काम्पीदोलियो प्रशासनिक भवन में संत पापा फ्राँसिस का संदेश

आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने काम्पीदोलियो प्रशासनिक भवन में उपस्थित नगर पालिका के पार्षदों, सरकार के प्रतिनिधियों और अधिकारियों का सौहार्दपूर्ण अभिवादन किया और उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

काथलिक धर्म के केंद्र रोम

संत पापा ने कहा कि रोम शहर काथलिक धर्म का केंद्र है। 2800 वर्ष का इतिहास गवाह है कि रोम शहर के प्रशासकों द्वारा ख्रीस्तीय धर्म के प्रचार और प्रसार में विशेष योगदान रहा है। यह वह शहर है जिसने प्राचीन एलाडे द्वारा निर्मित दर्शन, कला और सामान्य रूप से संस्कृति के मूल्य और सुंदरता को पहचाना है और इसे स्वीकार किया है। उसे ग्रीको-रोमन कहा जाता है। एक ही समय में, संयोग से रोम में येसु के प्रेरित पेत्रुस और पौलुस अपने मिशन में कार्यरत शहादत का ताज पहने। उनका रक्त, कई अन्य गवाहों के साथ मिलकर, ख्रीस्तियों की नई पीढ़ियों के लिए बीज बन गए। उन्होंने शहर को एक नया चेहरा देने में योगदान दिया है। संत पापा ने कहा कि सात पहाड़ियों के शहर में ऐतिहासिक स्मारकों, कलाओं को सावधानी के साथ सुरक्षित रखा गया है।

 रोम शहर एक गंतव्य और प्रतीक

संत पापा ने कहा कि रोम शहर ने इटली के हर क्षेत्र और दुनिया के कई देशों के छात्रों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, शरणार्थियों और प्रवासियों का स्वागत किया है। यह आकर्षण का केंद्र बन गया है। यह देश महाद्वीपीय उत्तर और भूमध्यसागरीय दुनिया के बीच, लैटिन और जर्मन सभ्यताओं के बीच, नागरिक शक्तियों और आध्यात्मिक शक्तियों के बीच काज बन गया है,जो एक दूसरे को जोड़ती है। वास्तव में, इसकी पुष्टि की जा सकती है कि, सुसमाचार के शब्दों की ताकत से राजनीतिक नेताओं और धार्मिक अगुवाओं के बीच, सभी के भले के लिए आपसी सम्मान और मानव व्यक्ति की गरिमा के अनुरूप कार्य संपन्न किये गये हैं।

रोम उन सभी के लिए एक गंतव्य और प्रतीक बन गया है, जो इसे इटली की राजधानी और काथलिक धर्म के केंद्र के रूप में पहचानते हैं, उन्होंने अपने स्मारकों और अतीत के निशानों की प्रशंसा करने के लिए इसे स्थापित किया है, ताकि वे शहीदों की यादों को संजो सकें और काथलिक पूजन विधि के पंचाग अनुसार वर्ष के सभी महत्वपूर्ण त्योहारों और महान जयंती तीर्थयात्राओं को मना सकें। साथ ही यह शहर इटली और वाटिकन राज्य के संस्थानों को अपनी सेवाएं देता है।

 ख्रीस्तियों की ज़िम्मेदारी

संत पापा ने कहा कि पैंतालीस साल उस अधिवेशन के बीत चुके हैं, जिसका शीर्षक था: "रोम धर्मप्रांत में दान और न्याय की उम्मीदों के सामने ख्रीस्तियों की ज़िम्मेदारी", जिसे "रोम की बुराइयों पर सम्मेलन" के रूप में जाना जाता है। इसने दूसरे वाटिकन महासभा के संकेतों को व्यवहार में लाने का बीड़ा उठाया और शहर के बाहरी इलाकों की वास्तविक स्थितियों को प्रकट किया, जहां इटली के अन्य हिस्सों से आए प्रवासियों का अधिक से अधिक जागरूकता के साथ स्वागत किया गया था। आज उन लोगों और अन्य उपनगरों ने कई प्रवासियों के आगमन को देखा है, जिनमें कई प्रवासी युद्ध और गरीबी से भाग कर यहाँ आये हैं, जो सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की स्थिति में अपने अस्तित्व का पुनर्निर्माण करना चाहते हैं।

 परमधर्मपीठ का सहयोग

संत पापा ने कहा कि परमधर्मपीठ शहर की भलाई के लिए, सभी की सेवा में विशेष रूप से सबसे गरीब और सबसे वंचित लोगों की सेवा में मुलाकात की संस्कृति को बढावा देने के लिए बेहतर सहयोग देना चाहता है। यह अपने सभी संस्थानों और संरचनाओं को संदर्भित करने वाले सभी लोगों और समुदायों को सक्रिय रूप से विश्वास के साक्ष्य में संलग्न होने हेतु अच्छी सेवा और रचनात्मक पहल को प्रोत्साहित करता है।

संत पापा ने सभी को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी। संत पापा ने विचारों की स्पष्टता और दैनिक गवाही के साथ रोम और उसके मिशन की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं की पुष्टि की। उन्होंने रोम वासियों की संरक्षिका ‘सालुस पोपोली रोमानी माता मरिया’ संरक्षक संतों संत पेत्रुस और पौलुस के संरक्षण में रोम शहर को समर्पित किया और उन्हें अपनी प्रार्थना और आशीर्वाद का आश्वासन दिया। 

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