कहीं भविष्य चिंता में ही न झुलस जाए आपका अनमोल जीवन!

चिंताओं से घिरे होने पर और चिंता मुक्त होकर जीने में दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। चिंताओं से मुक्त होकर जीने वाले अपनी समस्याओं को बहुत आसानी से हल कर पाते हैं और उनसे उबरना भी जानते हैं। जीवन में आनंद के लिए अपनी चिंताओं की पहचान और उनसे मुक्ति का प्रयास जरूरी है।

अपने आसपास आपने ऐसे व्यक्तियों को जरूर देखा होगा जो बहुत छोटी-छोटी बातों को लेकर चिंतित हो जाते हैं। बस के समय पर नहीं आने पर चिंतित, किसी से बोलचाल हो जाने पर चिंतित और अचानक होने वाले बदलाव से भी चिंतित। किसी भी छोटे विचलन को अपने लिए बड़ी चिंता का विषय बना लेना कुछ व्यक्तियों की आदत होती है।

एक ऐसा ही लड़का है - गोपाल ! जो हमेशा काम में लगा रहता था। वह एक पल भी बर्बाद नहीं करना चाहता था। वह जब भी कहीं जाता तो रास्ते भर सोचता कि, कल मैं  क्या-क्या करूँगा। खाना खाते-खाते सोचता है कि, खाने की बाद क्या करूँगा?नहाते, कपडे बदलते समय भी वह यही सोचता है कि, इसके बाद क्या काम करना है, काम कैसे होगा?

वह वर्तमान में क्या कर रहा है, तथा अपने वर्तमान में अपना जीवन कैसे  बीता रहा है, यह कभी नहीं सोचता था। उसे सदा अपने भविष्य की ही चिंता लगी रहती थीं।

ऐसे ही उसने अपना पूरा जीवन निकाल दिया। मृत्यु के समय उसे यह महसूस हुआ  कि वह तैयार नहीं हैं। वर्तमान को भुला कर उसने अपना जीवन खोखला बना दिया हैं । उसे तब  समझ आया जो बीत गया हो, जो आनेवाला हैं वह अनिश्चित हैं वही यथार्थ है और जीवन हैं, परन्तु यह समझने में उसने काफी देर कर दी थी ।

हर पल  चिंता करने की आदत, स्वाभाविकता और शांति से दूर ले जाती है और उसका असर हमारे कार्यो पर भी होता है। चिंताएं हमारी मानसिक शांति की राह की सबसे बड़ी बाधा हैं। इसलिए दिमाग को चिंताओं से मुक्त करना बहुत जरूरी है।

चिंतित और चिंतामुक्त व्यक्ति के बीच एक बड़ा फर्क यही है कि चिंता मुक्त व्यक्ति अपने आज के बारे में ही सोचता है। वह उन चीजों को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं रहता है, जो अभी हुई ही नहीं है। वैज्ञानिक भी इस बात से सहमत हैं कि एक चिंता दूसरी और दूसरी, तीसरी चिंता का कारण बनती है। जब आप सोचते हैं कि अगर ऐसा हुआ तो... और फिर उन स्थितियों के बारे में सोचने लग जाते हैं जो अभी आपसे बहुत दूर है। जो चिंतामुक्त व्यक्ति है वह समस्याओं के भविष्य के बारे में सोचने के बजाय उन्हें हल करने पर ध्यान देता है। वह कल को लेकर ज्यादा सशंकित नहीं रहता और इसलिए अपनी ऊर्जा का उपयोग आज में ही करता है।

बाईबल में भी सन्त मत्ती के सुसमाचार अध्याय 06 पद संख्या 34 में प्रभु येसु कहते है -

"कल की चिन्ता मत करो। कल अपनी चिन्ता स्वयं कर लेगा। आज की मुसीबत आज के लिए बहुत है।"

दोस्तों हम सभी समझते हैं की भविष्य की चिंता भी जरुरी हैं, पर अपने आने वाले कल की चिंता करके आज जो हो रहा है। उसे मत बिगाड़िए। अपना सारा ध्यान केवल आज पर केंद्रित कीजिये और मन लगाकर आज के कार्य को करे। जिससे आप अपनी ज़िन्दगी का भरपूर आनंद ले पाएंगे। इसी विचार के साथ।

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