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के स्थायी सिनॉड के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा के प्रथम दिन प्राधिधर्माध्यक्षीय आवास में, रोमानियाई ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के स्थायी सिनॉड के सदस्यों से मुलाकात की।

सिनॉड के सदस्यों को सम्बोधित कर संत पापा ने कहा, "ख्रीस्त जी उठे हैं। प्रभु के पुनरूत्थान की उद्घोषणा प्रेरितों ने की जिसको कलीसियाओं द्वारा हस्तांतरित एवं संरक्षित किया गया है। पास्का के दिन पुनर्जीवित प्रभु को देखकर प्रेरित प्रफुल्लित हो उठे थे। प्रिय भाइयो, इस पास्का काल में, आपके चेहरों पर उनका प्रतिबिम्ब देखकर मैं आनन्दित हूँ।"

संत पापा जॉन पौल द्वितीय की रोमानिया यात्रा

बीस वर्षों पहले इस पवित्र सिनॉड के पूर्व संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने कहा था, "मैं आपके गिरजाघरों में अंकित ख्रीस्त के चेहरे पर चिंतन करने आया हूँ। मैं इसके पीड़ित चेहरे की आराधना करने आया हूँ जो आपके लिए नई आशा की प्रतिज्ञा है।” (प्राधिधर्माध्यक्ष एवं सिनॉड को संत पापा जॉन पौल द्वितीय का संबोधन, 8 मई 1999: धर्मशिक्षा XXII.1 [1999], 938)

संत पापा ने कहा कि मैं भी यहाँ एक तीर्थयात्री के रूप में अपने भाइयों के चेहरे पर प्रभु के चेहरे को देखने के लिए आया हूँ और जब मैं आपकी ओर देख रहा हूँ तब आपके स्वागत के लिए, मैं आपको सहृदय धन्यवाद देता हूँ।  

विश्वास का संबंध जो हमें एकता के सूत्र में बांधता है, हमें प्रेरितों के पास वापस ले चलता है, जिन्होंने पुनर्जीवित येसु का साक्ष्य दिया और खासकर, पेत्रुस एवं अंद्रेयस, जिन्होंने परम्परा के अनुसार विश्वास को इस भूमिय में लाया। वे दोनों सहोदर भाई थे (मार. 1:16-18) प्रभु के लिए शहीद होने के कारण वे असाधारण भाई बन गये। वे हमें स्मरण दिलाते हैं कि रक्त का एक रिश्ता है जो पहले से है और शताब्दियों से बह रही एक मौन और जीवन देने वाली धारा के रूप में,  हमारी यात्रा में हमें पोषित और सबल करने से कभी नहीं थकती।

पीड़ितों के साथ सहानुभूति रखने में एक साथ

संत पापा ने कलीसिया में हो रहे अत्याचार की याद करते हुए कहा, "यहाँ की तरह ही कई अन्य जगहों में आज हम मृत्यु से पार होने एवं पुनरूत्थान का अनुभव कर रहे हैं। इस देश के कितने बेटे बेटियाँ हैं जो विभिन्न कलीसियाओं एवं ख्रीस्तीय समुदायों के हैं उन्होंने पुण्य शुक्रवार के अत्याचार का अनुभव किया है, पुण्य शनिवार के मौन का एहसास किया है तथा पुण्य रविवार के पुनरूत्थान का अनुभव भी किया है। उनमें से कितने शहीद एवं विश्वास की घोषण करने वाले थे। हाल के दिनों में, विभिन्न कलीसियाई समुदायों ने जेल में भी एक-दूसरे के साथ खड़े होकर अपना समर्थन दिया। आज उनका उदाहरण हमारे सामने सामने है। उन्होंने किस बात के लिए दुःख सहा और अपनी जान तक गवाँ दी। संत पापा ने कहा कि उनका अपमानित या कलंकित होना विरासत के लिए बहुत कीमती है। यह एक साझा विरासत है और यह हमें निमंत्रण देता है कि हम उन भाई बहनों के करीब रहें जिन्हें इस परिस्थिति से होकर गुजरना पड़ रहा है। उनकी पीड़ा एवं दुःख में तथा पुनरूत्थान में ख्रीस्त के साथ संयुक्त रहें ताकि हम भी उसी तरह एक नया जीवन जी सकेंगे। (रो. 6: 4)

पूर्वाधिकारियों के बीच मुलाकात पास्का उपहार

संत पापा ने कहा कि 20 वर्षों पूर्व हमारे पूर्वाधिकारियों के बीच मुलाकात एक पास्का उपहार था जिसने न केवल रोमानिया की ऑर्थोडॉक्स एवं काथलिक कलीसिया के संबंध को नवीकृत किया किन्तु ऑर्थोडोक्स-काथलिक वार्ता को भी आगे बढ़ाया। रोम के धर्माध्यक्ष का ऑर्थोडॉक्स बहुल देश की यात्रा ने इस तरह के कई अवसरों के लिए रास्ता खोल दिया। संत पापा ने प्राधिधर्माध्यक्ष तेओकटिस्ट के प्रति अपना आभार प्रकट किया। साथ ही साथ, एकता, एकता के नारे की भी याद की जो बुखारिस्ट में उन दिनों गूँजे थे। संत पापा ने कहा कि वह आशा की गूँज थी जिसकी घोषणा ईश प्रजा की ओर से की गयी थी। यह एक भविष्यवाणी थी जिसने एक नये युग का उद्घाटन किया, उस भाईचारा की खोज एवं पुनः प्रवर्तन हेतु एक साथ यात्रा करने के लिए जो आज भी हमें एक बनाये रखा है।

यादों की ताकत पर एक साथ यात्रा

उन्होंने कहा कि हमें यादों की ताकत पर एक साथ यात्रा करना, न कि उन गलतियों की याद करना है जो न्याय करने और पूर्वाग्रहों की वजह से समाप्त हो गई हैं, जो हमें एक दुष्चक्र में घेरती और केवल बंजरता लाती हैं। मूल की याद करना, प्रथम शताब्दी की याद दिलाती है, जब सुसमाचार का साहस एवं नबी के मनोभाव से प्रचार किया गया था। नये लोगों एवं संस्कृतियों से मुलाकात कर उन्हें आलोकित किया गया था। उस समय भी विश्वास के कारण कई शहीद हुए थे जो अब स्वर्ग में हैं। संत पापा ने कहा कि एक साथ कदम उठाने एवं उसे पूरा करने की याद हमें प्रोत्साहित करती है कि हम जागरूकता के साथ भविष्य की ओर आगे बढ़ें। 

एक साथ यात्रा करने का अर्थ है

एक साथ यात्रा करने का अर्थ है प्रभु को सुनना। हमारे लिए एक अच्छा उदाहरण है कि प्रभु किस तरह पास्का की संध्या एम्माउस के रास्ते पर अपने शिष्यों के साथ चले। शिष्य उन बातों पर चर्चा कर रहे थे जो उन दिनों घटी थी। वे चिंतित एवं डरें हुए थे एवं उनके मन में कई सवाल थे। प्रभु ने उन्हें धीरज से सुना और उनके संवाद में प्रवेश किया, उन्हें समझाया तथा जो कुछ हुआ था उसके बारे विचार करने में उनकी मदद की। (लूक. 24:15-27).

हमें भी प्रभु को सुनने की आवश्यकता है, खासकर, इन वर्षों में जब दुनिया तीव्र सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। तकनीकी विकास एवं आर्थिक समृद्धि से लाभ जरूर हुआ है किन्तु बहुत सारे लोग बहिष्कृत हैं, परम्परागत मूल्य खो रहे हैं, जातिगत एवं सामाजिक जीवन कमजोर पड़ रहे हैं जो बढ़ती भय की भावना में देखा जा सकता है जो बहिष्कार एवं घृणा का रूप ले लेता है। हमें व्यक्तिवाद को नहीं बढ़ाने एवं घृणा की संस्कृति से बचने के लिए एक-दूसरे की मदद करने की जरूरत है। हालांकि, यह विकास के रास्ते पर तेजी से बढ़ने के समान दिखाई पड़ता है किन्तु वास्तव में उदासीन एवं सतही है। सामाजिक बंधनों के कमजोर पड़ने से जो अलगाव उत्पन्न होता है, उसका समाज की मौलिक ईकाई परिवार पर विशेष प्रभाव डालता है। इसके लिए हमें चाहिए कि हम बाहर निकलें तथा भाई-बहनों के साथ मिलकर समस्याओं का सामना करें।

प्रभु का निमंत्रण, सेवा के लिए उठना और चलना

संत पापा ने कहा कि यात्रा का अंत होता है जैसा कि एम्माउस में हुआ था जब शिष्यों ने प्रभु को अपने साथ ठहरने का आग्रह किया था। प्रभु, जो तोड़ी गयी रोटी में प्रकट हुए हमें उदारता, एक-दूसरे की सेवा करने, ईश्वर को समर्पित होने और उनकी अच्छाइयों का प्रचार करने हेतु निमंत्रण देते हैं। जो निष्क्रिय नहीं है बल्कि सेवा के लिए उठने और चलने के लिए प्रेरित करता है। संत पापा ने कहा कि हम इसका अच्छा उदाहरण रोमानियाई ऑर्थोडॉक्स कलीसियाओं में पाते हैं जो पश्चिमी यूरोप के काथलिक धर्मप्रांतों को सहयोग देती हैं।   

नये पेंतेकोस्त की ओर यात्रा

यह रास्ता जो हमें पास्का से पेंतेकोस्त की ओर ले रहा है, इसकी उत्पति 20 वर्षों पहले उस पास्का की प्रातः की एकता से उत्पन्न हुई जहाँ से हम नये पेंतेकोस्त की ओर आगे बढ़ रहे हैं। शिष्यों के लिए पास्का उनकी यात्रा की नई शुरूआत थी जहाँ उनके भय एवं अनिश्चितताएं समाप्त नहीं होने पर भी वे आगे बढ़े। इस तरह पेंतेकोस्त तक ईश माता मरियम के साथ, शिष्य ने एक आत्मा एवं विविधताओं तथा भाषाओं की समृद्धि के साथ पुनर्जीवित ख्रीस्त का साक्ष्य अपने शब्दों एवं जीवन से दिया।   

संत पापा ने कहा कि हमारी यात्रा भाई-बहनों के रूप में हो चुकी है, जहाँ हम एक ही प्रभु के पुनरूत्थान में विश्वास को साझा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा हमें नवीकृत करे, विविधताओं की सुन्दरता में एकता बनाये रखे। यह आग हमारे विश्वास की कमी को जला डाले तथा अपनी सांस द्वारा साक्ष्य देने के लिए हमारे संदेहों को मिटाये। भाईचारा के निर्माता, हमें एक-दूसरे के बगल में चलने की कृपा प्रदान करे। नवीन चीजों के रचने वाले, मिशन में हमें साहस प्रदान करे। शहीदों के बल हमें इस मिशन को फलहीन बनाने से बचाये।  

संत पापा ने निमंत्रण दिया कि हम एक साथ यात्रा करते हुए तृत्वमय ईश्वर की स्तुति करें तथा येसु का दर्शन करने के लिए एक साथ अपने भाई बहनों की मदद करें। अंततः उन्होंने उन्हें अपने स्नेह, आभार, मित्रता एवं प्रार्थनाओं का आश्वासन दिया।

संदेश समाप्त कर संत पापा ऑर्थोडॉक्स के नये महागिरजाघर की ओर गये जहाँ उन्होंने हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ किया।     

 

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