गौशाला साझेदारी के लिये आमंत्रित करता है, पोप फ्राँसिस

वाटिकन में ख्रीस्तजयन्ती महापर्व के उपलक्ष्य में संगीत समारोह के लिये उपस्थित कलाकारों से मुलाकात के अवसर पर सन्त पिता फ्राँसिस ने कहा कि गौशाला हमें विनम्रता एवं अन्यों के साथ साझेदारी के लिये आमंत्रित करता है।

काथलिक शिक्षा सम्बन्धी परमधर्मपीठीय परिषद के सौजन्य से आयोजित संगीत समारोह के कलाकारों का अभिवादन करते हुए सन्त पिता ने येसु ख्रीस्त की जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं तथा स्मरण दिलाया कि येसु ने विनम्र बनकर एक गौशाला में जन्म लिया था।

उन्होंने कहा कि ईश पुत्र होते हुए भी प्रभु येसु ने अपने देहधारण के लिये एक विनीत गौशाला को चुना, जो हम सब के लिये जीवन का सबक होना चाहिये कि हम भी विनम्र बनकर उन लोगों की मदद करें जो हाशिये पर जीवन यापन के लिये बाध्य हैं।

सन्त पिता ने कहा कि इस वर्ष उन्होंने ख्रीस्तजयन्ती महापर्व के उपलक्ष्य में सन्त फ्राँसिस असीसी द्वारा 13 वीं शताब्दी में निर्मित गौशाला को आदर्श माना है। इन्हीं सन्त के पद चिन्हों पर चलकर हम सर्वसाधारणता को अपनायें तथा ईश पुत्र के देहधारण के रहस्य पर मनन-चिन्तन करें। उन्होंने कहा, "गौशाला की चरनी से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरता है कि हम खुद को धन और खुशहाली के मायामोह द्वारा धोखा नहीं दे सकते।"

उन्होंने कहा, "गौशाला में जन्म लेकर ईश्वर ख़ुद एक अद्वितीय एवं यथार्थ क्रान्ति का शुभारम्भ करते हैं जो ज़रूरतमन्दों को आशा एवं प्रतिष्ठा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर द्वारा आरम्भ यह क्रान्ति प्रेम और साझेदारी की क्रान्ति है जिसे आत्मसात कर हम भी विश्व को सबके लिये एक बेहतर स्थल बना सकते हैं।" 

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